‘मदर ऑफ ऑल डील’ पर मुहर! India–EU FTA के बाद क्या होगा सस्ता, किन उद्योगों को मिलेगा बड़ा बाजार?
भारत–यूरोपीय यूनियन FTA पर मुहर के करीब. BMW-Mercedes होंगी सस्ती, निर्यात बढ़ेगा और भारत को मिलेगा ग्लोबल बाजार. जानिए पूरी डिटेल.
भारत और यूरोपीय यूनियन (EU) के बीच मुक्त व्यापार समझौता यानी FTA आज इतिहास रच सकता है. साल 2007 में शुरू हुई बातचीत करीब 18 साल बाद अपने अंतिम पड़ाव पर पहुंच चुकी है. इसे यूं ही “मदर ऑफ ऑल डील” नहीं कहा जा रहा, क्योंकि यह समझौता दुनिया की दो बड़ी अर्थव्यवस्थाओं को सीधे जोड़ देगा. वाणिज्य सचिव राजेश अग्रवाल के मुताबिक, इस डील पर सहमति बन चुकी है और औपचारिक ऐलान किसी भी वक्त हो सकता है.
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस डील को भारत और यूरोप के आम नागरिकों के लिए नई संभावनाओं का दरवाजा बताया है. उनके अनुसार, यह समझौता भारत के मैन्युफैक्चरिंग और सर्विस सेक्टर को वैश्विक ताकत देगा. ‘मेक इन इंडिया’ को इससे अंतरराष्ट्रीय पहचान मिलेगी और विदेशी कंपनियों का भरोसा भारत पर और मजबूत होगा.
क्या-क्या होगा सस्ता?
FTA का सबसे बड़ा असर आम उपभोक्ता पर पड़ेगा, क्योंकि कई यूरोपीय उत्पाद भारत में सस्ते हो सकते हैं.
- BMW, Mercedes, Porsche जैसी लग्जरी कारें
- यूरोप से आने वाली शराब और वाइन
- विमान और विमान के पुर्जे
- इलेक्ट्रॉनिक उपकरण और मशीनरी
- केमिकल्स और आधुनिक मेडिकल उपकरण
- मेटल स्क्रैप, जिससे मैन्युफैक्चरिंग सस्ती होगी
भारत में क्या बदलेगा?
अभी भारत में पूरी तरह आयातित कारों पर 70–110% तक टैक्स लगता है. FTA के तहत यह टैक्स घटाकर 40%, और आगे चलकर 10% तक लाने का प्रस्ताव है. इससे भारत का लग्जरी कार मार्केट तेजी से बढ़ सकता है.
- लग्जरी कारों की ऑन-रोड कीमत
- आयातित मेडिकल टेक्नोलॉजी
- हाई-एंड इलेक्ट्रॉनिक्स
- एविएशन और इंडस्ट्रियल इक्विपमेंट
नोट: पहले 5 साल तक EV कारों को टैक्स कट का फायदा नहीं मिलेगा, ताकि टाटा और महिंद्रा जैसी भारतीय कंपनियों का निवेश सुरक्षित रहे.
इन उद्योगों को मिलेगा बड़ा बाजार
यह डील सिर्फ आयात तक सीमित नहीं है, बल्कि भारत के निर्यात के लिए भी बड़ा मौका है. अनुमान है कि 2031 तक भारत–EU ट्रेड 51 अरब डॉलर से ज्यादा पहुंच सकता है.
- टेक्सटाइल और गारमेंट्स
- फुटवियर और लेदर इंडस्ट्री
- इलेक्ट्रॉनिक्स और स्मार्टफोन
- ऑटो पार्ट्स और टायर
- फार्मास्यूटिकल्स और मेडिकल प्रोडक्ट्स
- केमिकल्स और मशीनरी
यूरोप के लिए क्यों जरूरी है यह डील?
यूरोपीय यूनियन चीन पर निर्भरता कम करना चाहता है और भारत इसके लिए सबसे भरोसेमंद विकल्प बनकर उभरा है. जहां 2019 में EU को भारत के साथ ट्रेड सरप्लस था, वहीं 2025 तक यह 15 अरब डॉलर के घाटे में बदल चुका है. FTA से यूरोप को स्थिर सप्लाई चेन और भारत को बड़ा निर्यात बाजार मिलेगा.
सिर्फ सस्ती कार नहीं, बड़ी तस्वीर
India–EU FTA को केवल BMW या Mercedes के सस्ता होने से जोड़कर देखना गलती होगी. यह डील भारत को ग्लोबल मैन्युफैक्चरिंग हब, निवेश डेस्टिनेशन और निर्यात महाशक्ति बनाने की दिशा में बड़ा कदम है. आने वाले वर्षों में इसके असर नौकरियों, उद्योगों और भारत की वैश्विक आर्थिक भूमिका में साफ दिखाई देंगे.





