झुंझुनूं में छात्र-छात्राओं के सामने घुटनों के बल क्यों बैठ गए शिक्षक? मांग ली गुरु दक्षिणा, जानें पूरा मामला
झुंझुनूं जिले के सूरजगढ़ उपखंड स्थित एक सरकारी स्कूल में शिक्षक के तबादले के विरोध में छात्र-छात्राएं छह दिन तक धरने पर बैठे रहे. भूगोल व्याख्याता अनिल कुमार खुद मौके पर पहुंचे और बच्चों के सामने हाथ जोड़कर धरना खत्म करने की अपील की. भावुक शिक्षक घुटनों के बल बैठ गए और इसे 'गुरु दक्षिणा' बताया. छात्रों ने यहां तक चेतावनी दी कि शिक्षक की वापसी तक वे स्कूल नहीं जाएंगे और टीसी कटवाने के आवेदन भी दे दिए.;
राजस्थान के झुंझुनूं जिले से शिक्षा व्यवस्था को झकझोर देने वाली तस्वीर सामने आई है, जहां एक सरकारी स्कूल में शिक्षक के तबादले के विरोध में पिछले छह दिनों से धरने पर बैठे बच्चों के सामने उसी शिक्षक को हाथ जोड़कर विनती करनी पड़ी. मामला सूरजगढ़ उपखंड की अगवाना खुर्द पंचायत स्थित सरकारी स्कूल का है.
भूगोल के व्याख्याता अनिल कुमार के स्थानांतरण के विरोध में छात्र-छात्राएं धरने पर बैठे हुए थे. जब इस विरोध की जानकारी खुद व्याख्याता अनिल कुमार को मिली, तो वे मौके पर पहुंचे और बच्चों से धरना खत्म करने की अपील की. इस दौरान भावुक दृश्य सामने आया, जिसका वीडियो भी अब सामने आ चुका है.
“बच्चों, धरना खत्म कर दो, यही मेरे लिए गुरु दक्षिणा होगी”
वीडियो में देखा जा सकता है कि शिक्षक बच्चों के सामने घुटनों के बल बैठ गए, हाथ जोड़कर उनसे धरना खत्म करने की गुहार लगाई और कहा, “बच्चों, धरना खत्म कर दो… यही मेरे लिए गुरु दक्षिणा होगी.” यह कहते हुए शिक्षक खुद भी भावुक हो गए, और कई छात्र-छात्राओं की आंखें छलक आईं.
छात्रों ने टीसी कटवाने के लिए दिए आवेदन
धरने पर बैठे छात्रों ने पहले ही ऐलान कर दिया था कि जब तक उनके प्रिय शिक्षक की स्कूल में वापसी नहीं होगी, वे आंदोलन खत्म नहीं करेंगे. हालात यहां तक पहुंच गए कि छात्रों ने स्कूल छोड़ने के लिए टीसी (Transfer Certificate) कटवाने के आवेदन तक दे दिए. छात्रों का साफ कहना था, “जब तक गुरुजी वापस नहीं आएंगे, हम स्कूल की दहलीज भी पार नहीं करेंगे.”
रोते हुए आए नजर छात्र
धरनास्थल पर मौजूद कई छात्र रोते नजर आए, तो कई की आंखें नम थीं. अधिकारियों द्वारा समझाइश की कोशिशें भी बेअसर रहीं। बच्चों का कहना था कि अनिल कुमार न सिर्फ शिक्षक हैं, बल्कि उनके लिए मार्गदर्शक और प्रेरणा हैं. वहीं, व्याख्याता अनिल कुमार ने छात्रों को समझाते हुए कहा कि स्थानांतरण शिक्षा विभाग की एक सामान्य प्रशासनिक प्रक्रिया है और इसमें व्यक्तिगत स्तर पर कुछ भी नहीं किया जा सकता. हालांकि, भावनाओं में डूबे छात्रों और आक्रोशित अभिभावकों पर इसका खास असर नहीं पड़ा.
अभिभावकों ने शिक्षा विभाग पर खड़े किए सवाल
अभिभावकों ने भी शिक्षा विभाग पर सवाल खड़े किए हैं. उनका आरोप है कि मनमाने तबादलों से गांव का भविष्य प्रभावित हो रहा है. अभिभावकों का कहना है कि किसी अच्छे और समर्पित शिक्षक का अचानक तबादला बच्चों की पढ़ाई ही नहीं, बल्कि उनकी मानसिक स्थिति पर भी गहरा असर डालता है.
फिलहाल, यह मामला न सिर्फ शिक्षा विभाग के लिए चुनौती बन गया है, बल्कि यह सवाल भी खड़ा कर रहा है कि क्या प्रशासनिक फैसलों में बच्चों की भावनाओं और शिक्षा की निरंतरता को नजरअंदाज किया जा रहा है?