Cricket New Rules: क्रिकेट में अब आखिरी ओवर में विकेट गिरने पर खेल तुरंत खत्म नहीं होगा. बाउंड्री के बाहर से उछलकर कैच लेने वाले फील्डर पर भी नए नियम लागू होंगे. यहां तक कि विकेटकीपर के खड़े होने और बल्लेबाज के हिट विकेट आउट होने के नियमों में भी बदलाव किया गया है. क्रिकेट के नियम बनाने वाली संस्था मेरिलबोन क्रिकेट क्लब (MCC) ने खेल के कानूनों में 73 अहम बदलाव किए हैं, जो 1 अक्टूबर यानी आज से लागू हो गए हैं.

नए नियमों का मकसद आधुनिक क्रिकेट की बदलती परिस्थितियों के मुताबिक कानूनों को स्पष्ट करना और बल्लेबाज-गेंदबाज के बीच संतुलन बनाए रखना है. आइए, आसान भाषा में समझते हैं कि क्रिकेट के नए कानूनों में क्या बदला है और इसका खिलाड़ियों के खेल पर क्या असर पड़ेगा...

क्रिकेट के नियमों में क्यों हुआ बदलाव?

  • क्रिकेट के नियमों में बदलाव करने की जिम्मेदारी MCC की है. संस्था ने फरवरी 2026 में क्रिकेट के कानूनों का नया संस्करण जारी किया था. 2022 के बाद यह पहला मौका है, जब नियमों को नए सिरे से संशोधित किया गया है.
  • MCC ने 2017 के क्रिकेट कोड में तीसरी बार संशोधन किया है. इससे पहले 2019 और 2022 में बदलाव किए गए थे. इस बार कुल 73 महत्वपूर्ण बदलावों के साथ कई भाषाई संशोधन भी किए गए हैं.
  • MCC के हेड ऑफ क्रिकेट फ्रेजर स्टीवर्ट के मुताबिक, क्रिकेट में बल्ले और गेंद के बीच संतुलन बनाए रखना जरूरी है. नए बदलावों में कुछ ऐसे प्रावधान हैं, जिनसे फील्डिंग करने वाली टीम को विकेट लेने और बल्लेबाजों को आउट करने के अधिक अवसर मिलेंगे.
  • हालांकि, सभी देशों में इन नियमों को लागू करने का तरीका वहां के क्रिकेट बोर्ड तय करेंगे. यानी घरेलू क्रिकेट में नए कानूनों को लागू करने के लिए राष्ट्रीय क्रिकेट बोर्ड अपनी खेल परिस्थितियों के अनुसार फैसला ले सकते हैं.

1- आखिरी ओवर में विकेट गिरा तो क्या होगा?

नए नियमों में सबसे अहम बदलाव टेस्ट और अन्य मल्टी-डे क्रिकेट के आखिरी ओवर को लेकर किया गया है.

  • पुराना नियम: अगर दिन के आखिरी ओवर में विकेट गिर जाता था तो खेल वहीं समाप्त हो जाता था. उस ओवर की बची हुई गेंदें अगले दिन सुबह फेंकी जाती थीं. यानी बल्लेबाजी करने वाली टीम को दिन के आखिरी समय में नया बल्लेबाज मैदान पर भेजने की जरूरत नहीं पड़ती थी.
  • नया नियम: अब दिन के आखिरी ओवर में विकेट गिरने के बावजूद ओवर पूरा किया जाएगा, बशर्ते मौसम और मैदान की परिस्थितियां खेलने के अनुकूल हों. नए बल्लेबाज को मैदान पर आकर बची हुई गेंदों का सामना करना होगा.

इस बदलाव का सीधा फायदा गेंदबाजी करने वाली टीम को मिलेगा. दिन के आखिरी समय में विकेट लेने के बाद उसे नए बल्लेबाज को आउट करने का एक और मौका मिल सकता है. MCC का मानना है कि पुराने नियम के कारण गेंदबाजी करने वाली टीम को विकेट लेने का पूरा फायदा नहीं मिलता था. नए नियम के बाद बल्लेबाजी करने वाली टीम को यह भी तय करना होगा कि वह नाइट वॉचमैन भेजेगी या नियमित बल्लेबाज को मैदान पर उतारेगी.

2- बाउंड्री के बाहर से कैच लेने का नियम क्या बदला?

बाउंड्री के पास कैच लेने के दौरान फील्डर के हवा में उछलकर गेंद को अंदर की ओर धकेलने की तकनीक काफी चर्चित रही है. इसे आमतौर पर 'बनी हॉप' कहा जाता है.

  • पुराना नियम: बाउंड्री के बाहर से उछलकर हवा में गेंद को छूने और फिर मैदान के अंदर आकर कैच पूरा करने के नियम की व्याख्या को लेकर विवाद की गुंजाइश थी.
  • नया नियम: अब बाउंड्री के बाहर से हवा में उछलने वाला फील्डर गेंद को केवल एक बार हवा में छू सकता है. इसके बाद गेंद के डेड होने तक उसे हर बार मैदान के अंदर ही उतरना होगा. इसका मतलब है कि फील्डर बाउंड्री के बाहर से उछलकर गेंद को हवा में उछाल सकता है, लेकिन इसके बाद दोबारा गेंद को छूने से पहले उसे मैदान के अंदर उतरना होगा.

यह बदलाव अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में ICC की ओर से पहले से लागू व्यवस्था के अनुरूप है. इससे बाउंड्री के पास कैच लेने के नियम अधिक स्पष्ट हो जाएंगे.

3-  ओवरथ्रो और मिसफील्ड में क्या अंतर होगा?

क्रिकेट में ओवरथ्रो और मिसफील्ड को लेकर भी नियम स्पष्ट किए गए हैं. कई बार फील्डर के गेंद रोकने या उसे दूसरे खिलाड़ी तक पहुंचाने के प्रयास को लेकर भ्रम की स्थिति पैदा होती है. अब ओवरथ्रो उसे माना जाएगा, जब फील्डर रन रोकने या रन आउट करने के उद्देश्य से गेंद को स्टंप की ओर फेंकने का प्रयास करेगा. इसके विपरीत, गेंद को रोकने या बाउंड्री के पास दूसरे फील्डर तक पहुंचाने के दौरान हुई गलती को मिसफील्ड माना जाएगा, ओवरथ्रो नहीं. इस बदलाव का उद्देश्य दोनों परिस्थितियों के बीच स्पष्ट अंतर करना है, ताकि अंपायरों को निर्णय लेने में आसानी हो.

4- गेंद कब डेड मानी जाएगी?

क्रिकेट में गेंद कब डेड यानी खेल से बाहर मानी जाएगी, इसे लेकर भी नियम बदला गया है.

  • पुराना नियम: गेंद के पूरी तरह स्थिर होने या उसके गेंदबाज अथवा विकेटकीपर के हाथों में आने जैसी परिस्थितियों को ध्यान में रखा जाता था.
  • नया नियम: अब गेंद किसी भी फील्डर के हाथ में होने या मैदान पर स्थिर हो जाने की स्थिति में भी डेड मानी जा सकती है. हालांकि, इसके लिए अंपायर को यह संतुष्ट होना होगा कि गेंद से आगे कोई खेल संभव नहीं है और संबंधित परिस्थितियां पूरी हो रही हैं.

इस बदलाव से अंपायरों को यह तय करने में अधिक अधिकार मिलेगा कि गेंद वास्तव में खेल से बाहर हुई है या नहीं.

4- गेंद फेंकते समय विकेटकीपर कहां खड़ा होगा?

विकेटकीपर की पोजिशन को लेकर भी नए नियम लागू किए गए हैं.

  • पुराना नियम: गेंदबाज के गेंद फेंकने के दौरान विकेटकीपर की स्थिति को लेकर नियमों में अलग-अलग परिस्थितियों की व्याख्या की जाती थी.
  • नया नियम: अब गेंद रिलीज होने के बाद विकेटकीपर का पूरा शरीर स्ट्राइकर के स्टंप के पीछे होना चाहिए. गेंदबाज के रनअप के दौरान विकेटकीपर अपने दस्ताने स्टंप के आगे रख सकता है, लेकिन गेंद फेंके जाने के समय उसे पूरी तरह पीछे होना होगा. इस बदलाव से विकेटकीपर की स्थिति को लेकर अंपायरों के लिए निर्णय लेना आसान होगा.

5- हिट विकेट आउट होने के नियम में क्या बदलाव हुआ?

हिट विकेट के नियम में भी कुछ अहम स्पष्टीकरण दिए गए हैं. यह बदलाव खास तौर पर उन परिस्थितियों के लिए है, जब बल्लेबाज शॉट खेलने के बाद अपना संतुलन खो देता है.  अगर बल्लेबाज शॉट खेलने के बाद संतुलन खोकर स्टंप पर गिर जाता है तो उसे हिट विकेट आउट दिया जा सकता है. हालांकि, गेंद को खेलने के बाद संतुलन दोबारा हासिल करने तक बल्लेबाज के गेंद को रिसीव करने की प्रक्रिया जारी मानी जाएगी. अगर कोई फील्डर बल्लेबाज को संतुलन हासिल करते समय धक्का देकर स्टंप पर गिरा देता है तो उसे हिट विकेट आउट नहीं दिया जाएगा.

बल्लेबाज के बल्ले और दूसरे उपकरणों से जुड़ी परिस्थितियों को भी स्पष्ट किया गया है. अगर बल्लेबाज का अलग हुआ कोई उपकरण पहले किसी दूसरे खिलाड़ी से टकराता है और उसके बाद स्टंप से टकराता है तो बल्लेबाज हिट विकेट आउट नहीं होगा, लेकिन अगर बल्लेबाज के हाथ से छूटा बल्ला सीधे स्टंप से टकराता है तो उसे आउट दिया जा सकता है.

6- क्या अब लकड़ी के तीन टुकड़ों से बने बल्ले इस्तेमाल कर सकेंगे?

नए नियमों के तहत वयस्कों के मनोरंजक क्रिकेट में लैमिनेटेड बल्लों के इस्तेमाल की अनुमति दी गई है. लैमिनेटेड बल्ले लकड़ी के अधिकतम तीन टुकड़ों से बनाए जा सकते हैं. इनमें कम गुणवत्ता वाली विलो लकड़ी के साथ बेहतर गुणवत्ता वाली लकड़ी का इस्तेमाल किया जा सकता है. MCC ने जूनियर क्रिकेट में 2017 में ही ऐसे बल्लों को मंजूरी दे दी थी. अब वयस्कों के मनोरंजक क्रिकेट में भी इन्हें इस्तेमाल करने की अनुमति दी गई है.

इस बदलाव का एक उद्देश्य बल्लों की बढ़ती कीमतों के बीच खिलाड़ियों को किफायती विकल्प उपलब्ध कराना है. MCC के मुताबिक, लैमिनेटेड बल्लों से पारंपरिक बल्लों की तुलना में कोई अतिरिक्त प्रदर्शन लाभ नहीं मिलता. हालांकि, किस स्तर के घरेलू क्रिकेट में इन बल्लों का इस्तेमाल किया जा सकेगा, यह संबंधित राष्ट्रीय क्रिकेट बोर्ड तय करेंगे.

7- रन आउट और स्टंपिंग के नियमों में क्या बदलाव हुआ?

रन आउट, स्टंपिंग और कैच के मामलों में गेंद पर नियंत्रण को लेकर भी नियम स्पष्ट किए गए हैं. अब केवल गेंद को छू लेना ही रन आउट या स्टंपिंग के लिए पर्याप्त नहीं होगा. स्टंप तोड़ते समय फील्डर का गेंद पर पूरा नियंत्रण होना जरूरी है. कैच के मामले में भी यही सिद्धांत लागू होगा. यानी कैच पूरा माना जाने के लिए गेंद पर नियंत्रण की शर्त को पूरा करना होगा.  इस बदलाव का उद्देश्य उन परिस्थितियों में स्पष्टता लाना है, जहां फील्डर गेंद को छू तो लेता है, लेकिन उस पर उसका पूरा नियंत्रण नहीं होता।

8- शॉर्ट रन के नियम में क्या बदला?

जानबूझकर कम रन लेने यानी डिलिबरेट शॉर्ट रन को लेकर भी नए नियमों में स्पष्टीकरण दिया गया है. अब बल्लेबाज एक-दूसरे को पार करने के बाद भी दौड़ते समय वापस मुड़ सकते हैं. हालांकि, अगर अंपायर जानबूझकर शॉर्ट रन लेने की स्थिति पाते हैं तो अगली गेंद पर स्ट्राइक किस बल्लेबाज के पास होगी, यह फैसला फील्डिंग टीम करेगी. यह प्रावधान ICC पहले ही अपना चुका है. अब इसे MCC के कानूनों में भी शामिल कर लिया गया है.

9-  पुरुष, महिला और जूनियर क्रिकेट में गेंद का आकार बदलेगा?

नए नियमों में क्रिकेट गेंद के आकार को लेकर भी स्पष्ट और मानकीकृत श्रेणियां बनाई गई हैं. अब गेंदों को तीन आकारों में वर्गीकृत किया जाएगा. पुरुष क्रिकेट में साइज 1 की गेंद इस्तेमाल होगी. महिला और जूनियर क्रिकेट के लिए भी निर्धारित श्रेणियों के अनुसार गेंदों का इस्तेमाल किया जाएगा. इस बदलाव का मकसद अलग-अलग श्रेणियों के क्रिकेट में गेंद के आकार और उसकी विशिष्टताओं को लेकर एकरूपता लाना है.

10- क्या सभी देशों में एक साथ लागू होंगे नए नियम?

MCC ने क्रिकेट के कानूनों में बदलाव तो कर दिए हैं, लेकिन इन्हें घरेलू क्रिकेट में किस तरह लागू किया जाएगा, इसका फैसला संबंधित देशों के क्रिकेट बोर्ड करेंगे. अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में ICC की खेल परिस्थितियां भी अहम भूमिका निभाती हैं. कुछ बदलाव पहले ही अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में लागू किए जा चुके हैं, जबकि अन्य को अपनाने की प्रक्रिया संबंधित बोर्ड के नियमों पर निर्भर करेगी. इसलिए 1 अक्टूबर से नए कानूनों के लागू होने का मतलब यह नहीं है कि हर घरेलू टूर्नामेंट में सभी बदलाव एक ही तरह से लागू होंगे.

क्रिकेट के नियमों में क्यों किया गया 73 बदलाव?

क्रिकेट के नियमों में किए गए 73 बदलावों का मकसद आधुनिक खेल की जरूरतों के मुताबिक कानूनों को स्पष्ट करना है. आखिरी ओवर में विकेट गिरने के बाद भी खेल जारी रखने, बाउंड्री कैच की सीमाएं तय करने और गेंद पर नियंत्रण जैसे बदलावों का सीधा असर मैच की परिस्थितियों पर पड़ सकता है. इनमें कुछ बदलाव गेंदबाजी और फील्डिंग करने वाली टीम को अधिक अवसर देते हैं, जबकि कुछ का उद्देश्य अंपायरों के फैसलों में स्पष्टता लाना है. नए कानूनों का वास्तविक प्रभाव इस बात पर भी निर्भर करेगा कि अलग-अलग क्रिकेट बोर्ड इन्हें अपनी प्रतियोगिताओं में किस तरह लागू करते हैं.