Indore Tragedy: गंभीर नहीं घनघोर लापरवाही, लैब रिपोर्ट से आया डरावना सच- पानी में मिले मल-मूत्र की वजह से गई 9 की जान

देश के सबसे स्वच्छ शहर इंदौर में पेयजल आपूर्ति की भयावह लापरवाही सामने आई है. भागीरथपुरा इलाके में नर्मदा जल सप्लाई के पानी में मानव मल-मूत्र के अंश मिलने से अबतक 14 लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि कई मरीज ICU में भर्ती हैं. हालांकि आधिकारिक आंकड़े में मरने वालों की संख्या 9 बताई गयी है. लैब जांच में ई-कोलाई और शिगेला जैसे घातक बैक्टीरिया पाए गए हैं. मामले में राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने स्वतः संज्ञान लेते हुए राज्य सरकार से रिपोर्ट मांगी है. हाई कोर्ट में भी मामले की सुनवाई होनी है.;

( Image Source:  sora ai )
Edited By :  नवनीत कुमार
Updated On : 2 Jan 2026 11:51 AM IST

देश के सबसे स्वच्छ शहर कहे जाने वाले इंदौर में सामने आई यह घटना न सिर्फ प्रशासन, बल्कि पूरे सिस्टम पर गंभीर सवाल खड़े करती है. भागीरथपुरा इलाके में नर्मदा जल सप्लाई के नाम पर लोगों को ऐसा दूषित पानी पिलाया गया, जिसमें मानव मल-मूत्र के अंश पाए गए. इस लापरवाही ने अब तक 14 लोगों की जान ले ली है. हालांकि आधिकारिक आंकड़े में मरने वालों की संख्या 9 बताई गयी है.

गुरुवार को एमजीएम मेडिकल कॉलेज और नगर निगम की लैब में की गई जांच में पानी की गुणवत्ता का चौंकाने वाला सच सामने आया. सैंपल में ई-कोलाई और शिगेला जैसे घातक बैक्टीरिया पाए गए, जो सीधे तौर पर मानव मल में मौजूद होते हैं. इस रिपोर्ट ने यह साफ कर दिया कि यह हादसा नहीं, बल्कि गंभीर लापरवाही का नतीजा है.

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प्रशासन ने मानी चूक

कलेक्टर शिवम वर्मा ने खुद इस बात की पुष्टि की कि जल आपूर्ति में भारी गड़बड़ी हुई है. गुरुवार को एक और मरीज की मौत के बाद मृतकों की संख्या 14 पहुंच गई. प्रशासन के लिए यह मामला अब सिर्फ स्वास्थ्य संकट नहीं, बल्कि भरोसे का संकट भी बन चुका है.

सैकड़ों बीमार, हजारों प्रभावित

सोमवार को हालात उस वक्त बिगड़ने लगे जब भागीरथपुरा में 100 से ज्यादा लोग अचानक उल्टी-दस्त से बीमार पड़ गए. मंगलवार को ही आठ मौतें हो गई थीं. अब तक करीब 2800 मरीज सामने आ चुके हैं, जिनमें से 201 का इलाज अलग-अलग अस्पतालों में चल रहा है.

ICU में जिंदगी की जंग

इस संकट की गंभीरता का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि 32 मरीज फिलहाल ICU में भर्ती हैं और उनकी हालत नाजुक बनी हुई है. गुरुवार को भी इलाके में नए मरीज सामने आए, हालांकि ज्यादातर को प्राथमिक उपचार के बाद घर भेज दिया गया. फिर भी डर और असुरक्षा का माहौल बना हुआ है.

मुआवजे पर भड़का गुस्सा

कैबिनेट मंत्री कैलाश विजयवर्गीय जब पीड़ित परिवारों को सहायता राशि के चेक देने पहुंचे, तो उन्हें स्थानीय लोगों के आक्रोश का सामना करना पड़ा. लोगों का आरोप था कि प्रशासन मौतों की असली संख्या छिपा रहा है. मंत्री ने भी स्वीकार किया कि वास्तविक आंकड़ा ज्यादा हो सकता है और जांच के बाद उचित सहायता दी जाएगी.

मानवाधिकार आयोग की सख्ती

मामले की गंभीरता को देखते हुए राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) ने स्वतः संज्ञान लिया है. आयोग ने मध्य प्रदेश के मुख्य सचिव से दो सप्ताह के भीतर विस्तृत रिपोर्ट मांगी है. आयोग ने यह भी कहा कि दूषित पानी की शिकायतें पहले से मिल रही थीं, लेकिन समय पर कार्रवाई नहीं हुई.

अदालत की नजर, जवाबदेही की परीक्षा

भागीरथपुरा पेयजल कांड को लेकर हाई कोर्ट में दाखिल दो जनहित याचिकाओं पर शुक्रवार को सुनवाई होनी है. सरकार को स्टेटस रिपोर्ट पेश कर यह बताना होगा कि कितने मरीज प्रभावित हुए, मुफ्त इलाज की क्या व्यवस्था है और भविष्य में ऐसी घटना दोबारा न हो, इसके लिए क्या कदम उठाए गए हैं. अब यह मामला सिर्फ बीमारी का नहीं, बल्कि जवाबदेही तय करने की लड़ाई बन गया है.

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