बर्फ की आस में आए थे नैनीताल, दिलों पर नहीं जमी ठंड, खाली यादें लौट रहे टूरिस्ट, अब तक 'स्नोफॉल' क्यों नहीं?
नैनीताल और आसपास के हिल स्टेशन पर बर्फवारी आमतौर पर दिसंबर से फरवरी तक होती है, लेकिन कभी-कभी मौसम की अनिश्चितता के कारण बर्फ गिरना रुक जाता है. इस बार वैसा ही हुआ है. मौसम वैज्ञानिकों का कहना है कि बर्फ गिरने के लिए पर्याप्त नमी और ठंडी हवा का होना जरूरी है. इस वैसी स्थिति नहीं बनी है.;
नैनीताल की खूबसूरत वादियों और झीलों की ठंडी हवा में हर साल हजारों पर्यटक सर्दी के मौसम में बर्फबारी (स्नो फॉल) का आनंद लेने आते हैं, लेकिन कई बार, मौसम हमारे मन मुताबिक नहीं होता. ऐसा ही हुआ इस बार, जब हम बर्फ की आस लेकर नैनीताल पहुंचे, लेकिन ठंडी हवाओं और खूबसूरत नजारों के बावजूद स्नोफॉल नहीं हुई. इसका सीधा असर यह हुआ कि स्नोफॉल का मजा लेने यहां आये टूरिस्टों को निराशा हाथ लगी. पर्यटक यह सोचने पर मजबूर हुए कि इस बार अभी तक नैनीताल में क्यों नहीं हुई बर्फबारी. यहां तक कि हाई एल्टीट्यूड स्पॉट्स जैसे सनवॉक्स, नगरकोट और एवरेस्ट व्यू पॉइंट पर बर्फबारी का मजा लेने से लोग वंचित हैं.
क्यों नहीं हुई बर्फबारी?
- नैनीताल और आसपास के हिल स्टेशन में बर्फबारी का मौसम आमतौर पर दिसंबर से फरवरी तक रहता है,? लेकिन कभी-कभी मौसम का मिजाज अलग होता है.
- इस बार तापमान अपेक्षाकृत पहले की तुलना में ज्यादा है. बर्फ गिरने के लिए तापमान 0°C या उसके नीचे होना जरूरी है.
- बर्फ गिरने के लिए सही मात्रा में नमी और ठंडा हवा का होना भी जरूरत होता है. ऐसी स्थिति इस बार अभी तक नैनीताल में नहीं बनी है.
- ग्लोबल वार्मिंग और क्लाइमेट चेंज की वजह से कई सालों से बर्फबारी का समय और मात्रा अस्थिर हो गई है.
मौसमी बदलाव बिग फैक्टर - CSE साइंटिस्ट
सेंटर फॉर साइंस एंड एनवायरनमेंट (CSE) की वैज्ञानिक अनुमिता रॉय चौधरी ने स्टेट मिरर से बातचीत में कहा, ^केवल नैनीताल में ही नहीं, मौसम में बदलाव कम या ज्यादा ग्लोबल लेवल पर भी देखने को मिल रहा है. यह एक वैश्विक फेनोमेना हो गया है. उन्होंने कहा कि ग्लोबल वार्मिंग और प्रदूषण में इजाफा इसके मुख्य कारण हैं.^
उन्होंने कहा कि अब प्रदूषण का असर दूर दराज इलाकों या फिर यूं कहें कि स्थानीय स्तरों पर भी देखने को मिल रहा है. यह समस्या अब केवल महानगरों या बड़े-बड़े शहरों तक सीमित नहीं है. यह मानवीय स्वास्थ्य की लिहाज से चिंता का विषय है.
'अनसीजनल 'पैटर्न' से इंसानी इमोशंस को झटका
अनुमिता रॉय चौधरी के मुताबिक जहां तक नैनीताल की बात है तो वहां भी अभी तक बर्फवारी न होना इसी का संकेत है. इसकी वजह यह है कि वहां का भी वातावरण संतुलन बिगड़ रहा है. यह प्लैनेट में चेंज की वजह से हो रहा है. सर्दी, गर्मी बरसात का समय पर न होना, टाइम साइकिल में बदलाव मैनिफेस्टेशन का नतीजा है. ऐसा इसलिए होता है कि जब वातावरण में संतुलन बिगड़ता है तो समय पर कुछ नहीं होता. ऐसे में पर्यटकों को अनसीजनल पैनर्ट देखने को मिलते हैं. यही वजह है कि इस बार सर्दियों में जो लोग नैनीताल स्नोफॉल का मजा लेने के लिए वहां पहुंच रहे हैं, वह अपने टूर का आनंद नहीं उठा पा रहे हैं. यानी मौसमी बदलाव अब इंसान के इमोशंस को भी प्रभावित करने लगा है.
मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक लोकल ट्रेडर्स भी बर्फबारी न होने से निराश हैं. स्नो फॉल न होने से बिजनेस भी प्रभावित हुआ है. कारोबारियों का कहना है कि जल्द ही बर्फबारी होगी. ऐसा होना कारोबार के लिए भी जरूरी है. हमारा बिजनेस भी बढ़ेगा." बता दें कि उत्तराखंड में दिसंबर में लगभग 17.5 मिलीमीटर बारिश होती है, लेकिन इस साल, बारिश जीरो रही, जो क्लाइमेट के नियमों से पूरी तरह अलग है.