कमल की मौत भी नहीं जगा सकी DJB और MCD को! दिल्ली में सरकारी सिस्टम की लापरवाही लोगों की जान पर भारी

रोहिणी में सीवर से जुड़े हादसे ने एक बार फिर दिल्ली के सिविक सिस्टम पर सवाल खड़े कर दिए हैं. जनकपुरी में कमल की मौत के बाद भी क्या जिम्मेदार एजेंसियां सबक लेने को तैयार नहीं?;

By :  धीरेंद्र कुमार मिश्रा
Updated On : 11 Feb 2026 11:27 AM IST

दक्षिण पश्चिम दिल्ली के जनकपुरी में खुदे गड्ढे में गिरकर युवक की जान गए अभी एक हफ्ता भी नहीं हुआ कि अब रोहिणी में युवक खुले नाले में गिरकर मौत के मुंह में समा गया. दिल्ली सरकार के कर्मचारियों के निकम्मेपन की वजह से दिल्ली में कई लोगों की मौत हो चुकी है, लेकिन मजाल है कि भाजपा सरकार को कोई फर्क नहीं पड़ रहा है. इसी का नतीजा यह हुआ कि एक सप्ताह के अंदर रोहिणी के सेक्टर 32 में महाशक्ति काली मंदिर के पास एक खुले नाले में गिरने से 32 साल के एक और शख्स की मौत हो गई.

ऐसा मामला केवल रोहिणी या जनकपुरी का नहीं है. दक्षिण पश्चिम दिल्ली और पश्चिम दिल्ली से तीन-तीन मंत्री हैं. सभी के इलाके में यही हाल है. खासतौर से इन इलाकों की ​प्राइवेट कॉलोनी में चले जाएं तो वहां के लोगों को नारकीय जीवन देख और आप भी सहम जाएंगे. मेन होल का टूटे पड़े होना या मेन होल का ढक्कन न होना, नाले कवर्ड न होना, ये तो दिल्ली की कॉलोनियों में आम बात है.

यही वजह है कि लोग यह सवाल उठा रहे हैं कि MCD और दिल्ली जल बोर्ड की कार्यशैली पर अब भी नहीं लगेगी लगाम? रोहिणी सीवर हादसे के बाद MCD और दिल्ली जल बोर्ड की कार्यशैली पर सवाल. जनकपुरी में कमल की मौत के हालात और सिस्टम की लापरवाही पर पूरी रिपोर्ट.

दरअसल, यह मामला गंभीर इसलिए भी है कि हाल ही में दिल्ली के रोहिणी से रात के समय कमल ऑफिस से घर के लिए निकले थे. रास्ते में जल बोर्ड ने गड्ढा खोद रखा था. कमल बाइक के साथ गड्ढे में गिरे, कमल की मौत हो गई. ये हादसा नहीं, बल्कि सिस्टम की लापरवाही की मौत है. इतना ही नहीं, नोएडा की घटना से भी बीजेपी ने कुछ नहीं सीखा. यहां पर भी बीजेपी की सरकार है और इस मामले में भी घोर लापरवाही और गैर-जिम्मेदार रवैया अब बीजेपी सरकारों की पहचान बन चुका है, जिसका खामियाजा आम जनता भुगत रही है.

रोहिणी सीवर हादसा: आखिर क्या हुआ?

दिल्ली के रोहिणी इलाके में सीवर से जुड़ा एक और हादसा और सामने आया है, जिसने नगर निगम (MCD) और दिल्ली जल बोर्ड की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए थे. स्थानीय लोगों का आरोप है कि खुले या असुरक्षित मैनहोल और समय पर मरम्मत न होने की वजह से यह हादसा हुआ.

जनकपुरी में कमल की मौत किन हालातों में हुई थी?

कुछ समय पहले जनकपुरी में कमल नामक व्यक्ति की सीवर/मैनहोल से जुड़े हादसे में मौत हो गई थी. आरोप था कि क्षेत्र में सीवर लाइन की मरम्मत और सुरक्षा मानकों में गंभीर लापरवाही बरती गई. स्थानीय निवासियों ने दावा किया था कि पहले भी शिकायतें की गईं, लेकिन समय पर कार्रवाई नहीं हुई. स्थानीय लोग कमल की मौत के बाद जिम्मेदार एजेंसियों पर सख्ती की मांग उठी थी.

रोहिणी हादसे से फिर वही सवाल खड़े हुए?

रोहिणी की घटना ने यह सवाल दोबारा जिंदा कर दिया है कि क्या पिछली घटनाओं से कोई सीख ली गई? लोगों का कहना है कि सीवर लाइन, मैनहोल कवर और चेतावनी संकेतों की नियमित जांच नहीं होती. कई जगह खुले ढक्कन या टूटी संरचना खतरा बनी रहती है.

दिल्ली जल बोर्ड और MCD की जिम्मेदारी क्या?

दिल्ली में सीवर और ड्रेनेज से जुड़े कार्यों में MCD और दिल्ली जल बोर्ड की अलग-अलग भूमिकाएं हैं.  MCD स्थानीय स्तर पर मेंटेनेंस, सफाई और ढक्कन की स्थिति. जब समन्वय की कमी होती है, तो जिम्मेदारी तय करने में देरी होती है और अक्सर आम नागरिक इसकी कीमत चुकाते हैं.

लेटलतीफी और शिकायत सिस्टम पर सवाल

स्थानीय लोगों का आरोप है कि शिकायत दर्ज होने के बाद भी मरम्मत में देरी होती है. ऑनलाइन पोर्टल और हेल्पलाइन होने के बावजूद फील्ड एक्शन में समय लगता है. स्थानीय निवासियों का कहना है कि सिविक बॉडी को रिस्क-मैपिंग और नियमित ऑडिट की व्यवस्था करनी चाहिए. ताकि हादसों को पहले ही रोका जा सके.

क्या दिल्ली वाले ऐसे ही भुगतते रहेंगे?

यह सवाल सिर्फ एक हादसे का नहीं, बल्कि सिस्टम की जवाबदेही का है. सीवर से जुड़े हादसे अक्सर बारिश के मौसम या मरम्मत कार्य के दौरान सामने आते हैं. कानून के तहत अगर लापरवाही साबित होती है, तो संबंधित अधिकारियों पर कार्रवाई संभव है, लेकिन पीड़ित परिवारों का दर्द सिर्फ मुआवजे से कम नहीं होता. रोहिणी हादसे के बाद स्थानीय स्तर पर जांच की मांग उठी है.

जिम्मेदारी तय होगी? या फिर फाइलों में दब जाएगा?

क्या इन मामलों में नियमित सेफ्टी ऑडिट होगा या मामला फिर फाइलों में दब जाएगा? दिल्ली की सड़कों पर खुले सीवर और मैनहोल सिर्फ इंफ्रास्ट्रक्चर की खामी नहीं, बल्कि पब्लिक सेफ्टी का बड़ा मुद्दा हैं.

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