महाशिवरात्रि पर क्या है शिवलिंग पर जलाभिषेक करने की विधि, भूलकर ना करें ऐसी गलतियां
Maha Shivaratri के पावन अवसर पर भगवान शिव की पूजा में जलाभिषेक का विशेष महत्व माना जाता है. मान्यता है कि श्रद्धा और सही विधि से चढ़ाया गया जल भक्तों की मनोकामनाएं पूरी करता है.;
शिव आराधना का महापर्व महाशिरात्रि 15 फरवरी को है. हिंदू पंचांग के अनुसार, हर वर्ष फाल्गुन माह के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि पर महाशिवरात्रि का पर्व मनाया जाता है. ऐसी मान्यता है कि इस तिथि की रात्रि को ही भगवान शिव ज्योतिर्लिंग के स्वरूप में प्रकट हुए थे. इसके अलावा दूसरी मान्यता है कि इस दिन भगवान शिव और देवी पार्वती का विवाह हुआ. ऐसे में महाशिवरात्रि पर भगवान शिव की विधि-विधान के साथ पूजा करने का विशेष महत्व होता है. महाशिवरात्रि पर शिवभक्त मंदिरों में जाकर भगवान शिव के दर्शन और पूजन करते हैं.
शिवजी के पूजन में जलाभिषेक का विशेष महत्व होता है. महाशिवरात्रि पर शिवजी का जलाभिषेक करना बहुत ही शुभ और फलदायी माना जाता है. शिवलिंग पर जलाभिषेक करना बहुत ही आसान होता है, लेकिन शास्त्रों में शिवलिंग पर जलाभिषेक करने के कुछ नियम और विधि बताई गई है, ऐसे में उसी के आधार पर ही शिवलिंग का जलाभिषेक करना चाहिए. आइए जानते हैं शिवलिंग पर जलाभिषेक करने का सही तरीका क्या है और किन-किन नियमों का पालन करना चाहिए.
शिवलिंग पर जल चढ़ाने की दिशा
शिवलिंग पर जलाभिषेक करते समय दिशा का विशेष ध्यान रखना चाहिए. शिवपुराण के अनुसार, शिवलिंग पर जल चढ़ाते समय शिवभक्त हमेशा उत्तर दिशा की तरफ मुख करके खड़े हो. इस दिशा में जलाभिषेक करना बहुत ही शुभ और कल्याणकारी माना जाता है.
क्या गंगाजल से अभिषेक करना शुभ?
शिवपुराण के अनुसार शिवलिंग पर गंगाजल से जलाभिषेक करना सबसे शुभ और अच्छा माना जाता है. अगर किसी कारण से गंगाजल उपलब्ध ना हो तो शुद्ध जल से शिवलिंग का जलाभिषेक करें. जल में कच्चा दूध, शहद और गंगाजल की कुछ बूंदों को मिलाकर भी जलाभिषेक करना शुभ और फलदायी साबित होता है.
जलाधारी को कभी ना लांघें
शिवलिंग पर जल हमेशा उत्तर की ओर मुख करके चढ़ाना चाहिए. शास्त्रों में कहा गया है कि शिवलिंग की जलाधारी को कभी पार नहीं करना चाहिए. उसे लांघना अशुभ माना गया है.
शिवलिंग अभिषेक की विधि क्या है?
- शिवपुराण के अनुसार जब भी शिवलिंग पर जलाभिषेक करें तो हमेशा शांत और भक्तिभाव से धीरे-धीरे जल अर्पित करें.
- जलाभिषेक में तांबे, चांदी, पीतल या कांसे के बर्तनों का उपयोग करना शुभ और फलदायी होता है.
- शुद्ध जल से जलाभिषेक करने से पहले इसमें दूध और गंगाजल की कुछ बूंदों को जरूर मिला लें.
- शिवलिंग पर जलाभिषेक करने से पहले उत्तर दिशा की ओर मुख करके जलहरी के दाईं ओर जल अर्पित करें. यह स्थान भगवान गणेश का माना जाता है. फिर जलहरी के बाईं तरफ जल अर्पित करें. यह स्थान भगवान कार्तिकेय का माना जाता है. इसके बाद जलहरी के मध्य भाग में जल चढ़ाएं. इस स्थान को भगवान शिव की पुत्री अशोक सुंदरी का माना जाता है.
- इसके बाद जलहरी के गोलाकर भाग में जल अर्पित करें. यह स्थान माता पार्वती के हस्तकमल का प्रतीक होता है.
- फिर अंत में शिवलिंग पर धीरे-धीरे जल अर्पित करें और लगातार ऊं नम: शिवाय मंत्र का जाप करें.
कब है जलाभिषेक का मुहूर्त?
महाशिवरात्रि के दिन सुबह से ही शिव मंदिर में भक्तों को भीड़ एकत्रित होने लगेगी. महाशिवरात्रि पर सुबह 08 बजकर 24 मिनट से लेकर दोपहर 12 बजकर 53 मिनट तक जलाभिषेक करना सबसे उत्तम मुहुर्त रहेगा. इसके अलावा शाम 06 बजकर 11 मिनट से लेकर शाम 07 बजकर 47 मिनट के मध्य में जलाभिषेक कर सकते हैं.