ठंडे पानी के चलते लोग देखते रहे मौत का तमाशा! नोएडा इंजीनियर मौत मामले में पोस्टमार्टम रिपोर्ट आई सामने, दम घुटने से गई युवराज की जान
ग्रेटर नोएडा में 27 साल के इंजीनियर युवराज मेहता की कार एक पानी के गड्ढे में गिरने से उनकी मौत हो गई थी. ये मामला अब बढ़ता जा रहा है. परिजनों से लेकर लोगों तक का गुस्सा प्रशासन पर निकल रहा है. युवराज मेहता की मौत को लोग अब प्रशासन की लापरवाही मान रहे हैं. युवराज की पोस्टमार्टम रिपोर्ट सामने आ चुकी है. जिसमें मौत के कारण का खुलासा हुआ है.
ग्रेटर नोएडा में 27 साल के इंजीनियर युवराज मेहता की कार एक पानी के गड्ढे में गिरने से उनकी मौत हो गई थी. ये मामला अब बढ़ता जा रहा है. परिजनों से लेकर लोगों तक का गुस्सा प्रशासन पर निकल रहा है. युवराज मेहता की मौत को लोग अब प्रशासन की लापरवाही मान रहे हैं. इस हादसे ने इसलिए भी सनसनी मचा दी है क्योंकि दुर्घटना के बाद मौके पर पहुंचे एक डिलीवरी एजेंट ने खुद जान जोखिम में डालकर बचाव की कोशिश की, जबकि पेशेवर बचावकर्मियों पर शुरुआती दौर में हिचकिचाने के आरोप लगे हैं.
परिजनों ने ये भी आरोप लगाया है कि अगर समय पर युवराज को मदद मिल जाती तो उसकी जान बच सकती थी. वहीं अब युवराज की पोस्टमार्टम रिपोर्ट सामने आ चुकी है. जिसमें मौत के कारण का खुलासा हुआ है.
पोस्टमार्टम रिपोर्ट से हुआ खुलासा
युवराज मेहता की पोस्टमार्टम रिपोर्ट सामने आने के बाद साफ हो गया है कि उनकी मौत दम घुटने से हुई. रिपोर्ट में शरीर पर मिले अन्य निशान और परिस्थितियां इस ओर इशारा करती हैं कि युवराज मौत से पहले करीब 80 मिनट तक जिंदगी के लिए संघर्ष करता रहा. इस खुलासे के बाद परिजनों का गुस्सा और प्रशासन पर दबाव दोनों बढ़ गए हैं. जांच एजेंसियों ने अब पूरे घटनाक्रम की नए सिरे से जांच शुरू कर दी है.
हादसे की रात क्या हुआ?
नॉलेज पार्क थाना पुलिस के अनुसार, शुक्रवार देर रात करीब 12:15 बजे सूचना मिली कि सेक्टर-150 में निर्माणाधीन इमारत के तहखाने के लिए खोदे गए गड्ढे में एक कार गिर गई है. बताया गया कि यह गड्ढा बारिश के पानी से पूरी तरह भरा हुआ था और आसपास पर्याप्त बैरिकेडिंग या चेतावनी संकेत नहीं थे.
ठंडे पानी और लोहे की छड़ों से डरे रेस्क्यूकर्मी
घटनास्थल पर सबसे पहले पहुंचने वालों में शामिल डिलीवरी एजेंट मोनिंदर ने बताया कि वह शनिवार तड़के करीब 1:45 बजे मौके पर पहुंचे. उनके मुताबिक, ठंडा पानी, घना कोहरा और गड्ढे में निकली लोहे की छड़ों के कारण बचावकर्मी पानी में उतरने से हिचक रहे थे. डिलीवरी एजेंट मोनिंदर के मुताबिक, वह सेक्टर-150 में दुर्घटनास्थल पर शनिवार रात करीब 1:45 बजे पहुंचा था. उसने देखा कि रेस्क्यूकर्मी गड्ढे में उतरने से कतरा रहे थे. मोनिंदर का आरोप है कि ठंडा पानी, अंधेरा और निर्माण स्थल पर निकली लोहे की छड़ें रेस्क्यू ऑपरेशन में बाधा बन रही थीं. मोनिंदर ने कहा कि जब हालात बिगड़ते दिखे और समय तेजी से निकल रहा था, तो उसने बिना देर किए खुद गड्ढे में उतरने का फैसला किया, ताकि पीड़ित को किसी भी तरह मदद मिल सके.
कार की छत पर खड़े होकर मांग रहा था मदद
मोनिंदर के अनुसार, हादसे के बाद युवराज को शुरुआत में अपनी कार की छत पर खड़े होकर राहगीरों को संकेत देते हुए देखा गया था. वह अपने मोबाइल फोन की टॉर्च जलाकर मदद की गुहार लगा रहा था, लेकिन अंधेरा, कोहरा और पानी से भरा गड्ढा उसकी जान पर भारी पड़ गया.
पहले भी हो चुका है हादसा
डिलीवरी एजेंट ने यह भी बताया कि इसी गड्ढे में पहले भी एक हादसा हो चुका था. उस दौरान स्थानीय लोगों ने रस्सियों और सीढ़ी की मदद से एक ट्रक चालक की जान बचाई थी. इसके बावजूद गड्ढे को सुरक्षित नहीं किया गया, जिससे लापरवाही के आरोप और मजबूत हो गए हैं.
पुलिस ने लापरवाही के आरोप किए खारिज
हालांकि पुलिस ने लापरवाही के आरोपों से इनकार किया है. अतिरिक्त पुलिस आयुक्त (कानून एवं व्यवस्था) राजीव नारायण मिश्रा ने कहा कि युवक को बचाने के लिए हर संभव प्रयास किए गए. उन्होंने बताया "पुलिस और दमकल टीमों ने क्रेन, सीढ़ी, अस्थायी नाव और सर्चलाइट तैनात की थीं, लेकिन घने कोहरे के कारण दृश्यता लगभग शून्य थी."
पिता ने बताई बेटे से आखिरी बातचीत
युवराज के पिता राज कुमार मेहता ने इस हादसे को खुली लापरवाही का नतीजा बताया. उन्होंने कहा "मैंने दुर्घटना से कुछ ही समय पहले उससे बात की थी. उसने मुझे बताया कि वह घर जा रहा है. थोड़ी देर बाद, उसने घबराकर फिर फोन किया और बताया कि उसकी कार का एक्सीडेंट हो गया है और वह नाले में गिर गई है. उसने मुझसे तुरंत आने का अनुरोध किया. मौके पर पहुंचने के बाद उन्होंने कई बार बेटे को फोन किया, लेकिन कम दृश्यता और अंधेरे की वजह से कार का पता नहीं चल सका."





