मांस के एक पिंड से हुआ था गांधारी के 100 पुत्रों का जन्म, 9 महीने नहीं 2 साल तक थीं गर्भवती- पढ़िए कौरवों की गाथा

महाभारत में वर्णित है कि गांधारी 9 महीने नहीं, बल्कि 2 साल तक गर्भवती रही. गर्भपात के बाद उनके गर्भ से एक मांस का पिंड निकला, जिसे महर्षि वेदव्यास ने 101 हिस्सों में बाँटकर घी से भरे कुंडों में रखा. इन कुंडों से दुर्योधन और उसके 99 भाई एवं एक बहन दुशाला का जन्म हुआ.;

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Edited By :  सागर द्विवेदी
Updated On : 9 Jan 2026 6:06 PM IST

महाभारत का महा-युद्ध कौरव और पांडवों के बीच हुआ, जिसने पूरी धरती को झकझोर दिया. इस युद्ध के पीछे कौरव और पांडव, जो कि एक ही कुल के सदस्य थे, की लड़ाई और सत्ता की महत्वाकांक्षा थी. 100 कौरव और 5 पांडव, परंतु क्या आपने कभी सोचा है कि एक ही मां से 100 कौरव कैसे जन्मे? इसका उत्तर महर्षि वेदव्यास और गांधारी की कथा में छुपा है.

पंडित इंद्रमणि घनस्याल बताते हैं कि हस्तिनापुर के राजा धृतराष्ट्र की पत्नी गांधारी लंबे समय तक संतानहीन रही थीं. तब उन्होंने महर्षि वेदव्यास का सत्कार किया. वेदव्यास ने उन्हें 100 पुत्रों का वरदान दिया और कहा कि समय आने पर वे मां बनेंगी.

दो साल तक रह गया था गर्भ, फिर हुआ विचित्र प्रसव

कथा के अनुसार, गांधारी का गर्भ 9 महीने के बजाय पूरे दो साल तक रहा. प्रसव के समय एक मांस का लोथड़ा उत्पन्न हुआ, जिससे गांधारी घबरा गई. तब वेदव्यास ने निर्देश दिया कि इस मांस के लोथड़े को 101 हिस्सों में विभाजित कर प्रत्येक को घड़ों में रखा जाए और घी से भरा जाए. राजा धृतराष्ट्र ने आदेश का पालन किया. दो साल बाद, इन घड़ों में से पहले दुर्योधन का जन्म हुआ. उसके बाद क्रमशः अन्य पुत्र जन्मे. कुल 101 घड़ों में से 100 बच्चों ने जन्म लिया और 101वें घड़े से एक कन्या उत्पन्न हुई, जिसे दुशाला कहा गया. वह 100 कौरवों की एकमात्र बहन थी.

दुर्योधन का जन्म और अपशकुन

दुर्योधन जन्मते ही विचित्र व्यवहार करने लगा. वह गधे की तरह रेंकता रहा, जिससे आसपास गधे, गीदड़, गिद्ध और कौए भी चिल्लाने लगे. आंधी चली और कई स्थानों पर आग लगी. यह देखकर विदुर ने राजा धृतराष्ट्र को चेताया कि यह पुत्र भविष्य में कुल का विनाश करेगा और उसका त्याग कर देना चाहिए. लेकिन पुत्र-स्नेह के कारण धृतराष्ट्र ऐसा नहीं कर सके.

वेदव्यास की आज्ञा और कौरवों का विकास

महर्षि वेदव्यास ने गांधारी से कहा कि मांस के लोथड़े को ठंडे पानी से धोकर कुंडों में रखो और दो साल बाद खोलो. इस प्रक्रिया के बाद हर कुंड से एक पुत्र का जन्म हुआ. सबसे पहले दुर्योधन, उसके बाद दु:शासन और अन्य 98 पुत्र जन्मे. यही कारण है कि गांधारी एक साथ 100 पुत्रों और 1 पुत्री की मां बनीं. दुर्योधन और उनके भाई महाभारत युद्ध के सबसे प्रमुख पात्र बने. दुर्योधन की महत्वाकांक्षा और अहंकार ने युद्ध को जन्म दिया. उनकी यह जन्म-कथा न केवल विचित्र है बल्कि यह भविष्य में होने वाली घटनाओं की पूर्वसूचना भी देती है.

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