सादगी वाला आश्रम या विवादों का केंद्र? स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद के 'श्री विद्या मठ' की पूरी कहानी
ज्योतिर्मठ के शंकराचार्य स्वाती अविमुक्तेश्वरानंर की वाराणसी स्थित श्री विद्या मठ को लेकर सोशल मीडिया पर कई दावे और आरोप सामने आए हैं. क्या है उसकी जमीनी हकीकत, आश्रम की संरचना, शिक्षा व्यवस्था और विवाद का सच. सब कुछ एक साथ समझिए.
स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती के आश्रम श्री विद्या मठ को लेकर इन दिनों कई तरह के आरोप, दावे और विवाद सामने आ रहे हैं. सोशल मीडिया पर इसे कहीं “शीशमहल” तो कहीं “सीक्रेट गतिविधियों वाला आश्रम” बताया जा रहा है. हालांकि जमीनी हकीकत इन दावों से काफी अलग और ज्यादा पारंपरिक नजर आती है. श्री विद्या मठ काशी की प्राचीन आध्यात्मिक धारा से जुड़ा एक ऐसा केंद्र है, जहां साधना, वैदिक शिक्षा और धर्मचर्चा साथ-साथ चलती है. यही वजह है कि यह मठ आज सिर्फ धार्मिक स्थल नहीं, बल्कि विचार, परंपरा और विवाद का केंद्र बन चुका है.
कहां है श्री विद्या मठ?
श्री विद्या मठ उत्तर प्रदेश के वाराणसी (काशी) शहर के सोनारपुरा इलाके के पास स्थित है. यह इलाका काशी के प्रमुख धार्मिक और सांस्कृतिक केंद्रों में गिना जाता है. मठ का स्थान ऐसा है जहां से काशी की पारंपरिक साधु-संत परंपरा और आध्यात्मिक गतिविधियों से सीधा जुड़ाव बना रहता है.
कैसा है आश्रम, क्या वाकई ‘शीशमहल’ जैसा है?
मठ का निर्माण पारंपरिक काशी शैली में किया गया है. यह कोई लग्ज़री या भव्य आधुनिक आश्रम नहीं है. सोशल मीडिया पर किए गए दावों के उलट यह 5 मंजिला इमारत नहीं, बल्कि 3 मंजिला भवन और एक बेसमेंट वाला साधारण ढांचा है. यह आश्रम दिखावे से ज्यादा साधना और अनुशासन पर आधारित है, जहां सादगी और धार्मिक वातावरण प्रमुख है.
क्या श्री विद्या मठ में बालिका शिक्षा की व्यवस्था है?
मठ में शिक्षा व्यवस्था को लेकर उठ रहे सवालों पर उन्होंने स्पष्ट किया कि यहां बालिकाओं की पढ़ाई नहीं होती. बालिकाओं के लिए अलग से मध्य प्रदेश के नरसिंहपुर में आश्रम संचालित है, जहां उनकी देखरेख और शिक्षा की व्यवस्था की जाती है. उन्होंने जोर देकर कहा कि काशी स्थित मठ का उस व्यवस्था से कोई प्रत्यक्ष संबंध नहीं है.
सिर्फ वेदपाठी ब्राह्मण बच्चों के लिए है शिक्षा की व्यवस्था?
मठ में केवल वेद अध्ययन करने वाले ब्राह्मण बालकों को ही प्रवेश दिया जाता है. यह प्रवेश पांचवीं कक्षा के बाद, आमतौर पर 10 से 15 वर्ष की आयु के बच्चों को दिया जाता है. यहां वेद शिक्षा का एक निर्धारित छह वर्षीय पाठ्यक्रम चलता है, जिसमें प्रत्येक छात्र का पूरा रिकॉर्ड रखा जाता है. बिना उचित दस्तावेज और पंजीकरण के किसी भी छात्र का प्रवेश संभव नहीं है.
इस तरह, मठ प्रशासन का दावा है कि यहां की व्यवस्था पूरी तरह संरचित, पारंपरिक और नियमबद्ध है, जबकि आरोपों और विवादों के बीच इसकी कार्यप्रणाली पर लगातार सवाल भी उठ रहे हैं.
आश्रम के अंदर क्या-क्या सुविधाएं हैं?
श्री विद्या मठ का पूरा ढांचा व्यवस्थित और पारंपरिक तरीके से बनाया गया है. इसमें :
बेसमेंट – पूजा स्थल (धार्मिक अनुष्ठान का मुख्य केंद्र).
ग्राउंड/हॉल एरिया – आगंतुकों और भक्तों से मिलने का स्थान.
पहली मंजिल – गुरुकुल, जहां छात्र (बटुक) रहते और पढ़ते हैं.
दूसरी मंजिल – रसोईघर, जहां साधु-संत और छात्रों के लिए भोजन बनता है.
तीसरी मंजिल – सत्संग हॉल और शंकराचार्य का निवास. यह पूरा सेटअप एक पारंपरिक गुरुकुल और संन्यासी जीवनशैली को दर्शाता है.
क्या यहां कोई लग्ज़री सुविधा (स्विमिंग पूल, LED, कालीन) है?
कुछ आरोपों में मठ को अत्यधिक आलीशान बताया गया, लेकिन जांच में ऐसे दावे बढ़ा-चढ़ाकर बताए गए या गलत पाए गए. यहां न तो किसी बड़े होटल जैसी सुविधाएं हैं और न ही कोई “शीशमहल” जैसी व्यवस्था. मठ की संरचना पूरी तरह साधारण, धार्मिक और पारंपरिक है.
कितने लोग यहां ठहर सकते हैं?
श्री विद्या मठ कोई होटल या धर्मशाला नहीं है. यहां स्थायी रूप से साधु-संत और गुरुकुल के छात्र (बटुक) रहते हैं. अस्थायी रूप से सीमित संख्या में भक्तों या आगंतुकों के ठहरने की व्यवस्था होती है. यहां हजारों लोगों के ठहरने जैसी बड़ी व्यवस्था नहीं है.
क्या है आश्रम की खासियत?
यह गुरुकुल परंपरा पर आधारित है. वैदिक शिक्षा का प्रमुख केंद्र है. अद्वैत वेदांत और शंकराचार्य परंपरा से जुड़ा है. धार्मिक मुद्दों पर सक्रिय भूमिका निभाता है. काशी में स्थित होने के कारण यह मठ सनातन परंपरा की जीवंत धारा का हिस्सा माना जाता है.
क्यों बना हुआ है यह मठ विवादों का केंद्र?
हाल के दिनों में मठ को लेकर कई आरोप सामने आए हैं. जैसे भव्यता, अंदरूनी व्यवस्था और कुछ व्यक्तियों के प्रभाव को लेकर सवाल उठाए गए. कुछ धार्मिक हस्तियों और लेखकों ने भी अलग-अलग दावे किए हैं. हालांकि इन दावों की पुष्टि अलग-अलग स्तर पर भिन्न रही है, जिससे यह मठ लगातार चर्चा और विवाद का विषय बना हुआ है.
कौन हैं स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद?
स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ज्योतिषपीठ बद्रीनाथ के शंकराचार्य हैं और वे स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती के उत्तराधिकारी माने जाते हैं. स्वाती जी का जन्म 15 अगस्त 1969 में प्रतापगढ़ (उत्तर प्रदेश) हुआ था. उनका मूल नाम उमाशंकर है. शुरुआती शिक्षा: गांव के प्राथमिक विद्यालय में. आगे की शिक्षा गुजरात के गुरुकुल में संस्कृत अध्ययन. कम उम्र में ही उन्होंने संन्यास मार्ग अपनाया और शंकराचार्य परंपरा में महत्वपूर्ण स्थान हासिल किया.