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सांस रुकने से पहले जो हुआ, वो डरावना है; ऑटोप्‍सी ने नोएडा इंजीनियर की मौत का खौफनाक सच खोल दिया

नोएडा के सेक्टर-150 में हुए दर्दनाक हादसे में 27 वर्षीय सॉफ्टवेयर इंजीनियर युवराज मेहता की मौत पर पोस्टमार्टम रिपोर्ट ने चौंकाने वाले खुलासे किए हैं. रिपोर्ट के मुताबिक युवराज की नाक मिट्टी और पानी से भरी थी, जबकि फेफड़ों और सीने में भी पानी पाया गया. डॉक्टरों ने मौत का कारण एस्फिक्सिया (asphyxia) यानी डूबने के बाद दम घुटना और उसके बाद कार्डियक अरेस्ट बताया. घने कोहरे में घर लौटते वक्त उनकी कार पानी से भरे गहरे गड्ढे में जा गिरी थी. परिवार का आरोप है कि युवराज करीब दो घंटे तक मदद के लिए चिल्लाते रहे, लेकिन समय पर रेस्क्यू नहीं हुआ.

सांस रुकने से पहले जो हुआ, वो डरावना है; ऑटोप्‍सी ने नोएडा इंजीनियर की मौत का खौफनाक सच खोल दिया
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( Image Source:  X/theskindoctor13 )
नवनीत कुमार
Edited By: नवनीत कुमार

Published on: 20 Jan 2026 8:54 AM

नोएडा के सेक्टर-150 में हुए दर्दनाक हादसे के बाद जब 27 वर्षीय सॉफ्टवेयर प्रोफेशनल युवराज मेहता की पोस्टमार्टम रिपोर्ट सामने आई, तो उसने उस रात की भयावह सच्चाई बयान कर दी. रिपोर्ट के मुताबिक युवराज की नाक मिट्टी और पानी से भरी हुई थी, जबकि फेफड़ों और सीने में भी पानी पाया गया. डॉक्टरों ने मौत का कारण एस्फिक्सिया (asphyxia) यानी डूबने के बाद दम घुटना और उसके बाद कार्डियक अरेस्ट बताया. यह महज आंकड़े नहीं थे, बल्कि उस संघर्ष की गवाही थे जो युवराज ने आख़िरी सांस तक लड़ा.

शुक्रवार देर रात, घने कोहरे के बीच गुरुग्राम से घर लौटते वक्त युवराज की कार अंधेरी सड़क से फिसलकर एक टूटे हुए बाउंड्री वॉल के ऊपर से सीधे पानी से भरे गहरे गड्ढे में जा गिरी. घर से महज एक किलोमीटर पहले यह हादसा हुआ. इतना पास कि मंज़िल दिख रही थी, मगर पहुंचना मुमकिन नहीं हो पाया.

दो घंटे की जद्दोजहद

परिवार के मुताबिक, युवराज किसी तरह कार से बाहर निकले और आधी डूबी कार की छत पर चढ़कर मदद के लिए चीखते रहे. करीब दो घंटे तक वह अंधेरे और कोहरे के बीच खड़े होकर बचाव की गुहार लगाते रहे. आसपास मौजूद लोगों और मौके पर पहुंची पुलिस की मौजूदगी के बावजूद पानी में उतरकर तुरंत रेस्क्यू नहीं किया गया. हर गुजरते मिनट के साथ पानी बढ़ता गया और युवराज की ताकत घटती चली गई.

पुलिस का कहना है कि उन्हें आशंका थी कि यह निर्माणाधीन साइट की खुदाई है, जहां पानी के भीतर लोहे की सरिए और अन्य खतरनाक सामग्री हो सकती है. खराब विज़िबिलिटी और जोखिम की वजह से टीम पानी में उतरने से हिचकती रही. लेकिन परिवार का सवाल है. अगर वही समय पर कदम उठाया जाता, तो क्या नतीजा अलग नहीं होता?

एक परिवार का सहारा, जो लौटकर नहीं आया

युवराज दो साल पहले अपनी मां को खो चुके थे और नोएडा के सेक्टर-150 में अपने पिता के साथ रहते थे. वह परिवार के इकलौते कमाने वाले सदस्य थे. टाटा यूरेका पार्क सोसाइटी में रहने वाले इस युवा इंजीनियर की पूरी ज़िंदगी आगे पड़ी थी. पोस्टमार्टम रिपोर्ट में दर्ज निष्कर्ष इस बात की पुष्टि करते हैं कि युवराज आख़िरी पल तक होश में थे और जीवन के लिए संघर्ष कर रहे थे. हादसे वाली जगह एक विशाल पानी से भरा हुआ प्लॉट है, जो झाड़ियों और ऊंची घास से घिरा हुआ है. टूटे हुए कंक्रीट की दीवार, बाहर निकले जंग लगे सरिए और किसी भी तरह की चेतावनी या बैरिकेडिंग का अभाव यह सब उस लापरवाही की तस्वीर पेश करता है, जिसने एक ज़िंदगी निगल ली.

जिम्मेदारी किसकी?

ग्रेटर नोएडा पुलिस ने रियल एस्टेट कंपनियों एमजेड विज़टाउन प्लानर्स प्राइवेट लिमिटेड और लोटस ग्रीन्स कंस्ट्रक्शन प्राइवेट लिमिटेड के खिलाफ एफआईआर दर्ज की है. भारतीय न्याय संहिता 2023 की धाराओं के तहत गैर-इरादतन हत्या, लापरवाही से मौत और जीवन को खतरे में डालने जैसे गंभीर आरोप लगाए गए हैं. दोनों कंपनियां एक-दूसरे पर ज़िम्मेदारी डाल रही हैं, जबकि नोएडा अथॉरिटी ने परियोजनाओं की सुरक्षा दोबारा जांचने के आदेश दिए हैं.

यह मामला अब सिर्फ एक हादसे का नहीं रहा. पोस्टमार्टम रिपोर्ट, प्रत्यक्षदर्शियों के बयान और कानूनी कार्रवाई सब मिलकर यह सवाल खड़ा करते हैं कि क्या यह मौत रोकी जा सकती थी. युवराज की कहानी सिस्टम की उस खामी को उजागर करती है, जहां चेतावनी देर से आती है और कीमत किसी की ज़िंदगी से चुकानी पड़ती है.

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