'तुम हिंदू हो, BHU चली जाओ'; AMU की प्रोफेसर ने खोले 27 साल के दर्दनाक राज-गर्भपात से लेकर ऑडियो सबूत तक

अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी (AMU) की एक प्रोफेसर ने 27 साल पुराने उत्पीड़न और भेदभाव की दर्दनाक कहानी सार्वजनिक की है. प्रोफेसर का आरोप है कि उन्हें बार-बार कहा गया, “तुम हिंदू हो, BHU चली जाओ”, मानसिक प्रताड़ना के चलते उन्हें गर्भपात तक कराना पड़ा. उन्होंने दावा किया कि उनके पास इस उत्पीड़न से जुड़े ऑडियो सबूत भी मौजूद हैं. यह मामला सामने आने के बाद AMU प्रशासन और शिक्षा जगत में हड़कंप मच गया है, वहीं जांच की मांग तेज हो गई है.;

उत्तर प्रदेश की अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी (AMU) एक बार फिर गंभीर विवाद के केंद्र में आ गई है. राजनीति विज्ञान विभाग की सीनियर प्रोफेसर रचना कौशल ने यूनिवर्सिटी प्रशासन और विभागीय अधिकारियों पर 27 वर्षों से मानसिक, पेशेवर और धार्मिक उत्पीड़न के बेहद गंभीर आरोप लगाए हैं. उनका दावा है कि उन्हें सिर्फ हिंदू होने की वजह से लगातार निशाना बनाया गया.

प्रोफेसर रचना कौशल ने इस पूरे मामले की औपचारिक शिकायत कुलपति (VC) प्रो. नईमा खातून को सौंप दी है, जिसके साथ ऑडियो रिकॉर्डिंग और दस्तावेजी सबूत भी लगाए गए हैं. शिकायत के बाद मामले की आंतरिक जांच शुरू कर दी गई है. रचना कौशल का कहना है कि अब हालात ऐसे हो गए हैं कि उनके पास कानूनी कार्रवाई के अलावा कोई रास्ता नहीं बचा है और वह जल्द एफआईआर दर्ज कराने की तैयारी में हैं.

1998 में नियुक्ति के बाद ही शुरू हुआ उत्पीड़न

प्रोफेसर रचना कौशल ने बताया कि वह वर्ष 1998 में AMU में लेक्चरर के रूप में नियुक्त हुई थीं. नियुक्ति के कुछ ही समय बाद उनके साथ भेदभाव और मानसिक उत्पीड़न शुरू हो गया. उन्होंने कहा कि “मेरी नियुक्ति के कुछ समय बाद ही भेदभाव और मानसिक उत्पीड़न शुरू हो गया. मैंने कभी नहीं सोचा था कि एक केंद्रीय विश्वविद्यालय में मेरी धार्मिक पहचान को मेरे खिलाफ इस्तेमाल किया जाएगा.”

गर्भावस्था के दौरान दबाव, जुड़वां बच्चों का गर्भपात

रचना कौशल ने आरोप लगाया कि वर्ष 2004 में जब वह जुड़वां बच्चों के साथ गर्भवती थीं, तब भी उन पर लगातार काम का दबाव बनाया गया, जिससे उन्हें गर्भपात का सामना करना पड़ा. उन्होंने बताया कि उनके पति डॉ. डी.के. पांडे, जो जेएन मेडिकल कॉलेज, AMU में वरिष्ठ प्रोफेसर थे, का 2012 में निधन हो गया.

'तुम हिंदू हो, बीएचयू जाओ'- डीन पर गंभीर आरोप

प्रोफेसर रचना कौशल ने डीन प्रो. मोहम्मद नफीस अहमद अंसारी पर सीधे तौर पर धार्मिक टिप्पणी करने का आरोप लगाया है. उन्होंने कहा कि 'डीन ने मुझसे कहा कि 'तुम हिंदू हो, बीएचयू चली जाओ.' उन्होंने यह भी कहा कि हिंदू शिक्षक जानबूझकर मुस्लिम छात्रों को नहीं पढ़ाते और कॉन्फ्रेंस में उनकी गतिविधियों पर सवाल उठाए.” उन्होंने इन टिप्पणियों को व्यक्तिगत अपमान और विश्वविद्यालय की धर्मनिरपेक्षता पर हमला बताया. रचना कौशल का दावा है कि इन बयानों की ऑडियो रिकॉर्डिंग उन्होंने कुलपति को सौंपी है.

पेशेवर छवि को नुकसान पहुंचाने का आरोप

प्रोफेसर कौशल ने आरोप लगाया कि डीन ने उनकी पेशेवर साख को नुकसान पहुंचाने की कोशिश की. उन्होंने बताया कि मई 2025 में जब वह अमेरिका में अपनी बेटी के दीक्षांत समारोह में थीं, तब जानबूझकर बोर्ड ऑफ स्टडीज (BoS) की बैठक बुलाई गई और एजेंडा देर से भेजा गया. कई अनुरोधों के बावजूद उन्हें ऑनलाइन मीटिंग लिंक नहीं दिया गया. उन्होंने यह भी कहा कि BoS की वैधानिक सदस्य होने के बावजूद उन्हें NHRC मानवाधिकार प्रशिक्षण कार्यक्रम का कोऑर्डिनेटर नहीं बनाया गया और यह जिम्मेदारी एक जूनियर शिक्षक को दे दी गई, जिसे इस क्षेत्र का कोई अनुभव नहीं था.

विभाग में डर और सांप्रदायिक तनाव का माहौल

प्रोफेसर रचना कौशल का कहना है कि डीन के व्यवहार से विभाग में डर, तनाव और सांप्रदायिक विभाजन का माहौल बन गया है. उन्होंने कहा कि 'मेरे कई मुस्लिम सहयोगी और दोस्त हैं, लेकिन डीन जानबूझकर सांप्रदायिक विभाजन पैदा कर रहे हैं. मेरी नियुक्ति और आचरण से जुड़े सभी दस्तावेज वैध हैं, जबकि डीन की प्रोफेसर के रूप में नियुक्ति ही अनियमित है.'

प्रमोशन रोकने की साजिश, हाईकोर्ट जाना पड़ा

रचना कौशल ने आरोप लगाया कि 2015 में जानबूझकर उनका प्रमोशन रोका गया. उन्होंने कहा कि 'मुझे अयोग्य घोषित किया गया, जबकि मुझसे कम योग्य लोगों को प्रमोशन दे दिया गया. प्रशासन से शिकायत बेअसर रही, तब मुझे हाईकोर्ट जाना पड़ा. अदालत के आदेश के बाद ही मेरा प्रमोशन हुआ.' उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि विभाग में उन्हें जाति आधारित टिप्पणियों का भी सामना करना पड़ा.

'अब कानूनी कार्रवाई ही आखिरी रास्ता'

प्रोफेसर कौशल ने बताया कि उन्होंने 22 सितंबर 2025 को कुलपति से मुलाकात कर सबूतों के साथ शिकायत दी थी, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई. उन्होंने कहा कि 'डीन लगातार आरोप लगाते हैं, लेकिन उनकी प्रतियां नहीं दी जातीं. अब कानूनी कार्रवाई ही एकमात्र विकल्प बचा है. मैं जल्द एफआईआर दर्ज कराऊंगी और पूरे मामले को सार्वजनिक करूंगी.” उन्होंने निष्पक्ष जांच की मांग करते हुए प्रो. मोहम्मद नफीस अहमद अंसारी को डीन/एचओडी पद से हटाने की भी मांग की है.

डीन का जवाब: आरोप बेबुनियाद

वहीं, इस मामले पर डीन प्रो. मोहम्मद नफीस अहमद अंसारी ने सभी आरोपों को खारिज किया है. उन्होंने कहा कि 'प्रोफेसर कौशल की कुछ व्यक्तिगत शिकायतें हैं, जिन्हें उन्होंने कुलपति के सामने भी रखा है. मेरे खिलाफ लगाए गए आरोप पूरी तरह बेबुनियाद हैं.” AMU प्रशासन की ओर से जारी बयान में कहा गया है कि विश्वविद्यालय ने मामले का संज्ञान ले लिया है. प्रशासन ने स्पष्ट किया कि 'यूनिवर्सिटी में किसी भी व्यक्ति की गरिमा, सुरक्षा और अधिकारों के खिलाफ कोई भी गतिविधि बर्दाश्त नहीं की जाएगी. यदि आरोप सही पाए जाते हैं, तो निष्पक्ष और गहन जांच के बाद उचित कार्रवाई की जाएगी.'

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