पद्म श्री के बाद PM Modi का डेरा बल्लन दौरा, पंजाब की राजनीति में हलचल; दलित वोट बैंक पर BJP नजर

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 1 फरवरी को गुरु रविदास जयंती के अवसर पर जालंधर के पास बल्लन गांव स्थित डेरा सचखंड बल्लन का दौरा करेंगे.;

( Image Source:  ANI, X/ @Punjab_Bsp )
Edited By :  विशाल पुंडीर
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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 1 फरवरी को गुरु रविदास जयंती के अवसर पर जालंधर के पास बल्लन गांव स्थित डेरा सचखंड बल्लन का दौरा करेंगे. यह दौरा ऐसे समय में हो रहा है जब पंजाब में करीब एक साल बाद विधानसभा चुनाव होने हैं और भाजपा राज्य में दलित समुदाय के बीच अपनी पकड़ मजबूत करने की कोशिशों में जुटी है.

यह यात्रा इसलिए भी अहम मानी जा रही है क्योंकि हाल ही में डेरा प्रमुख संत निरंजन दास को देश के चौथे सर्वोच्च नागरिक सम्मान पद्म श्री के लिए चुना गया है। प्रधानमंत्री का यह दौरा न सिर्फ धार्मिक और सामाजिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है, बल्कि इसके राजनीतिक मायने भी निकाले जा रहे हैं.

डेरा प्रमुख को पद्म श्री, उसी के बाद पीएम का दौरा

दिसंबर में डेरा प्रमुख संत निरंजन दास ने पार्टी के वरिष्ठ नेताओं के साथ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात की थी. इस दौरान उन्होंने 1 फरवरी को गुरु रविदास जयंती के समारोह में शामिल होने का आमंत्रण दिया था. साथ ही, अगले वर्ष गुरु रविदास की 650वीं जयंती के अवसर पर देशव्यापी आयोजनों का अनुरोध भी किया गया था. कुछ ही दिनों बाद संत निरंजन दास को पद्म श्री देने की घोषणा हुई, जिसे भाजपा ने संत रविदास के विचारों और संदेशों को सम्मान देने के रूप में प्रस्तुत किया.

केंद्रीय मंत्री बिट्टू ने दी दौरे की जानकारी

पंजाब में भाजपा के प्रमुख चेहरों में से एक और केंद्रीय मंत्री रवनीत सिंह बिट्टू ने बताया कि प्रधानमंत्री मोदी 1 फरवरी को दोपहर में डेरा बल्लन पहुंचेंगे. उन्होंने कहा पंजाब के सभी समुदायों के लोगों के लिए यह एक बहुत बड़ा क्षण है कि प्रधानमंत्री मोदी ने डेरा प्रबंधन द्वारा डेरा बल्लन में रविदास जयंती समारोह में शामिल होने के निमंत्रण को स्वीकार कर लिया है. बिट्टू ने यह भी अपील की कि प्रधानमंत्री के इस दौरे का राजनीतिकरण करने के बजाय सभी दलों को आकर उत्सव में शामिल होना चाहिए.

चुनावी मौसम में डेरा बल्लन का बढ़ता राजनीतिक महत्व

दोआबा क्षेत्र के केंद्र में स्थित डेरा सचखंड बल्लन रविदासिया समुदाय का प्रमुख धार्मिक स्थल है. चुनावी मौसम में यह डेरा हर विचारधारा के नेताओं का केंद्र बन जाता है. ऐसे में प्रधानमंत्री का यहां पहुंचना भाजपा के लिए प्रतीकात्मक और रणनीतिक दोनों रूप से महत्वपूर्ण माना जा रहा है. भाजपा फिलहाल पंजाब में अपनी स्वतंत्र राजनीतिक पहचान बनाने की कोशिश कर रही है, गौरतलब है कि शिरोमणि अकाली दल (SAD) और भाजपा का गठबंधन 2020 में कृषि कानूनों के मुद्दे पर टूट गया था. इसके बाद से दोनों दलों के फिर से साथ आने को लेकर केवल अटकलें ही लगती रही हैं.

दलित वोट बैंक पर खास नजर

जालंधर से करीब 8 किलोमीटर दूर स्थित बल्लन गांव का यह डेरा बड़ी संख्या में दलित अनुयायियों का केंद्र है. पंजाब की कुल आबादी में दलितों की हिस्सेदारी लगभग 32% है, जो देश के सभी राज्यों में सबसे अधिक है. वहीं, दोआबा क्षेत्र में अनुसूचित जाति की आबादी करीब 45% मानी जाती है. ऐसे में प्रधानमंत्री का यह दौरा भाजपा के लिए सामाजिक संदेश के साथ-साथ चुनावी रणनीति का भी अहम हिस्सा माना जा रहा है.

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