नीतीश सरकार का 10 लाख किरायेदारों हित में बड़ा फैसला, मकान रेंट पर लेना सस्ता, कितना होगा फायदा?

बिहार सरकार ने रेंट एग्रीमेंट और लीज रजिस्ट्रेशन शुल्क में 50% तक कटौती करने का निर्णय लिया है. इससे पटना समेत राज्य के 10 लाख से अधिक किरायेदारों को सीधा आर्थिक फायदा होगा.;

( Image Source:  Sora AI )

बिहार में घर या दुकान किराये पर लेने वालों के लिए बड़ी खुशखबरी है. नीतीश कुमार सरकार ने रेंट एग्रीमेंट और लीज रजिस्ट्रेशन को बढ़ावा देने के लिए शुल्क में 50 प्रतिशत तक कटौती करने जा रही है. इस फैसले का सरकार का मकसद साफ है. ज्यादा से ज्यादा लोगों को कानूनी रूप से सुरक्षित रेंट एग्रीमेंट के दायरे में लाना. ताकि​ किसी तरह का विवाद होने पर किराएदारों के हित सुरक्षित रहें.

पटना समेत पूरे बिहार में लाखों लोग किराये के मकानों में रहते हैं, लेकिन ऊंची रजिस्ट्रेशन फीस के कारण ज्यादातर लोग एग्रीमेंट रजिस्टर्ड नहीं कराते। अब यह आर्थिक बोझ कम होने वाला है.

दरअसल, पटना समेत पूरे बिहार में लाखों लोग किराये के मकानों में रहते हैं, लेकिन ऊंची फीस के कारण अधिकांश लोग रजिस्टर्ड एग्रीमेंट कराने से बचते रहे हैं. अब सरकार का यह कदम उनकी जेब पर पड़ने वाले बोझ को कम करेगा. जानें, बिहार सरकार के नए फैसले के अनुसार अब किराएदार को कितना देना होगा एग्रीमेंट चार्ज.

अभी कितनी लगती है फीस?

  • कुल किराया राशि पर 0.5% स्टांप ड्यूटी का प्रावधान है.
  • कुल किराया राशि पर 2% निबंधन शुल्क देना पड़ता है.
  • अभी तक 10 लाख रुपये के कुल किराया मूल्य पर 5,000 रुपये स्टांप ड्यूटी और 20,000 रुपये निबंधन शुल्क लगता रहा है.
  • एक किरायेदार को कुल खर्च सालाना 25,000 रुपये सरकार को निबंधन शुल्क के रूप में देना पड़ता है.

प्रस्तावित बदलाव के बाद क्या होगा?

  • किरायेदारों को स्टांप ड्यूटी 0.5% पहले की तरह देना होगा.
  • अब निबंधन शुल्क घटाकर 2% से 1% किया जाएगा.
  • 10 लाख रुपये के किराया मूल्य पर खर्च घटकर करीब 15,000 रुपये रह जाएगा.
  • सरकार के इस फैसले से किरायेदारों के लिए सीधे 10,000 रुपये की बचत.
  • नए नियम से पटना के पटना में 10 लाख से ज्यादा किरायेदार का होगा फायदा.

क्यों लिया गया यह फैसला?

  • महंगी फीस के कारण लोग रजिस्टर्ड एग्रीमेंट से बच रहे थे.
  • साल भर में पटना में सिर्फ 5,000 रेंट एग्रीमेंट ही रजिस्टर्ड होते हैं.
  • सरकार चाहती है कि किरायेदार और मकान मालिक दोनों को कानूनी सुरक्षा मिले.

कानूनी रूप से क्या जरूरी है?

  • रजिस्टर्ड रेंट एग्रीमेंट ही विवाद की स्थिति में मान्य होता है.
  • सिर्फ नोटरी कराना पर्याप्त कानूनी सुरक्षा नहीं देता.
  • एक साल से कम अवधि के एग्रीमेंट का भी रजिस्ट्रेशन जरूरी.

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