30 हथियारबंद साथियों को साथ लेकर फिर से फन फैला रहे नक्सली, सरेंडर करने वालों का खुलास; जानें कौन है पापाराव

छत्तीसगढ़ में नक्सल विरोधी अभियान के बीच खूंखार नक्सली पापाराव पुलिस की रडार पर है. दंतेवाड़ा में 63 नक्सलियों के सरेंडर के बाद हुए खुलासों में बताया गया कि पापाराव 25–30 हथियारबंद साथियों के साथ अब भी जंगलों में सक्रिय है. सुकमा और बस्तर क्षेत्र में उसकी तलाश तेज कर दी गई है. जानिए कौन है पापाराव और क्यों उसे पश्चिम बस्तर डिवीजन की रीढ़ माना जाता है.;

( Image Source:  sora ai )
Edited By :  नवनीत कुमार
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छत्तीसगढ़ में नक्सल विरोधी अभियान ने संगठन की कमर तोड़ दी है, लेकिन खतरा पूरी तरह खत्म नहीं हुआ. बड़े कैडर के कई नक्सलियों के सरेंडर के बावजूद कुछ नाम अब भी जंगलों में सक्रिय बताए जा रहे हैं. इन्हीं में एक नाम बार-बार सामने आ रहा है- पापाराव. सुरक्षा एजेंसियों के मुताबिक, शेष बचे नेटवर्क में उसका रोल निर्णायक माना जाता है. यही वजह है कि वह पुलिस की प्राथमिक रडार पर है.

शुक्रवार को दंतेवाड़ा में 63 नक्सलियों ने आत्मसमर्पण किया, जिनमें कई बड़े कैडर शामिल थे. सरेंडर करने वालों में डीवीसीएम मोहन कड़ती का नाम खास रहा. मीडिया से बातचीत में उसने संगठन के भीतर की मौजूदा स्थिति पर अहम जानकारियां साझा कीं. उसके मुताबिक, जंगलों में अब भी संगठित छोटे-छोटे दल मौजूद हैं. इन्हीं बयानों में पापाराव का जिक्र प्रमुखता से आया.

25–30 हथियारबंद साथियों के साथ घूमता पापाराव

सरेंडर नक्सली के अनुसार, पापाराव फिलहाल 25–30 हथियारबंद साथियों के साथ जंगलों में सक्रिय है. वह आत्मसमर्पण के मूड में नहीं दिख रहा और लगातार ठिकाने बदल रहा है. बताया गया कि उसके साथ राहुल और दिलीप जैसे अन्य बड़े नक्सलियों के दल भी अलग-अलग इलाकों में मौजूद हैं. यह जानकारी सुरक्षा बलों के लिए रणनीतिक रूप से अहम मानी जा रही है.

कौन है पापाराव?

पापाराव सुकमा जिले का रहने वाला बताया जाता है. वह दंडकारण्य स्पेशल जोनल कमेटी का सदस्य है और पश्चिम बस्तर डिवीजन कमेटी का इंचार्ज भी रहा है. इसके साथ ही दक्षिण सब-जोनल ब्यूरो में उसकी भूमिका बताई जाती है. संगठनात्मक ढांचे में उसकी पकड़ इतनी मजबूत मानी जाती है कि उसके हटते ही पूरा पश्चिम बस्तर डिवीजन चरमरा सकता है.

कई मुठभेड़ों से बच निकला

सूत्रों के मुताबिक, पापाराव इलाके की भौगोलिक बनावट जल, जंगल और जमीन से गहराई से वाकिफ है. यही वजह है कि कई मुठभेड़ों में वह घेराबंदी से बच निकलने में सफल रहा. उसके पास अत्याधुनिक हथियार होने की भी बात कही जा रही है. यह स्थानीय ज्ञान ही उसे सुरक्षा बलों के लिए चुनौतीपूर्ण बनाता है.

बड़ी वारदातों से जुड़ा नाम

पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार, पापाराव कई बड़ी घटनाओं में शामिल रहा है. इसी कारण सुरक्षा एजेंसियां उसकी तलाश तेज कर चुकी हैं. अफसर लगातार आत्मसमर्पण की अपील कर रहे हैं, लेकिन संकेत मिल रहे हैं कि वह टकराव से बचने के बजाय बचाव की रणनीति अपना रहा है. अगर मुठभेड़ की स्थिति बनी, तो परिणाम गंभीर हो सकते हैं.

बस्तर में अंतिम चरण का अभियान

बस्तर में नक्सल विरोधी अभियान को अब अंतिम चरण में माना जा रहा है. सरकार की ओर से मार्च 2026 तक नक्सलवाद के खात्मे का लक्ष्य रखा गया है. इसी के तहत सर्च ऑपरेशन, इंटेलिजेंस ग्रिड और सरेंडर पॉलिसी को और मजबूत किया गया है. बचे-खुचे सक्रिय चेहरों पर दबाव बढ़ाया जा रहा है.

सरेंडर या टकराव

पापाराव जैसे बचे हुए नामों के सामने अब दो ही रास्ते माने जा रहे हैं- आत्मसमर्पण या टकराव. सुरक्षा बलों का फोकस हिंसा से दूर रखकर सरेंडर को बढ़ावा देने पर है. लेकिन अगर प्रतिरोध जारी रहा, तो ऑपरेशन और तेज होंगे. कुल मिलाकर, छत्तीसगढ़ में नक्सलवाद के अंत की घड़ी नजदीक बताई जा रही है और पापाराव इस निर्णायक अध्याय का केंद्रीय चेहरा बन गया है.

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