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घंटा शब्द पड़ा महंगा, सरकारी आदेश में लिखा तो चली गई एसडीएम की कुर्सी; जानें कौन हैं आनंद मालवीय

मध्य प्रदेश के प्रशासनिक गलियारों में इन दिनों देवास के एसडीएम आनंद मालवीय का नाम सबसे ज्यादा चर्चा में है. एक ऐसा अधिकारी, जिसने साधारण जगह से निकलकर कड़ी मेहनत के दम पर प्रशासनिक सेवा में पहचान बनाई, आज अपने ही एक सरकारी आदेश में घंटा शब्द को लेकर बुरी तरह से फंस गए हैं.

घंटा शब्द पड़ा महंगा, सरकारी आदेश में लिखा तो चली गई एसडीएम की कुर्सी; जानें कौन हैं आनंद मालवीय
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( Image Source:  x-@KashifKakvi )
हेमा पंत
Edited By: हेमा पंत

Updated on: 5 Jan 2026 12:12 PM IST

मध्य प्रदेश के प्रशासनिक हलकों में इन दिनों देवास के एसडीएम आनंद मालवीय का नाम सुर्खियों में है. एक सरकारी आदेश में इस्तेमाल हुआ एक शब्द ‘घंटा’ ऐसा भारी पड़ा कि एक प्रमोटेड अधिकारी की कुर्सी चली गई.

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सोशल मीडिया पर आदेश वायरल होते ही सियासी बवाल मच गया और मामला मंत्री स्तर तक पहुंच गया. इसके बाद संभाग आयुक्त ने तत्काल प्रभाव से एसडीएम आनंद मालवीय को सस्पेंड कर दिया. आखिर ऐसे में चलिए जानते हैं कौन हैं आनंद मालवीय, जिनका मेहनत से बनाया गया प्रशासनिक सफर एक विवादित शब्द की वजह से सवालों के घेरे में आ गया?

कौन हैं आनंद मालवीय?

आनंद मालवीय का जन्म इंदौर में हुआ. यहीं उनकी शुरुआती पढ़ाई और कॉलेज की शिक्षा पूरी हुई. पिता प्राइवेट सेक्टर में नौकरी करते थे, घर की आर्थिक स्थिति बहुत मजबूत नहीं थी. लेकिन आनंद ने हालात को कभी अपनी कमजोरी नहीं बनने दिया. उन्होंने तय कर लिया था कि मेहनत और ईमानदारी के दम पर सरकारी सेवा में जगह बनानी है.

तहसीलदार से एसडीएम तक का सफर

लंबी तैयारी और संघर्ष के बाद आनंद मालवीय नायब तहसीलदार बने. साल 2007 में उनकी पहली पोस्टिंग खरगोन जिले में हुई. ग्रामीण इलाकों में काम करते हुए उन्होंने प्रशासन की जमीनी हकीकत को नजदीक से देखा. करीब सात साल बाद 2014 में वे तहसीलदार बने. जिम्मेदारियां बढ़ीं, अनुभव गहराया और 2023 में उन्हें देवास जिले का एसडीएम बनाया गया. यह उनके करियर का अहम मुकाम था.

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कैलाश विजयवर्गीय ने जताई आपत्ति

हाल ही में जारी एक प्रशासनिक आदेश ने सारा समीकरण बदल दिया. आदेश में प्रयुक्त ‘घंटा’ शब्द सोशल मीडिया पर वायरल हो गया. इस शब्द को लेकर प्रदेश की राजनीति गरमा गई. मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने इसे अमानवीय, असंवेदनशील और निरंकुश मानसिकता को दिखाने वाला बताया. उनका कहना था कि प्रशासनिक भाषा मर्यादित और सम्मानजनक होनी चाहिए.

कहां से शुरू हुआ घंटा विवाद?

दरसअल इंदौर में गंदे पानी को लेकर कई लोगों की मौत हो गई थी. इस पर मंत्री कैलाश विजयवर्गीय से जब पत्रकार ने सवाल पूछा, तो उन्होंने कहा कि तुम फालतू के सवाल मत पूछो. घंटा हो गया है तुमको. इसके बाद इस शब्द को लेकर उनकी जमकर आलोचना की गई थी. इसके बाद जब एसडीएम ने इस शब्द का इस्तेमाल किया, तो उनकी कुर्सी छिन गई.

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