11 एकड़ में अफीम की खेती करने वाले भाजपा नेता कौन? पार्टी ने लिया ये एक्शन

छत्तीसगढ़ में BJP नेता विनायक ताम्रकार 11 एकड़ में अफीम की खेती करते पाए गए, पार्टी ने उन्हें निलंबित कर दिया, पुलिस ने 3 लोगों को गिरफ्तार कर लिया है.

By :  सागर द्विवेदी
Updated On : 8 March 2026 4:56 PM IST

छत्तीसगढ़ के दुर्ग जिले से एक बड़ी राजनीतिक और कानूनी सनसनीखेज खबर सामने आई है. भाजपा के स्थानीय नेता और पूर्व किसान मोर्चा अध्यक्ष विनायक ताम्रकार को उनके फार्महाउस में अवैध अफीम की खेती करते हुए पकड़ा गया है. मामला इतना गंभीर है कि पार्टी ने उन्हें तुरंत निलंबित कर दिया और पुलिस ने ताम्रकार सहित तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया.

यह घटना न केवल स्थानीय राजनीति में हलचल मचा रही है, बल्कि विपक्ष ने भी इसे लेकर पार्टी पर सख्त आरोप लगाते हुए सवाल खड़े कर दिए हैं. पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने मामले का तुरंत दौरा किया और आरोप लगाया कि यह फार्महाउस लगभग 150 एकड़ में फैला हुआ है और इसके पीछे कुछ बड़े राजनीतिक कनेक्शन भी हो सकते हैं.

मामला कब और कैसे सामने आया?

शनिवार को कलेक्टर अभिजीत सिंह ने खुलासा किया कि पुलिस ने ताम्रकार, उनके सहयोगी विकास बिश्नोई और फार्महाउस के मुंशी मनीष ठाकुर को गिरफ्तार किया है. जांच में पता चला कि ग्राम समोदा और झेनझरी के बीच स्थित फार्महाउस में लगभग 5 एकड़ 62 डिसमिल क्षेत्र में अफीम की खेती की जा रही थी.

पुलिस ने मौके से लगभग 14 लाख 30 हजार अफीम के पौधे जब्त किए, जिनकी कीमत करीब 7.88 करोड़ रुपए आंकी गई. दो अन्य आरोपी, आंचला राम और श्रवण बिश्नोई, अभी फरार हैं और उनकी तलाश राजस्थान तक फैलाई गई है.

आरोपी ने क्या कहा?

विनायक ताम्रकार ने अपने ऊपर लगे आरोपों का खुलकर इनकार किया है. उन्होंने दावा किया कि जिस जमीन पर अफीम पाई गई, वह उनकी निजी संपत्ति नहीं है. ताम्रकार के मुताबिक यह जमीन “अधिया” यानी शेयरक्रॉपिंग के आधार पर दी गई थी और उन्हें इसके बारे में कोई जानकारी नहीं थी.ताम्रकार ने कहा कि 'यह जमीन मेरे नियंत्रण में नहीं थी. मुझे अफीम की खेती की जानकारी नहीं थी.' हालांकि, भाजपा ने मामले की गंभीरता को देखते हुए तुरंत ताम्रकार को पार्टी पद से हटा दिया और सदस्यता निलंबित कर दी.

फार्महाउस में क्या मिला?

जांच में सामने आया कि फार्महाउस में अफीम की खेती गेहूं और मक्का की आड़ में की जा रही थी. फार्महाउस के चारों ओर गेट और सुरक्षा बाउंसर तैनात थे, जिससे आम लोग अंदर नहीं जा सकते थे. मजदूर राजस्थान से लाए गए थे और उन्होंने खेती का काम संभाला.

इस वजह से ग्रामीणों को लंबे समय तक इस अवैध खेती की जानकारी नहीं मिल पाई. जब पुलिस और प्रशासन की टीम शनिवार को कार्रवाई के लिए पहुंची, तो बड़ी संख्या में ग्रामीण भी मौके पर इकट्ठा हो गए और कुछ ने अंदर जाने की कोशिश की, जिससे पुलिस और ग्रामीणों के बीच हल्की धक्का-मुक्की हुई.

राजनीतिक उठापटक और विपक्षी हमले

पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने कहा कि 'कौन-कौन से मंत्री और विधायक इस अवैध खेती में शामिल हैं, इसे सरकार को तुरंत उजागर करना चाहिए. प्रशासन की चुप्पी ने इस ऑपरेशन को लंबे समय तक जारी रखा.” बघेल के इस बयान के बाद मामला राजनीतिक रंग लेने लगा. BJP ने न केवल ताम्रकार को निलंबित किया, बल्कि पूरे मामले में पार्टी की छवि बचाने की कोशिश की.

क्या होगी अब कार्रवाई?

पुलिस ने जब्त अफीम के पौधों को नष्ट करने की तैयारी शुरू कर दी है. साथ ही, राजस्थान भेजी गई टीम फरार आरोपियों की तलाश में जुटी है. प्रशासन और पुलिस का कहना है कि सभी संभावित संलिप्त लोगों की जांच की जाएगी. यह मामला न केवल दुर्ग, बल्कि पूरे छत्तीसगढ़ में कानून व्यवस्था और राजनीतिक नैतिकता पर सवाल खड़े कर रहा है.

फिलहाल ताम्रकार का आरोप पार्टी और पुलिस दोनों के लिए सतर्कता की घंटी बन गया है. इस घटना ने यह स्पष्ट कर दिया है कि राजनीतिक पद का दुरुपयोग और अवैध खेती अब सीधे मीडिया और जांच एजेंसियों की निगाह में है. भविष्य में यह मामला राजनीतिक दलों और प्रशासनिक व्यवस्था दोनों के लिए सबक साबित हो सकता है.

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