झीरम घाटी कांड की दर्दनाक कहानी, नक्सली कबीर के खुलासों ने हिला डाला! आखिर किसके कहने पर कांग्रेस नेता को मारा?
Jhiram Valley Massacre: झीरम घाटी नरसंहार को लगभग एक दशक बीत चुका है, लेकिन उसकी पीड़ा आज भी छत्तीसगढ़ की राजनीति और जनमानस में गूंजती है. इस बीच, उसी हमले से जुड़ा एक सनसनीखेज खुलासा सामने आया है. झीरम घाटी कांड के सबसे वांछित आरोपियों में शामिल नक्सली नेता कबीर ने सरेंडर के बाद पहली बार खुलकर अपनी चुप्पी तोड़ी है.
Jhiram Valley Massacre: झीरम घाटी नरसंहार को लगभग एक दशक बीत चुका है, लेकिन उसकी पीड़ा आज भी छत्तीसगढ़ की राजनीति और जनमानस में गूंजती है. इस बीच, उसी हमले से जुड़ा एक सनसनीखेज खुलासा सामने आया है. झीरम घाटी कांड के सबसे वांछित आरोपियों में शामिल नक्सली नेता कबीर ने सरेंडर के बाद पहली बार खुलकर अपनी चुप्पी तोड़ी है. न्यूज18 से खास बातचीत में उसने हमले की प्लानिंग, संगठन के फैसले और अपने निजी विचारों पर ऐसी बातें कहीं, जो सुनकर रोंगटे खड़े हो जाते हैं.
कबीर के बयान इसलिए भी अहम हैं क्योंकि वह न केवल हमले की साजिश की परतें खोलता है, बल्कि यह भी बताता है कि किस तरह एक टारगेटेड ऑपरेशन हालात बिगड़ने के बाद भीषण हिंसा में तब्दील हो गया. उसके शब्द जहां एक ओर गर्व का दावा करते हैं, वहीं दूसरी ओर उस दौर की भयावहता और अराजकता की गवाही भी देते हैं.
कौन है कबीर?
कबीर का असली नाम सोडी सोमा है. नक्सली संगठन में शामिल होने के बाद उसके नाम बदलते रहे, बस्तर में रहने के दौरान वह सुरिंदर कहलाया और जब MMC जोन (महाराष्ट्र–मध्य प्रदेश–छत्तीसगढ़) की जिम्मेदारी मिली, तब उसे कबीर के नाम से जाना गया. सुकमा का रहने वाला यह नक्सली करीब तीन दशकों तक जंगलों में सक्रिय रहा. उस पर मध्य प्रदेश में लगभग 22 लाख रुपये का इनाम घोषित था.
17 दिसंबर का सरेंडर और बड़ा खुलासा
17 दिसंबर को कबीर ने बालाघाट पुलिस के सामने हथियार डाल दिए. सरेंडर के बाद उसने बताया कि झीरम घाटी हमला कोई हादसा नहीं था, बल्कि पूरी तैयारी के साथ किया गया ऑपरेशन था. उसके मुताबिक, शुरुआत में निशाना पुलिस का काफिला था, लेकिन दो दिन पहले सूचना मिली कि महेंद्र कर्मा भी वहां होंगे और यहीं से योजना बदल गई.
कबीर का दावा है कि महेंद्र कर्मा को खत्म करने का निर्देश CPI (माओवादी) की सेंट्रल कमेटी से आया था. उसने कहा कि इससे पहले भी कई प्रयास असफल रहे थे. झीरम घाटी में पहले योजना थी कि उन्हें अगवा कर जन अदालत लगाई जाएगी, लेकिन सुरक्षा बलों की फायरिंग के बाद हालात बिगड़े और मामला खूनी मोड़ पर चला गया.
सबसे चौंकाने वाला बयान
कबीर का बयान कई सवाल खड़े करता है. वह कहता है कि “महेंद्र कर्मा को मारने पर मुझे गर्व है, लेकिन बाकी लोग उस हिंसा में फंस गए. हमें बस कांग्रेस नेता को मारने के लिए बोला गया था, लेकिन एनश्योर करने के चक्कर में ज्यादा गोलियां चल गईं." महेंद्र कर्मा की हत्या को सही ठहराते हुए कबीर ने उन पर सलवा जुडूम के जरिए बस्तर को तबाह करने का आरोप लगाया. उसने दावा किया कि गांव जले, लोग मरे और अत्याचार हुए. साथ ही यह भी कहा कि कर्मा कभी नक्सल आंदोलन से जुड़े थे, बाद में राजनीति में चले गए.





