Army Day Parade 2026: भैरव बटालियन से लेकर ब्रह्मोस तक, जयपुर में दिखी भारत की भविष्य की सेना - Photos
Army Day Parade 2026 में जयपुर ने भारतीय सेना की अभूतपूर्व ताकत और आधुनिक स्वरूप देखा. पहली बार आम शहर में आयोजित परेड में ‘भैरव बटालियन’, ड्रोन वॉरफेयर, नाग मिसाइल सिस्टम, T-90 भीष्म टैंक, ब्रह्मोस और आकाशतीर जैसे हथियारों का प्रदर्शन हुआ. रोबोटिक म्यूल्स और अपाचे–प्रचंड हेलीकॉप्टरों ने भविष्य की जंग की झलक दी, जबकि वीर जवानों को सम्मानित भी किया गया.
78वें सेना दिवस पर जयपुर ने वह दृश्य देखा, जो अब तक सिर्फ सैन्य छावनियों तक सीमित रहता था. जगतपुरा की महल रोड पर जब भारतीय सेना की परेड शुरू हुई, तो यह सिर्फ एक समारोह नहीं, बल्कि जनता और सेना के बीच दूरी मिटाने का संदेश बन गया. पहली बार आर्मी डे परेड को खुले शहर में लाकर सेना ने यह दिखाया कि वह देश की सुरक्षा के साथ-साथ जनता के भरोसे से भी जुड़ी है. गुलाबी नगरी की सुबह राष्ट्रगौरव और सैन्य शक्ति के रंग में रंगी नजर आई.
15 जनवरी भारतीय सैन्य इतिहास का अहम दिन है, जब 1949 में फील्ड मार्शल के.एम. करियप्पा ने स्वतंत्र भारत की सेना की कमान संभाली थी. जयपुर की परेड उसी ऐतिहासिक विरासत को आधुनिक सैन्य सोच के साथ जोड़ती दिखी. यह आयोजन बताता है कि सेना परंपराओं को सहेजते हुए भविष्य की जंग के लिए खुद को लगातार अपडेट कर रही है. बीते दौर की विरासत और आने वाले कल की तैयारी. दोनों का संतुलन साफ झलक रहा था.
भैरव बटालियन का डेब्यू
इस परेड की सबसे बड़ी पहचान बनी ‘भैरव बटालियन’, जिसने पहली बार सार्वजनिक मंच पर मार्च किया. अत्याधुनिक हेडगियर, ड्रोन कंट्रोल सिस्टम और हाई-टेक कॉम्बैट गियर से लैस इस यूनिट ने बता दिया कि भारतीय सेना अब पूरी तरह फ्यूचर रेडी है. यह बटालियन हाइब्रिड वॉरफेयर के लिए तैयार की गई है, जहां परंपरागत लड़ाई और टेक्नोलॉजी एक साथ काम करती हैं.
स्पेशल फोर्स और इंफेंट्री के बीच सेतु बनी भैरव यूनिट
भैरव बटालियन की खासियत यह है कि यह पैरा स्पेशल फोर्स और नियमित इंफेंट्री के बीच एक मजबूत कड़ी बनती है. ड्रोन आधारित युद्ध, मल्टी-डोमेन ऑपरेशंस और त्वरित हमले इसकी पहचान हैं. ऑपरेशन सिंदूर से मिले अनुभवों ने इस यूनिट की नींव को और मजबूत किया है. दुर्गम इलाकों में दुश्मन के ठिकानों पर तेजी से कार्रवाई करने की क्षमता इसे बाकी यूनिट्स से अलग बनाती है.
नाग मिसाइल सिस्टम की एंट्री, टैंकों के लिए सीधा खतरा
मैकेनाइज्ड कॉलम में जैसे ही नाग मिसाइल सिस्टम MK-1 सामने आया, दर्शकों की निगाहें उस पर टिक गईं. यह पूरी तरह स्वदेशी ‘फायर एंड फॉरगेट’ एंटी-टैंक मिसाइल सिस्टम है. एक बार छोड़े जाने के बाद यह दुश्मन के टैंक का पीछा कर उसे नष्ट कर देता है. दिन हो या रात, मौसम जैसा भी हो. यह सिस्टम हर हाल में दुश्मन को खोज निकालने में सक्षम है.
T-90 भीष्म की गड़गड़ाहट से कांपी जयपुर की धरती
महल रोड पर T-90 ‘भीष्म’ टैंकों की एंट्री किसी रोमांचक दृश्य से कम नहीं थी. भारी इंजन की गर्जना और मजबूत ट्रैक की आवाज से पूरा इलाका गूंज उठा. हंटर-किलर क्षमता से लैस ये टैंक अंधेरे में भी दुश्मन को ढूंढकर सटीक निशाना साध सकते हैं. 125 मिमी की स्मूथबोर गन और मजबूत सुरक्षा कवच इसे युद्धभूमि का सबसे खतरनाक हथियार बनाते हैं.
जमीन से आसमान तक, भारत की मारक शक्ति का प्रदर्शन
परेड में मिसाइल, रॉकेट सिस्टम और एयर डिफेंस की ताकत ने भारत की रणनीतिक क्षमता को उजागर किया. ब्रह्मोस जैसी घातक क्रूज मिसाइल और पिनाका रॉकेट सिस्टम ने दूर तक मार करने की क्षमता दिखाई. आकाशतीर एयर डिफेंस सिस्टम और कामिकाजे ड्रोन ने आधुनिक युद्ध की तस्वीर साफ कर दी. MUM-T तकनीक के जरिए सैनिकों और मानवरहित वाहनों का तालमेल भविष्य की जंग की दिशा बता रहा था.
अपाचे और प्रचंड की उड़ान, आसमान से चेतावनी
जैसे ही अपाचे AH-64E और स्वदेशी प्रचंड हेलीकॉप्टर आसमान में उभरे, पूरा माहौल तालियों से गूंज उठा. ये हेलीकॉप्टर न सिर्फ फायरपावर, बल्कि तेज प्रतिक्रिया क्षमता के लिए भी जाने जाते हैं. थल और वायु शक्ति के इस तालमेल ने दिखाया कि भारतीय सेना अब संयुक्त ऑपरेशंस के लिए पूरी तरह तैयार है.
रोबोटिक म्यूल्स और भविष्य की जंग की झलक
परेड में रोबोटिक डॉग्स और अनमैन्ड ग्राउंड व्हीकल्स ने भविष्य की युद्ध रणनीति की झलक दी. सैपर स्काउट और ऐरावत-1000 जैसे सिस्टम कठिन इलाकों में सैनिकों का बोझ कम करेंगे. ये मशीनें रसद पहुंचाने, निगरानी और रेकी जैसे कामों में अहम भूमिका निभाने वाली हैं. इससे साफ है कि सेना टेक्नोलॉजी को अपनी रणनीति का केंद्र बना रही है.
वीरता को नमन, साहस को सम्मान
परेड से पहले आयोजित इन्वेस्टिचर सेरेमनी ने इस आयोजन को भावनात्मक ऊंचाई दी. थल सेनाध्यक्ष जनरल उपेंद्र द्विवेदी ने वीरता पुरस्कार देकर जवानों के अदम्य साहस को सलाम किया. ऑपरेशन सिंदूर में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाली यूनिट्स को विशेष सम्मान मिला. यह संदेश साफ था—भारतीय सेना की असली ताकत उसके जवानों का हौसला और बलिदान है.





