क्‍या है चंडीगढ़ के IDFC First Bank का घोटाला, 590 करोड़ के हेर-फेर में दोषी कौन?

चंडीगढ़ स्थित IDFC First Bank की ब्रांच से जुड़े 590 करोड़ रुपये के कथित फ्रॉड ने निवेशकों को झटका दिया है. बैंक ने फॉरेंसिक जांच शुरू कर दी है और शेयर बाजार में भारी गिरावट आई.

( Image Source:  Sora AI )
Edited By :  प्रवीण सिंह
Updated On : 23 Feb 2026 2:52 PM IST

चंडीगढ़ स्थित IDFC First Bank की एक ब्रांच से जुड़े करीब 590 करोड़ रुपये के कथित फ्रॉड ने बैंकिंग सेक्टर और शेयर बाजार दोनों में हलचल मचा दी है. इस मामले के सामने आते ही बैंक के निवेशकों को बड़ा झटका लगा और एक ही दिन में बाजार पूंजीकरण से करीब 14,000 करोड़ रुपये साफ हो गए.

यह मामला तब उजागर हुआ जब हरियाणा सरकार से जुड़े खातों में दर्ज बैलेंस और वास्तविक रकम में बड़ा अंतर पाया गया. जांच के दौरान सामने आया कि चंडीगढ़ ब्रांच में कुछ खातों से बिना अनुमति के लेन-देन (Unauthorized Transactions) किए गए.

क्या है पूरा फ्रॉड?

IDFC First Bank ने अपनी शुरुआती जांच में बताया कि चंडीगढ़ ब्रांच के कुछ कर्मचारियों ने हरियाणा सरकार से जुड़े खातों में नियमों के खिलाफ ट्रांजैक्शन किए. इन गड़बड़ियों की कुल रकम लगभग 590 करोड़ रुपये आंकी गई है, जो बैंक के तीसरी तिमाही के शुद्ध मुनाफे (लगभग 503 करोड़ रुपये) से भी ज्यादा है.

बैंक ने साफ किया कि यह गड़बड़ी एक खास ब्रांच और कुछ चुनिंदा सरकारी खातों तक सीमित है. अब तक चार ब्रांच अधिकारियों को निलंबित किया जा चुका है. पुलिस में शिकायत दर्ज कराई गई है और नियामक संस्थाओं को सूचना दे दी गई है.

पैसे सेफ रखने के लिए क्‍या उठाए गए कदम?

मामले की गंभीरता को देखते हुए बैंक ने KPMG को स्वतंत्र फॉरेंसिक ऑडिट सौंपा है. इसके अलावा बैंक के बोर्ड की स्पेशल कमेटी, ऑडिट कमेटी और पूरी बोर्ड लगातार इस केस की निगरानी कर रही हैं. बैंक ने यह भी बताया कि जिन खातों में संदिग्ध रकम गई है, वहां लीन मार्क (lien mark) कराने के लिए दूसरी बैंकों को नोटिस भेजे गए हैं, ताकि पैसा निकाला न जा सके और रिकवरी की संभावना बनी रहे.

सिस्टम में खामी नहीं तो कैसे हुआ घपला?

बैंक के एमडी और सीईओ V. Vaidyanathan ने कहा कि यह मामला किसी सिस्टम फेल्योर का नहीं बल्कि आंतरिक मिलीभगत (internal collusion) का है. उनका कहना है कि बैंक में “मेकर-चेकर-ऑथराइज़र सिस्टम” पहले से मौजूद है और 10 साल के ऑपरेशन में ऐसा मामला पहली बार सामने आया है. उन्होंने दावा किया कि यह घटना सिर्फ एक ब्रांच और एक क्लाइंट ग्रुप तक सीमित है.

हरियाणा सरकार ने क्‍या लिया फैसला?

मामले के सामने आने के बाद हरियाणा सरकार ने बड़ा कदम उठाया है. राज्य सरकार ने IDFC First Bank को अपनी एम्पैनल्ड बैंकों की सूची से हटा दिया है और विभागों को निर्देश दिया कि वे अपने खाते बंद करें. इस फैसले से बैंक की साख पर सीधा असर पड़ा है.

शेयर बाजार में भूचाल

सोमवार को IDFC First Bank का शेयर 20% तक टूट गया और लोअर सर्किट पर पहुंच गया. एनालिस्ट्स का मानना है कि यह रकम बैंक के FY26 अनुमानित मुनाफे का करीब 20-22% हो सकती है. हालांकि बैंक की कुल नेटवर्थ पर असर करीब 1% तक सीमित रह सकता है. फिर भी निवेशकों में डर है कि जब तक जांच पूरी नहीं होती और रिकवरी का साफ आंकड़ा नहीं आता तब तक शेयर पर दबाव बना रह सकता है.

आगे क्या?

अब इस केस का भविष्य तीन बातों पर टिका है.

  • फॉरेंसिक ऑडिट में कितना पैसा वाकई गायब साबित होता है
  • दूसरी बैंकों से कितनी रकम रिकवर होती है
  • कानूनी प्रक्रिया कितनी तेजी से आगे बढ़ती है

बैंकिंग सेक्टर के जानकारों का कहना है कि यह मामला सिर्फ आर्थिक नुकसान तक सीमित नहीं है, बल्कि इससे ब्रांच-लेवल कंट्रोल और गवर्नेंस सिस्टम पर भी गंभीर सवाल खड़े हुए हैं.

590 करोड़ रुपये का यह कथित घोटाला IDFC First Bank के लिए सिर्फ एक वित्तीय संकट नहीं, बल्कि भरोसे की परीक्षा भी है. अब सबकी नजर इस पर टिकी है कि जांच में क्या सच सामने आता है और बैंक अपने निवेशकों और ग्राहकों का भरोसा दोबारा कैसे जीतता है.

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