'प्रोबेशन पीरियड में पूरा वेतन पाना कर्मचारी का हक', HC के फैसले से 70000 वेतन भोगियों को मिलेगा लाभ, सरकार को करना होगा ये काम
Jabalpur High Court Verdict : मध्य प्रदेश की जबलपुर हाई कोर्ट ने एक याचिका पर बड़ा फैसला देते हुए कहा कि प्रोबेशन पीरियड में भी कर्मचारियों को पूरा वेतन पाने का अधिकार है. हाई कोर्ट इस फैसले से 70 हजार वेतन भोगियों को लाभ मिलेगा. जानें, पिछले चार सालों में मध्य प्रदेश में कितने युवाओं को नौकरी मिली. ऐसे युवाओं को काटी गई सैलरी आने वाले महीनों में बतौर एरियर मिलेगा.;
Jabalpur High Court judgement Verdict : मध्य प्रदेश जबलपुर हाईकोर्ट ने कर्मचारियों के हित में एक अहम फैसला सुनाया है. हाईकोर्ट ने कहा है कि नए वेतन भोगियों को भी प्रोबेशन पीरियड में भी पूरा वेतन मिलने का अधिकार है. इसके साथ ही सरकारी आदेशों में किए गए वेतन में कटौती को रद्द कर दिया गया है. अदालत ने अपने आदेश में ये भी कहा है कि जिन कर्मचारियों का वेतन कम किया गया था, उन्हें उसका पैसा सरकार एरियर के रूप में वापस करे.
जबलपुर हाई कोर्ट का यह फैसला न केवल कर्मचारियों के हक की पुष्टि करता है बल्कि भविष्य में सरकारी और प्राइवेट दोनों क्षेत्रों में वेतन संबंधी नीतियों पर असर डाल सकता है. एमपी हाईकोर्ट ने सरकार से साफ कर दिया है कि प्रोबेशन पीरियड के दौरान भी कर्मचारी को पूरा वेतन मिलना चाहिए. सरकारी आदेशों के तहत की गई कटौती अब रद्द कर दी गई है. अदालत ने कहा कि नए वेतन भोगियों का हक सुनिश्चित करना सरकार की जिम्मेदारी है. किसी भी प्रकार की कटौती गैर कानूनी माना जाएगा.
समान काम, समान वेतन नीति के खिलाफ
कोर्ट ने सामान्य प्रशासन विभाग के फैसले पर टिप्पणी करते हुए कहा, ' जब सरकार कर्मचारियों से पूरा काम ले रही है, तो उनके वेतन में कटौती का कोई मतलब नहीं होता. अदालत ने इसे 'समान काम के लिए समान वेतन' के सिद्धांत के खिलाफ बताया है.
काटी गई राशि वापस करे सरकार
हाईकोर्ट ने अपने आदेश में ये भी कहा है कि सरकार कर्मचारियों के वेतन में से काटी गई राशि वापस करने की प्रक्रिया शुरू करे. जिन कर्मचारियों का वेतन कम किया गया था, वे मानव संसाधन विभाग या वित्त विभाग से संपर्क कर राशि का भुगतान प्राप्त कर सकते हैं.
वेतन में कटौती गैर कानूनी
सुनवाई के बाद हाई कोर्ट ने साफ किया कि प्रोबेशन पर कार्यरत कर्मचारी भी नियमित कर्मचारियों की तरह जिम्मेदारियां निभाते हैं, इसलिए उन्हें न्यूनतम पूर्ण वेतन से वंचित नहीं किया जा सकता. कोर्ट ने वेतन से की गई सभी प्रकार की रिकवरी को भी अवैध ठहराते हुए शासन को निर्देश दिए कि काटी गई पूरी राशि कर्मचारियों को लौटाई जाए.
नए कर्मचारियों में खुशी का माहौल
एमपी सामान्य प्रशासन विभाग के फैसले से पीड़ित कर्मचारियों में अदालत के इस फैसले से खुशी का माहौल है. नए वेतन भोगी प्रोबेशन पीरियड में किसी भी प्रकार की वेतन कटौती के डर से मुक्त हो गए हैं. यह कदम सरकारी कर्मचारियों के हक और न्याय की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है.
इन्हें मिलेगा एरियर
मध्य प्रदेश सरकार में पिछले चार सालों में चार सालों में लगभग 70 से एक 1,00,000 कर्मचारियों की नियुक्ति हुई है. इनमें साल 2022 से 2023 में लगभग 50 हजार नए कर्मचारी नियुक्त हुए थे. साल 2023-2025 MPPSC से 3,756 कर्मचारियों की नियुक्ति हुई. इसके अलावा, ESB की अन्य भर्तियां (समूह स्तर पर हजारों पद पर हुए हैं. कुल मिलाकर पिछले 4 सालों में सरकारी नियुक्तियां 1 लाख से कम (लगभग 70,000-1 लाख के बीच) होने का अनुमान है.
वेतन का मसला उस समय विवाद का विषय बन गया, जब छिंदवाड़ा निवासी आदित्य मिश्रा सहित प्रदेश के विभिन्न जिलों के कर्मचारियों ने अदालत में याचिकाएं दायर की थी. याचिकाओं में शासन के उस परिपत्र को चुनौती दी गई थी, जिसमें नई भर्तियों के लिए पहले वर्ष 70 प्रतिशत, दूसरे वर्ष 80 प्रतिशत और तीसरे वर्ष 90 प्रतिशत वेतन देने का प्रावधान था. जबकि चौथे वर्ष नियमित होने पर ही पूर्ण वेतन दिए जाने की बात कही गई थी.