हाईकोर्ट ने बेजान वैवाहिक संबंध के आधार पर तलाक रखा बरकरार, बेटी के लिए 35 हजार रुपये मासिक भत्ता तय
झारखंड उच्च न्यायालय ने पारिवारिक न्यायालय के उस फैसले को बरकरार रखा है जिसमें एक पति को तलाक दिया गया था. अदालत ने माना कि लंबे समय तक अलग रहने और दूसरी शादी के कारण वैवाहिक संबंध बेजान हो गया है. इसके साथ ही अदालत ने पति को अपनी 15 वर्षीय बेटी के भविष्य के लिए 35,000 रुपये प्रति माह गुजारा भत्ता देने का आदेश दिया.;
झारखंड हाई कोर्ट ने पारिवारिक न्यायालय के उस फैसले को बरकरार रखा है जिसमें एक पति को तलाक दिया गया था. अदालत ने माना कि लंबे समय तक अलग रहने और दूसरी शादी के कारण वैवाहिक संबंध बेजान हो गया है. इसके साथ ही अदालत ने पति को अपनी 15 वर्षीय बेटी के भविष्य के लिए 35,000 रुपये प्रति माह गुजारा भत्ता देने का आदेश दिया.
न्यायमूर्ति सुजीत नारायण प्रसाद और अरुण कुमार राय की पीठ ने अप्रैल 2023 में पारिवारिक न्यायालय द्वारा दिए गए फैसले के खिलाफ पत्नी की अपील को खारिज कर दिया. अदालत ने स्पष्ट किया कि अब पति-पत्नी के बीच वैवाहिक संबंध भावनात्मक और व्यावहारिक रूप से निर्जीव हो चुके हैं.
बेजान वैवाहिक संबंध
अदालत ने कहा "अब दोनों पक्षों के बीच वैवाहिक संबंध 'बेजान' हो गया है और यह संबंध भावनात्मक या व्यावहारिक मूल्य से रहित और निर्जीव हो गया है." पत्नी के वकील ने बताया कि बदली परिस्थितियों में सुलह की कोई संभावना नहीं है, विशेषकर क्योंकि पति कथित तौर पर अवैध संबंध में था. पति की ओर से पेश वकीलों ने बताया कि उनके कई आश्रित हैं, जिनमें लकवाग्रस्त पिता, अलग रह रही बहन, दूसरी पत्नी और बेटा शामिल हैं.
बेटी के भरण-पोषण पर अदालत का विशेष ध्यान
अदालत ने यह भी कहा कि बच्चों, विशेष रूप से कन्या शिशु के कल्याण को ध्यान में रखना आवश्यक है. बेटी की पढ़ाई, पालन-पोषण और भविष्य सुरक्षित करना पिता की जिम्मेदारी है. अदालत ने पति को निर्देश दिया कि गुजारा भत्ता 35,000 रुपये प्रति माह जमा करे, जिसमें 25,000 रुपये पत्नी के लिए और 10,000 रुपये बेटी के लिए होंगे. बेटी के बालिग होने पर यह राशि सीधे उसके खाते में जमा की जाएगी और हर दो साल बाद इसमें 5% वृद्धि होगी. अनुपालन न होने की स्थिति में पत्नी कानूनी कार्रवाई करने के लिए स्वतंत्र होगी.
सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए फैसला
अदालत ने स्पष्ट किया कि जब कोई वैवाहिक संबंध निरर्थक हो जाता है, तो इसे तलाक का वैध आधार माना जा सकता है. साथ रहने की कोई संभावना नहीं होने और पति के पुनर्विवाह को देखते हुए यह निर्णय लिया गया.