तुर्कमान गेट के बाद जामा मस्जिद पर नजर! दिल्ली हाईकोर्ट ने MCD को दिए सर्वे के आदेश, क्या चलेगा बुलडोजर?

तुर्कमान गेट के बाद अब जामा मस्जिद इलाके में अतिक्रमण हटाने की तैयारी को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं. Delhi High Court ने शाही जामा मस्जिद के आसपास कथित अवैध अतिक्रमण और अनधिकृत पार्किंग को गंभीरता से लेते हुए Municipal Corporation of Delhi को दो महीने के भीतर पूरे इलाके का सर्वे कराने का आदेश दिया है. याचिका में मस्जिद के गेट नंबर 3, 5 और 7 के बाहर अवैध पार्किंग और सार्वजनिक रास्तों पर फेरीवालों के कब्जे की शिकायत की गई थी. सर्वे में यदि अवैध निर्माण मिला तो कानून के तहत कार्रवाई के निर्देश दिए गए हैं.;

( Image Source:  sora ai )
Edited By :  नवनीत कुमार
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तुर्कमान गेट में अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई के बाद अब सवाल उठ रहा है कि क्या अगला नंबर शाही जामा मस्जिद इलाके का है. Delhi High Court ने जामा मस्जिद के आसपास कथित अवैध अतिक्रमण और अनधिकृत पार्किंग को लेकर सख्त रुख अपनाया है. हाईकोर्ट ने Municipal Corporation of Delhi को आदेश दिया है कि वह दो महीने के भीतर पूरे इलाके का विस्तृत सर्वे कराए.

कोर्ट ने साफ कहा है कि यदि सर्वे में किसी भी तरह का अवैध निर्माण, अतिक्रमण या गैरकानूनी पार्किंग सामने आती है, तो कानून के मुताबिक बिना देरी कार्रवाई की जाए. इस आदेश के बाद प्रशासनिक हलकों में हलचल तेज हो गई है और इलाके में संभावित एक्शन को लेकर चर्चाएं शुरू हो गई हैं.

हाईकोर्ट तक कैसे पहुंचा मामला?

यह मामला फरहत हसन और अन्य याचिकाकर्ताओं की याचिका पर सुनवाई के दौरान सामने आया. याचिका में आरोप लगाया गया कि Jama Masjid के गेट नंबर तीन, पांच और सात के बाहर लंबे समय से अवैध पार्किंग चलाई जा रही है, जिससे आम राहगीरों और श्रद्धालुओं को भारी परेशानी होती है. इसके अलावा मस्जिद के आसपास के सार्वजनिक रास्तों पर फेरीवालों और व्यावसायिक दुकानों के अवैध कब्जे की भी शिकायत की गई. याचिकाकर्ताओं का कहना है कि इन अतिक्रमणों की वजह से न सिर्फ यातायात बाधित होता है, बल्कि सुरक्षा और कानून-व्यवस्था से जुड़े खतरे भी पैदा होते हैं. इन्हीं दलीलों को गंभीर मानते हुए हाईकोर्ट ने एमसीडी को सर्वे और आगे की कार्रवाई के स्पष्ट निर्देश दिए हैं.

जांच की रफ्तार तेज, डिजिटल एंगल पर फोकस

दिल्ली के तुर्कमान गेट इलाके में हुई पत्थरबाजी की घटना के बाद Delhi Police ने जांच को तेज कर दिया है. अब यह मामला सिर्फ मौके पर हुई हिंसा तक सीमित नहीं रहा, बल्कि इसके पीछे के डिजिटल नेटवर्क और उकसावे की भूमिका भी जांच के दायरे में है. पुलिस का मानना है कि माहौल अचानक नहीं बिगड़ा, बल्कि इसके लिए पहले से जमीन तैयार की गई थी. इसी कड़ी में सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स की बारीकी से पड़ताल की जा रही है.

यूट्यूबर सलमान की भूमिका पर शिकंजा

जांच के केंद्र में सलमान नाम का एक यूट्यूबर है, जिसकी तलाश में पुलिस की कई टीमें जुटी हैं. आरोप है कि उसने सोशल मीडिया के जरिए इलाके में तनाव फैलाने की कोशिश की. पुलिस सूत्रों के मुताबिक, सलमान ने वीडियो और पोस्ट के माध्यम से लोगों को इकट्ठा होने की कॉल दी थी. यही कॉल धीरे-धीरे भीड़ में तब्दील हुई और हालात बेकाबू हो गए.

कौन है यूट्यूबर सलमान?

सलमान स्थानीय स्तर पर सक्रिय यूट्यूबर बताया जा रहा है, जिसके सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर अच्छी-खासी फॉलोइंग है. वह अक्सर इलाके से जुड़े मुद्दों, प्रशासनिक कार्रवाइयों और कथित अन्याय को लेकर वीडियो बनाता रहा है. पुलिस का मानना है कि उसकी पहचान एक “लोकल इन्फ्लुएंसर” के तौर पर है, जिसकी बात पर लोग जल्दी प्रतिक्रिया देते हैं. यही वजह है कि उसके कंटेंट को गंभीरता से जांचा जा रहा है कि कहीं उसने जानबूझकर भड़काऊ नैरेटिव तो नहीं बनाया.

व्हाट्सएप ग्रुप्स से जुटी भीड़

जांच में यह भी सामने आया है कि सिर्फ एक व्यक्ति नहीं, बल्कि इलाके के कुछ प्रभावशाली लोग भी सक्रिय थे. इन लोगों ने अपने-अपने व्हाट्सएप ग्रुप्स के जरिए स्थानीय लोगों को जमा होने के लिए उकसाया. पुलिस के अनुसार, इन ग्रुप्स में ऐसे संदेश डाले गए जिनसे डर और गुस्सा फैलाया गया. मकसद साफ था—प्रशासनिक कार्रवाई को रोकना और पुलिस के काम में बाधा डालना.

सांसद की मौजूदगी पर सवाल

मामले में सियासी एंगल भी उभरकर सामने आया है. पुलिस सूत्रों के मुताबिक, समाजवादी पार्टी के सांसद Mohibullah Nadvi घटना से पहले मौके पर मौजूद थे. बताया जा रहा है कि वरिष्ठ अधिकारियों के अनुरोध के बावजूद वे आसपास ही रुके रहे. अब दिल्ली पुलिस उन्हें जांच में शामिल करने के लिए समन भेजने की तैयारी कर रही है.

समन की तैयारी और जांच का दायरा

सूत्रों के अनुसार, पुलिस सांसद से यह जानना चाहती है कि उनकी मौजूदगी का उद्देश्य क्या था और क्या उन्हें भीड़ जुटने की पहले से जानकारी थी. इसके साथ ही यूट्यूबर सलमान और अन्य संदिग्धों के कॉल रिकॉर्ड, सोशल मीडिया गतिविधि और आपसी संपर्कों की भी जांच की जा रही है. पुलिस इस निष्कर्ष तक पहुंचना चाहती है कि क्या यह सब एक समन्वित प्रयास था. दिल्ली पुलिस अब तक पत्थरबाजी में शामिल 30 लोगों की पहचान कर चुकी है. यह पहचान सीसीटीवी फुटेज, बॉडी कैमरा रिकॉर्डिंग और वायरल वीडियो के आधार पर की गई है. पुलिस टीमें लगातार छापेमारी कर रही हैं और संदिग्धों की गिरफ्तारी की प्रक्रिया तेज कर दी गई है. अधिकारियों का कहना है कि किसी भी दोषी को बख्शा नहीं जाएगा.

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