नर्स अंजलि की मौत: हत्या या आत्महत्या! जिस पर भरोसा उसी पुलिस पर उठे सवाल, क्या है डबल मिस्ट्री?
बिहार के छपरा में नर्स अंजलि की संदिग्ध मौत ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं. हत्या या आत्महत्या. दो थ्योरी आमने-सामने हैं. परिजन इसे हत्या मान रहे हैं, जबकि पुलिस आत्महत्या. अहम सवाल यह है कि जिससे अंजलि की हुई धक्का मुक्की उस पहलू पर पुलिस जांच क्यों नहीं कर रही? दूसरी पोस्टमार्टम की क्यों पड़ी जरूरत? क्या पुलिस मामले को दबाना चाहती है? जानें हत्या के पीछे क्या है डबल थ्योरी?;
बिहार के सीवान जिले के छपरा की नर्स अंजलि की मौत को लेकर सड़कों बवाल मचा है. परिजन और लोग हत्या की जांच में पुलिस की नापाक भूमिका लेकर प्रदर्शन कर रहे हैं. पुलिस अंजलि की मौत को आत्महत्या मान रही है. जबकि परिजन का आरोप है कि अंजलि की साजिश के तहत हत्या हुई है. परिजनों का कहना है कि पुलिस इस मामले में सच को छुपा रही है. मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक पुलिस ने पोस्टमार्टम रिपोर्ट को दबाने की कोशिश की है. यही वजह है कि ब्लाइंड मर्डर के इस मामले में लोग पुलिस के खिलाफ सड़कों पर उतर आए हैं.
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क्या है पूरा मामला?
नर्स अंजलि एक नर्सिंग होम में कार्यरत थीं. संदिग्ध हालात में उनकी मौत हुई. पुलिस का शुरुआती दावा इसे आत्महत्या बताता है, लेकिन परिजन इसे मानने को तैयार नहीं हैं. परिजनों का कहना है कि नर्स अंजलि की मौत अब सिर्फ एक केस नहीं रही, बल्कि सिस्टम पर उठता सवाल बन चुकी है. जिस मौत को पुलिस शुरुआती तौर पर आत्महत्या बता रही है, उसी को लेकर परिजन और स्थानीय लोग हत्या की आशंका जता रहे हैं. सवाल सिर्फ इतना नहीं कि अंजलि की मौत कैसे हुई, बल्कि यह भी कि क्या सच को दबाने की कोशिश हो रही है?
दरअसल, बिहार के सारण जिले में श्रेया नर्सिंग होम की नर्स अंजलि कुमारी की रेलवे ट्रैक पर मिले क्षत-विक्षत शव को लेकर परिवार ने गैंगरेप और हत्या का आरोप लगाया था, लेकिन पुलिस ने इन आरोपों से इनकार कर दिया है. रेल एसपी वीणा कुमारी ने संकेत करते हुए बताया है कि प्रारंभिक जांच और सीसीटीवी फुटेज से यह आत्महत्या का मामला लगता है, हालांकि पूरी जांच अभी बाकी है. रेल पुलिस का यह खुलासा ऐसे समय में हुआ जब छपरा में न्याय की मांग को लेकर विरोध प्रदर्शन हो रहे हैं.
CCTV फुटेज से खुलेगा राज!
पुलिस के अनुसार, सीसीटीवी फुटेज में दिख रहा है कि श्रेया नर्सिंग होम के मैनेजर अखिलेश कुमार ने अंजलि के साथ धक्का-मुक्की की. नाराज अंजलि वहां से भागकर छपरा जंक्शन की ओर गई जहां बाद में अंजलि का शव बरामद हुआ. पीड़ितों का कहना है कि रेलवे पुलिस और इस एंगल पर काम करने को तैयार नहीं है. नर्सिंग होम के मैनेजर से पूछताछ भी नहीं की है. अंजलि के परिवार ने डॉक्टर पंकज कुमार, अखिलेश कुमार और फीरोज केशर पर गैंगरेप और हत्या का आरोप लगाते हुए FIR दर्ज कराई थी, लेकिन पुलिस ने इन आरोपों को प्रारंभिक रूप से खारिज कर दिया.
मौत की डबल थ्योरी क्या है?
पहली थ्योरी पुलिस की है रेलवे पुलिस की एसपी का कहना है कि यह आत्महत्या का मामला है. पुलिस के अनुसार अंजलि मानसिक दबाव में थीं. घटनास्थल से कोई सुसाइड नोट या संकेत अभी तक नहीं मिले हैं. पोस्टमार्टम रिपोर्ट के कुछ बिंदुओं को आधार बनाया जा रहा है.
दूसरी थ्योरी परिजनों का आरोप है. पीड़ित परिवार के सदस्यों का कहना है कि अंजलि की मौत से पहले धक्का-मुक्की हुई थी. शरीर पर चोटों के निशान होने का दावा परिजन कर रहे हैं. लोग CCTV फुटेज की पूरी जांच न होने का आरोप भी पुलिस पर लगा रहे हैं.
आरोप-प्रत्यारोप के बीच यह सवाल उठे हैं कि अंजलि किसी गंभीर विवाद में उलझी हुई थीं. अहम सवाल यह है कि अंजलि की किससे हुई थी धक्का-मुक्की और क्यों? प्रदर्शनकारियों के मुताबिक अंजलि की कुछ लोगों से कामकाजी या व्यक्तिगत विवाद था. मौत से पहले उनकी बहस और धक्का-मुक्की की बात सामने आई है. यही विवाद उनकी मौत की वजह बना. लोगों का कहना है कि पुलिस ने केस को जल्दबाजी में आत्महत्या करार दिया है. अभी तक सभी संदिग्धों से पूछताछ नहीं हुई है. CCTV और कॉल डिटेल्स की गहराई से जांच नहीं हुई है. इस मामले में पुलिस प्रभावशाली लोगों को बचाने में जुटी है.
मैनेजर के साथ विवाद की कहानी क्या है?
इस मामले की शुरुआत 25 दिसंबर को हुई थी जब 24 वर्षीय अंजलि ड्यूटी पर गई थी. परिवार का कहना है कि उसका फोन स्विच ऑफ हो गया और अगले दिन शव मिला. पिता ने कहा कि पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट में यौन शोषण के संकेत हैं, लेकिन पुलिस इसे छिपा रही है. दूसरी पोस्टमॉर्टम कराई गई, जिसकी रिपोर्ट का इंतजार है. इस बीच फोरेंसिक टीम ने घटनास्थल से साक्ष्य जुटाए हैं और क्लीनिक के सीसीटीवी फुटेज को फोरेंसिक लैब भेजा गया है. रेल आईजी पी कन्नन ने उच्चाधिकारियों के साथ बैठक कर जांच की समीक्षा की है और मामले की गहराई से पड़ताल की बात कही है.