धांधली और अवैध वसूली के आरोपों के चलते UP में सहायक प्रोफेसर परीक्षा रद्द- योगी सरकार का बड़ा फैसला- 3 लोग गिरफ्तार

उत्तर प्रदेश सरकार ने असिस्टेंट प्रोफेसर भर्ती परीक्षा को निरस्त करने का बड़ा निर्णय लिया है. यह फैसला परीक्षा में धांधली और अवैध धन वसूली के गंभीर आरोप सामने आने के बाद लिया गया. मामले की जांच के दौरान यूपी एसटीएफ को परीक्षा प्रक्रिया में गड़बड़ी के पुख्ता सबूत मिले थे.;

( Image Source:  Sora_ AI )
Edited By :  सागर द्विवेदी
Updated On : 7 Jan 2026 5:35 PM IST

उत्तर प्रदेश सरकार ने असिस्टेंट प्रोफेसर भर्ती परीक्षा को निरस्त करने का बड़ा निर्णय लिया है. यह फैसला परीक्षा में धांधली और अवैध धन वसूली के गंभीर आरोप सामने आने के बाद लिया गया. मामले की जांच के दौरान यूपी एसटीएफ को परीक्षा प्रक्रिया में गड़बड़ी के पुख्ता सबूत मिले थे.

इसके बाद सरकार ने साफ किया कि पारदर्शिता से कोई समझौता नहीं किया जाएगा और आरोपों के घेरे में आई परीक्षा को रद्द करना जरूरी है. योगी सरकार के इस कदम को भर्ती प्रक्रियाओं में ईमानदारी और निष्पक्षता सुनिश्चित करने की दिशा में सख्त कार्रवाई के तौर पर देखा जा रहा है.

प्रेस विज्ञप्ति के मुताबिक, उत्तर प्रदेश शिक्षा सेवा चयन आयोग, प्रयागराज द्वारा विज्ञापन संख्या 51 के तहत सहायक आचार्य पद के लिए अप्रैल 2025 में आयोजित परीक्षा को लेकर अनियमितताओं, धांधली और अवैध धन वसूली से जुड़ी अहम जानकारियां यूपी एसटीएफ को मिली थीं. मामले की गंभीरता को देखते हुए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने इसकी गोपनीय जांच के आदेश दिए थे.

मिली सूचनाओं के आधार पर कार्रवाई करते हुए 20 अप्रैल 2025 को एसटीएफ ने एक बड़े गिरोह का पर्दाफाश किया. जांच में सामने आया कि यह गैंग 16 और 17 अप्रैल 2025 को आयोजित असिस्टेंट प्रोफेसर परीक्षा के फर्जी प्रश्नपत्र तैयार कर अभ्यर्थियों से ठगी कर रहा था. इस मामले में एसटीएफ ने महबूब अली, बैजनाथ पाल और विनय पाल को परीक्षा में धांधली और अवैध धन वसूली के आरोप में गिरफ्तार किया है.

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