क्यों नहीं सुनने चाहिए Sad Songs? रिलीफ नहीं बढ़ सकती है परेशानी
जब मन उदास होता है, तो अक्सर लोग ऐसे गाने सुनना पसंद करते हैं जिनमें दर्द और इमोशन्स हों. उन्हें लगता है कि ये गाने उनके मन का बोझ हल्का कर देंगे. लेकिन कई बार सैड सॉन्ग सुनना उल्टा असर कर सकता है.;
जब दिल थोड़ा उदास होता है, तो कई लोग सीधे प्लेलिस्ट में सैड सॉन्ग लगा लेते हैं. लगता है कि दर्द भरे गाने सुनकर मन हल्का हो जाएगा. लेकिन हर बार ऐसा नहीं होता. कई बार ये गाने आपको राहत देने के बजाय उसी उदासी में और गहराई तक धकेल देते हैं. धीरे-धीरे ये आदत मूड को संभालने की जगह उसे बिगाड़ने लगती है.
दुखभरे गाने दिमाग को बार-बार पुरानी यादों की ओर ले जाते हैं. इससे बेचैनी, थकान और चिंता बढ़ सकती है. इसलिए हर बार सैड सॉन्ग सुनना सही तरीका नहीं होता है. ऐसे में चलिए जानते हैं क्यों नहीं सुनने चाहिए सैड सॉन्ग्स.
बढ़ जाती है सैडनेस
सैड सान्ग सुनने से उदासी और बढ़ सकती है. अगर आप पहले से ही निराश या थके हुए महसूस कर रहे हैं, तो दुखभरे गाने उस इमोशन को और बढ़ा सकते हैं. मन हल्का होने के बजाय भारी होने लगता है. बेचैनी, घबराहट और थकान जैसी भावनाएं और तेज हो सकती हैं.
बार-बार नेगेटिव सोच
आपको यह जानकर हैरानी होगी कि दुखभरे गाने सुनने से सोच भी नेगेटिव होने लगती है.ऐसे गाने अक्सर दिमाग को पुराने दुख, फेलियर्स या रिश्तों की याद दिलाते हैं. नतीजा यह होता है कि व्यक्ति बार-बार उन्हीं बातों को सोचने लगता है. यह आदत मेंटल हेल्थ के लिए ठीक नहीं मानी जाती, क्योंकि इससे दिमाग एक नेगेटिव साइकिल में फंस सकता है.
पुरानी यादों में उलझना
दुखभरे गाने अक्सर बीते हुए पलों की याद दिलाते हैं. यह यादें कभी मीठी तो कभी बहुत तकलीफदेह हो सकती हैं. बार-बार उन पलों में लौटना आगे बढ़ने के प्रोसेस को धीमा कर देता है.
मूड संभालने का गलत तरीका
कई लोग तनाव या दुख से निपटने के लिए सैड सॉन्ग का सहारा लेते हैं. लेकिन यह तरीका हमेशा फायदेमंद नहीं होता. कभी-कभी यह आपको उसी मूड में अटका देता है, जिससे निकलना और मुश्किल हो जाता है.
कब हो सकता है ठीक?
हालांकि, सैड गानों का हर व्यक्ति पर असर अलग होता है. कुछ लोगों के लिए ऐसे गाने इमोशन बाहर निकालने का जरिया बन सकते हैं. उन्हें लगता है कि कोई उनकी भावनाओं को समझ रहा है, जिससे अकेलापन कम होता है. सही समय पर यह राहत भी दे सकता है.
सैड सॉन्ग सुनना गलत नहीं है, लेकिन जरूरत से ज्यादा सुनना आपके मूड पर नेगेटिव असर डाल सकता है. बेहतर है कि म्यूजिक का सेलेक्शन अपने मन के मिजाज को बेहतर बनाने के लिए किया जाए, न कि उसे और बोझिल बनाने के लिए.