Begin typing your search...

अब टूट जाएगी चीन की कमर, 27 देशों (EU) से ट्रेड डील के बाद भारत बनेगा प्रोडक्शन हब

EU के 27 देशों से ट्रेड डील के बाद भारत को मैन्युफैक्चरिंग और सप्लाई चेन में बड़ा फायदा होने वाला है. पड़ोसी देश चीन पर निर्भरता घटेगी, भारत नया प्रोडक्शन हब बनेगा.

अब टूट जाएगी चीन की कमर, 27 देशों (EU) से  ट्रेड डील के बाद भारत बनेगा प्रोडक्शन हब
X
( Image Source:  ANI )
नवनीत कुमार
Edited By: नवनीत कुमार

Updated on: 27 Jan 2026 2:52 PM IST

भारत और यूरोपियन यूनियन (EU) के 27 देशों के बीच ऐतिहासिक ट्रेड डील हो गई है. भारत और यूरोपियन यूनियन (EU) के बीच साइन हुई यह ऐतिहासिक ट्रेड डील केवल सरकारों या कंपनियों तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका असर सीधे आम आदमी की रोज़मर्रा की ज़िंदगी पर पड़ेगा. यह डील सीधे-सीधे चीन की उस पकड़ को चुनौती देती है, जिसने दशकों से दुनिया की फैक्ट्रियों पर अपना दबदबा बना रखा था. अब यूरोप को सस्ता, भरोसेमंद और लोकतांत्रिक विकल्प मिल गया है और वह विकल्प है भारत. यही वजह है कि इस समझौते को चीन के लिए सबसे बड़ा झटका माना जा रहा है.

चीन पर निर्भरता कम करने की रणनीति पर काम कर रहा यूरोप अब भारत को अपना नया मैन्युफैक्चरिंग और सप्लाई चेन पार्टनर बनाने की दिशा में बढ़ चुका है. कम टैरिफ, बेहतर मार्केट एक्सेस और निवेश सुरक्षा के साथ यह डील भारत को ग्लोबल प्रोडक्शन हब बनने की ऐतिहासिक स्थिति में ले आई है. आने वाले वर्षों में फैक्ट्रियां, नौकरियां और टेक्नोलॉजी तीनों चीन से खिसककर भारत की तरफ आती दिख सकती हैं, जिससे वैश्विक आर्थिक संतुलन बदलने के संकेत साफ नजर आ रहे हैं.

रसोई और सुपरमार्केट में दिखेगा असर

इस डील का सबसे पहला असर रसोई और सुपरमार्केट में दिखेगा. भारत ने कई ऐसे उत्पादों पर टैरिफ पूरी तरह खत्म कर दिया है, जो आमतौर पर यूरोप से आते हैं. इससे रोज़मर्रा की जरूरतों से लेकर लाइफस्टाइल प्रोडक्ट्स तक की कीमतें कम होंगी. खास बात यह है कि यह सस्तापन सिर्फ बड़े शहरों तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि धीरे-धीरे छोटे बाजारों तक भी पहुंचेगा.

कहां और कितना टैरिफ घटा?

  • मेडिकल, सर्जिकल उपकरण 90%
  • मशीनरी 44%
  • केमिकल 22%
  • बीयर 50%
  • शराब 40%
  • वाइन 20-30%
  • फ्रूट्स 100%
  • स्पिरिट्स 40%

क्या-क्या होगा सस्ता?

  • ऑलिव ऑयल, मार्जरीन और वेजिटेबल ऑयल
  • फ्रूट जूस और प्रोसेस्ड फूड
  • पास्ता, चॉकलेट और बेकरी प्रोडक्ट्स
  • कुछ डेयरी और पैकेज्ड फूड आइटम

बीयर, वाइन और शराब पर टैक्स में बड़ी कटौती

India–EU डील के बाद विदेशी शराब पसंद करने वालों के लिए राहत की खबर है. यूरोप से आने वाली बीयर, वाइन और स्पिरिट्स पर टैक्स में भारी कटौती की गई है. इससे ये प्रोडक्ट्स अब पहले के मुकाबले सस्ते दाम पर मिल सकेंगे. हालांकि कीमतें राज्य सरकारों के टैक्स पर भी निर्भर करेंगी, लेकिन कुल मिलाकर बाजार में गिरावट तय मानी जा रही है.

क्या होगा आसान?

  • टैक्स और पाबंदियां ख़त्म होंगी
  • 90 फीसदी से ज्यादा सामान पर टैरिफ ख़त्म करने का प्लान
  • पांच से दस साल में पूरा होगा समझौता
  • छात्रों और कामगारों को अवसर बढ़ेगा
  • शराब और लक्जरी कारों की डिमांड बढ़ेगी
  • आईटी-इंजीनियरिंग सेक्टर में भी होगी ग्रोथ
  • यूरोप में लगेंगी भारत की फैक्ट्रियां

कार और दवाइयों में आएगा बड़ा बदलाव

इस ट्रेड डील का सबसे चर्चित पहलू कारों और दवाइयों से जुड़ा है. भारत ने यूरोप से आने वाली लग्जरी कारों पर लगने वाला भारी-भरकम टैक्स 110% से घटाकर सिर्फ 10% करने का ऐलान किया है, हालांकि सालाना आयात की एक सीमा तय की गई है. इसके अलावा दवाइयों और मेडिकल इक्विपमेंट पर टैक्स घटने से इलाज की लागत भी कम हो सकती है.

मशीनरी और टेक्नोलॉजी से मजबूत होगा उद्योग

डील के तहत मशीनरी, केमिकल्स और हाई-टेक इंडस्ट्रियल प्रोडक्ट्स पर भी टैरिफ में बड़ी राहत दी गई है. इससे भारतीय फैक्ट्रियों को सस्ता और आधुनिक उपकरण मिलेगा. इसका सीधा फायदा मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर को होगा, जिससे उत्पादन बढ़ेगा और लागत घटेगी. लंबी अवधि में इसका असर नौकरियों और सैलरी पर भी दिख सकता है.

रोजगार और इनकम में फायदा

EU की सर्विस कंपनियों को भारत में ज्यादा बाजार पहुंच मिलने से फाइनेंशियल, मैरीटाइम और डिजिटल सर्विसेज में नए अवसर पैदा होंगे. इससे सिर्फ बड़ी कंपनियां नहीं, बल्कि छोटे और मझोले उद्योग (SME) भी लाभ उठा सकेंगे. नई डील में SMEs के लिए अलग चैप्टर रखा गया है, जिससे छोटे कारोबारियों को अंतरराष्ट्रीय बाजार से जुड़ने में आसानी होगी.

डिजिटल सुरक्षा पर भी फोकस

इस समझौते के तहत EU अगले दो साल में भारत को करीब €500 मिलियन (लगभग ₹4,500 करोड़) का सहयोग देगा, ताकि ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन कम किया जा सके. इसके अलावा डिजिटल ट्रेड के लिए अलग नियम बनाए गए हैं, जिससे ऑनलाइन कारोबार सुरक्षित और भरोसेमंद बने. कॉपीराइट, ट्रेडमार्क और डिजाइन की कानूनी सुरक्षा भी मजबूत की जाएगी.

महंगाई में राहत

कुल मिलाकर India–EU ट्रेड डील का मतलब है कि कम कीमतें, ज्यादा विकल्प और बेहतर क्वालिटी. चाहे वह खाने-पीने की चीजें हों, कारें, दवाइयां या टेक्नोलॉजी आम आदमी को धीरे-धीरे इसका फायदा महसूस होगा. यह डील सिर्फ आज की खरीदारी नहीं, बल्कि आने वाले वर्षों में भारत की अर्थव्यवस्था और उपभोक्ताओं की जेब को मजबूत करने वाली साबित हो सकती है.

India News
अगला लेख