कौन थे जीवन ठाकुर जिनके नाम पर विधानसभा में भिड़ गए भूपेश बघेल और विजय शर्मा?

छत्तीसगढ़ में जीवन ठाकुर की जेल में मौत ने कस्टोडियल डेथ का मुद्दा गरमा दिया है. इस पर विधानसभा में भूपेश बघेल और विजय शर्मा आमने-सामने आ गए.

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छत्तीसगढ़ की राजनीति इन दिनों एक नाम को लेकर गरमाई हुई है और वो नाम है जीवन ठाकुर का. जेल में उनकी संदिग्ध मौत ने न सिर्फ कस्टोडियल डेथ पर बड़े सवाल खड़े किए हैं, बल्कि विधानसभा तक सियासी घमासान छेड़ दिया है. इस मुद्दे पर भूपेश बघेल और विजय शर्मा आमने-सामने आ गए, जिससे मामला और तूल पकड़ गया. आखिर कौन थे जीवन ठाकुर, उनकी मौत कैसे हुई और क्यों बना यह केस बड़ा राजनीतिक मुद्दा, यही समझना इस समय सबसे अहम है.

जीवन ठाकुर कौन थे और उनकी पहचान क्या थी?

जीवन ठाकुर छत्तीसगढ़ के एक स्थानीय स्तर पर सक्रिय सामाजिक कार्यकर्ता और जनप्रतिनिधि माने जाते थे. वे खासतौर पर ग्रामीण और आदिवासी क्षेत्रों में किसानों, युवाओं और आम लोगों के मुद्दों को उठाने के लिए जाने जाते थे. क्षेत्र में उनकी पहचान एक ऐसे व्यक्ति की थी जो जमीनी स्तर पर लोगों की समस्याओं को प्रशासन तक पहुंचाते थे.

मौत कैसे हुई और क्या है पूरा मामला?

जीवन ठाकुर जेल में बंद थे और बाद में कोर्ट के आदेश पर रायपुर जेल शिफ्ट किए गए थे. इलाज के दौरान उनकी मौत हो गई. उनकी मौत को लेकर कई सवाल उठे, खासकर कस्टोडियल डेथ को लेकर.

क्यों गरमाई छत्तीसगढ़ की सियासत?

इस मुद्दे को विधानसभा में भूपेश बघेल ने जोरदार तरीके से उठाया. उन्होंने आरोप लगाया कि जीवन ठाकुर को फर्जी मामलों में फंसाया गया और जेल में उन्हें उचित सुविधाएं नहीं मिलीं. इस पर डिप्टी सीएम विजय शर्मा ने जवाब देते हुए कहा कि मामले की जांच जारी है और फर्जी केस की बात सही नहीं है.

जेलों में मौत के आंकड़े क्या बताते हैं?

सरकार की ओर से बताया गया कि जनवरी 2025 से 2026 तक राज्य की जेलों में 66 कैदियों की मौत हुई है. इनमें से कई मामलों में जांच पूरी हो चुकी है, जबकि बाकी मामलों की जांच अभी जारी है. यह आंकड़े जेल सुरक्षा और सिस्टम पर गंभीर सवाल खड़े करते हैं.

क्या है कस्टोडियल डेथ और क्यों उठ रहा सवाल?

कस्टोडियल डेथ यानी हिरासत में मौत. यह एक संवेदनशील और गंभीर मुद्दा है. जीवन ठाकुर का मामला सामने आने के बाद यह सवाल उठने लगा है कि क्या जेलों में कैदियों की सुरक्षा सुनिश्चित है और क्या सिस्टम में सुधार की जरूरत है.

विपक्ष के आरोप और सरकार का पक्ष क्या है?

विपक्ष ने इसे मानवाधिकार और न्याय का मुद्दा बताते हुए जांच की मांग की, जबकि सरकार ने कहा कि मामले में मजिस्ट्रियल जांच चल रही है और सभी तथ्यों के सामने आने के बाद ही निष्कर्ष निकाला जाएगा.

क्यों अहम है जीवन ठाकुर केस?

यह मामला सिर्फ एक व्यक्ति की मौत तक सीमित नहीं है, बल्कि यह पूरे जेल सिस्टम, कैदियों की सुरक्षा और प्रशासनिक जवाबदेही पर बड़ा सवाल खड़ा करता है. आने वाले समय में इस केस की जांच और रिपोर्ट राजनीतिक और सामाजिक दोनों स्तर पर असर डाल सकती है.

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