'कट्टर ईमानदार' के आंसुओं से धुला कलंक! जिसने सत्ता छीन ली, वही लड़ाई अरविंद केजरीवाल की जीत की कहानी बनी

दिल्ली शराब नीति घोटाला केस में राहत मिलने के बाद अरविंद केजरीवाल की राजनीति को नई दिशा मिली है. यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि बड़ा राजनीतिक नैरेटिव बन गया.

By :  धीरेंद्र कुमार मिश्रा
Updated On : 27 Feb 2026 1:42 PM IST

‘कट्टर ईमानदार’ की छवि पर लगा दाग, जेल की सलाखों के पीछे बीते दिन, कैमरों के सामने छलकते आंसू और फिर वही केस, जिसने सत्ता छीन ली, अब सियासी और कानूनी लड़ाई में जीत की कहानी बन गया. अरविंद केजरीवाल के लिए यह सिर्फ एक केस नहीं था, बल्कि उनकी पूरी राजनीतिक पहचान की अग्निपरीक्षा बन गया था. जब उन्हें गिरफ्तार किया गया, तब उन्होंने बार-बार कहा था कि “सच हमारे साथ है”, लेकिन उस वक्त उनकी आवाज आरोपों और सियासी हमलों के शोर में दबती नजर आई. आज, जब उसी मामले में राहत मिली है, तो यह कहानी सिर्फ अदालत की नहीं, बल्कि एक ऐसे नेता की है जिसने खुद को ‘सिस्टम के खिलाफ लड़ने वाला आम आदमी’ बताया और अब उसी नैरेटिव को एक नई ताकत के साथ फिर से खड़ा करने की कोशिश कर रहा है.

यहां पर इस बात का जिक्र कर दें कि केजरीवाल मार्च 2024 में अपनी गिरफ्तारी को याद करते हुए कैमरे के सामने कोर्ट के बाहर रो पड़े थे. उन्होंने रिपोर्टर्स से कहा, "मैं हमेशा कहता था कि सच हमारे साथ है. एक मौजूदा मुख्यमंत्री को उनके घर से घसीटकर जेल में डाल दिया गया. हम पर कीचड़ उछाला गया." अरविंद केजरीवाल की गिरफ्तारी के बाद महीनों तक ड्रामा चला, जिसमें मेडिकल लापरवाही के आरोप और सत्ताधारी भारतीय जनता पार्टी का उन्हें इंसुलिन न देकर जेल में 'मारने' की कोशिश शामिल थी.

दिल्ली आबकारी घोटाला क्या है?

दिल्ली का चर्चित आबकारी (शराब) घोटाला 2021-22 की नई एक्साइज पॉलिसी से जुड़ा है, जिसे दिल्ली सरकार ने लागू किया था. इस नीति का उद्देश्य शराब कारोबार में पारदर्शिता लाना, अवैध बिक्री रोकना और राजस्व बढ़ाना बताया गया था. इसके तहत सरकार ने खुद रिटेल बिक्री से दूरी बना ली और निजी लाइसेंसधारकों को दुकानें चलाने की अनुमति दी. शुरुआत में राजस्व बढ़ने के दावे भी सामने आए, लेकिन जल्द ही इस नीति पर सवाल उठने लगे और इसे कथित अनियमितताओं से जोड़कर देखा जाने लगा.

भाजपा ने क्या आरोप लगाए थे?

भारतीय जनता पार्टी ने इस नीति को लेकर सबसे पहले हमला बोला और इसे बड़ा भ्रष्टाचार बताया. साथ ही केजरीवाल के सरकारी आवास को शीशमहल करार दिया था. भाजपा का आरोप था कि लाइसेंस देने में नियमों की अनदेखी की गई, कुछ चुनिंदा कारोबारियों को फायदा पहुंचाया गया और जानबूझकर सरकारी राजस्व को नुकसान पहुंचाया गया. पार्टी ने यह भी दावा किया कि कथित तौर पर शराब कारोबारियों से किकबैक लेकर नीति में बदलाव किए गए और यह पैसा चुनावी फंडिंग में इस्तेमाल हुआ. बीजेपी ने डीजेबी घोटाला, स्कूल बिल्डिंग निर्माण घोटाला, मोहल्ला क्लिनिक दवाई घोटाला सहित कई अन्य घोटालों को जोरदार तरीके से उछाला था.

CBI का आरोप?

दिल्ली का चर्चित आबकारी (शराब) घोटाला सियासी तौर पर तूल पकड़ने के बाद केंद्र सरकार ने ईडी और सीबीआई को जांच के आदेश दिए. जांच की जिम्मेदारी मिलने के बाद केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो ने कहा कि एक्साइज पॉलिसी के निर्माण और क्रियान्वयन में गंभीर अनियमितताएं और आपराधिक साजिश के संकेत मिले. एजेंसी के अनुसार कुछ कंपनियों को अनुचित लाभ पहुंचाया गया और फैसले तय प्रक्रिया से हटकर लिए गए. इसी आधार पर कार्रवाई करते हुए मनीष सिसोदिया को गिरफ्तार किया गया और बाद में अन्य लोगों को भी जांच के दायरे में लाया गया.

ED का आरोप क्या?

प्रवर्तन निदेशालय ने इस मामले में मनी लॉन्ड्रिंग का एंगल जोड़ा. ED का आरोप था कि करीब 100 करोड़ रुपये के किकबैक लिए गए, जिन्हें हवाला और शेल कंपनियों के जरिए ट्रांसफर किया गया. एजेंसी ने दावा किया कि इस पैसे का इस्तेमाल चुनावी गतिविधियों में किया गया और यह पूरी प्रक्रिया एक संगठित वित्तीय साजिश का हिस्सा थी.

केजरीवाल का पहले क्या स्टैंड था?

अरविंद केजरीवाल ने शुरू से ही इन आरोपों को सिरे से खारिज किया. उनका कहना था कि कोई घोटाला हुआ ही नहीं है और यह पूरा मामला राजनीतिक बदले की कार्रवाई है. उन्होंने बार-बार आरोप लगाया कि CBI और ED का इस्तेमाल विपक्षी नेताओं को दबाने के लिए किया जा रहा है. केजरीवाल और उनकी पार्टी ने इसे “ईमानदार बनाम साजिश” के रूप में पेश किया.

जेल जाने से कैसे बदला माहौल?

इस मामले में पहले मनीष सिसोदिया और बाद में अरविंद केजरीवाल जेल गए, तो यह मामला पूरी तरह राजनीतिक युद्ध में बदल गया. भाजपा ने इसे अपने आरोपों की पुष्टि बताया. अरविंद को कट्टर ईमानदार के बदले कट्टर भ्रष्ट बताया. जबकि AAP ने इसे सहानुभूति और राजनीतिक उत्पीड़न का मुद्दा बनाया. लंबे समय तक जेल में रहने, जमानत में देरी और स्वास्थ्य से जुड़े आरोपों ने इस केस को और अधिक संवेदनशील बना दिया, जिससे जनता के बीच ध्रुवीकरण देखने को मिला.

दिल्ली चुनाव 2025 में क्या असर पड़ा?

2025 के विधानसभा चुनाव में यह मुद्दा केंद्र में रहा. भाजपा ने इस केस को भ्रष्टाचार के प्रतीक के तौर पर पेश किया और बड़ी जीत हासिल की. AAP को सत्ता से बाहर होना पड़ा, जिसे उसकी छवि पर पड़े असर से जोड़कर देखा गया. विश्लेषकों के अनुसार, शराब नीति केस ने सीधे केजरीवाल की “ईमानदार नेता” वाली छवि को नुकसान पहुंचाया और चुनावी परिणामों को प्रभावित किया.

अब कोर्ट के फैसले से क्या बदला?

हालिया अदालत के फैसले में जब आरोपों से राहत मिली और बड़ी साजिश के ठोस प्रमाण नहीं पाए गए, तो इसने पूरे मामले का नैरेटिव बदल दिया. AAP इसे “सच की जीत” बता रही है, जबकि विपक्ष अब भी सवाल उठा रहा है. वहीं, सीबीआई ने हाईकोर्ट में अपील करने के संकेत दिए हैं. कुल मिलाकर, दिल्ली आबकारी घोटाला अब सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि राजनीतिक और नैरेटिव की लड़ाई का प्रतीक बन चुका है, जिसका असर आगे भी राजनीति में दिखेगा.

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