ब्राह्मणों पर BSP का दांव, कौन हैं आशीष पांडे जिनका मायावती ने किया पहला चुनावी तिलक?

BSP नेता आशीष पांडे कौन हैं? मायावती ने जालौन की माधौगढ़ सीट से पहला ब्राह्मण उम्मीदवार क्यों बनाया, जानिए प्रोफाइल और विवाद.

( Image Source:  Ashish Pandey Insta )
By :  धीरेंद्र कुमार मिश्रा
Updated On : 26 Feb 2026 11:25 AM IST

बहुजन समाज पार्टी (BSP) ने 2027 विधानसभा चुनाव की तैयारियों के बीच बड़ा राजनीतिक संकेत देते हुए जालौन की माधौगढ़ सीट से आशीष पांडे को अपना पहला उम्मीदवार घोषित किया. बसपा प्रमुख मायावती का यह फैसला सिर्फ एक टिकट नहीं, बल्कि ब्राह्मण वोट बैंक को साधने की रणनीति के तौर पर देखा जा रहा है. दिलचस्प बात यह है कि आशीष पांडे पहले भी एक बड़े विवाद के चलते राष्ट्रीय सुर्खियों में रह चुके हैं, लेकिन अब वे पार्टी के “ब्राह्मण चेहरा” बनकर उभरे हैं. ऐसे में सवाल उठता है - कौन हैं आशीष पांडे, क्यों खास हैं और उनकी उम्मीदवारी यूपी की राजनीति में क्या असर डाल सकती है?

कौन हैं आशीष पांडे?

बहुजन समाज पार्टी (BSP) के नेता आशीष पांडे एक बार फिर सुर्खियों में हैं, लेकिन इस बार वजह कोई विवाद नहीं, बल्कि राजनीति में उनका बढ़ता कद है. उत्तर प्रदेश के जालौन जिले से ताल्लुक रखने वाले आशीष पांडे को बसपा ने आगामी 2027 विधानसभा चुनाव के लिए माधौगढ़ सीट से अपना पहला उम्मीदवार घोषित किया है. उन्हें पार्टी का “ब्राह्मण चेहरा” माना जा रहा है.

BSP से क्या है उनका राजनीतिक कनेक्शन?

आशीष पांडे लंबे समय से BSP से जुड़े हुए हैं और स्थानीय राजनीति में सक्रिय भूमिका निभाते रहे हैं. उनके परिवार का भी राजनीतिक बैकग्राउंड रहा है - उनके पिता राकेश कुमार पांडे सांसद रह चुके हैं. इसी वजह से उन्हें राजनीति की समझ और नेटवर्क दोनों विरासत में मिले.

मायावती ने उन्हें पहला उम्मीदवार क्यों चुना?

बसपा प्रमुख मायावती ने 2027 चुनाव की तैयारी में सबसे पहले ब्राह्मण उम्मीदवार की घोषणा करके बड़ा राजनीतिक संदेश दिया है. आशीष पांडे को आगे कर पार्टी एक बार फिर “ब्राह्मण + मुस्लिम + दलित” समीकरण को मजबूत करने की कोशिश कर रही है. यह वही फॉर्मूला है जिसने 2007 में BSP को पूर्ण बहुमत दिलाया था.

पहली बार कब और क्यों सुर्खियों में आए थे?

आशीष पांडे का नाम पहली बार साल 2018 में चर्चा में आया था, जब लखनऊ के एक होटल के बाहर उनका रिवॉल्वर लहराने वाला वीडियो वायरल हुआ था. इस वीडियो में वे कथित तौर पर एक महिला और उसके साथी को धमकाते नजर आए थे. वीडियो वायरल होते ही मामला पुलिस तक पहुंचा और उन्होंने बाद में सरेंडर कर कानूनी प्रक्रिया का सामना किया. इस घटना ने उन्हें राष्ट्रीय स्तर पर सुर्खियों में ला दिया था.

अब फिर क्यों चर्चा में हैं आशीष पांडे?

इस बार उनकी चर्चा का कारण सकारात्मक राजनीतिक घटनाक्रम है. BSP ने उन्हें जालौन की माधौगढ़ सीट से उम्मीदवार बनाकर चुनावी मैदान में उतार दिया है. यह कदम पार्टी की रणनीतिक वापसी की तैयारी के रूप में देखा जा रहा है, खासकर 2022 की हार के बाद. 

माधौगढ़ सीट क्यों है इतनी अहम? 

  • जालौन की माधौगढ़ विधानसभा सीट का राजनीतिक इतिहास काफी दिलचस्प रहा है.
  • 1962 से 1985 तक कांग्रेस का दबदबा रहा
  • 1989 में BSP ने पहली बड़ी जीत दर्ज की
  • 1989, 1993, 2002, 2007 और 2012 में BSP यहां से जीतती रही
  • यानी यह सीट BSP का मजबूत गढ़ मानी जाती है, जहां पार्टी फिर से अपनी पकड़ मजबूत करना चाहती है.

क्या BSP फिर दोहराएगी 2007 वाला ब्राह्मण फॉर्मूला?

बसपा लगातार ब्राह्मण वोटर्स को साधने की कोशिश कर रही है. 2007 में ब्राह्मणों के समर्थन से पार्टी ने 403 में से 206 सीटें जीतकर सरकार बनाई थी. अब आशीष पांडे को आगे कर पार्टी उसी सोशल इंजीनियरिंग मॉडल को दोहराने की रणनीति पर काम करती दिख रही है.

क्या विवादों का असर पड़ेगा?

हालांकि आशीष पांडे का नाम पुराने विवाद से जुड़ा रहा है, लेकिन BSP ने उन्हें टिकट देकर यह संकेत दिया है कि पार्टी उनके राजनीतिक प्रभाव और सामाजिक समीकरण को ज्यादा महत्व दे रही है. आने वाले समय में यह देखना दिलचस्प होगा कि उनका अतीत चुनावी प्रदर्शन को कितना प्रभावित करता है.

आशीष पांडे अब सिर्फ एक विवादित चेहरा नहीं, बल्कि BSP की 2027 चुनावी रणनीति का अहम हिस्सा बन चुके हैं. उनकी उम्मीदवारी यह साफ संकेत देती है कि पार्टी फिर से ब्राह्मण समीकरण के सहारे सत्ता में वापसी की कोशिश कर रही है.

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