बर्फ नहीं बारिश के दौरान क्यों पड़ते हैं ओले? आखिर क्या है इनके गोल होने का कारण
हाल ही में नोएडा-गुरुग्राम में बारिश के साथ-साथ ओले पड़े थे, जिसके कारण मौसम में ठंडक बढ़ गई, लेकिन क्या आपने सोचा है कि बारिश में बर्फ नहीं ओले क्यों पड़ते हैं और यह इतने ठोस कैसे होते हैं?;
इन दिनों उत्तर भारत में मौसम का मिजाज बदला हुआ है. कहीं बारिश हो रही है. इस दौरान कई बार आसमान से पानी की बूंदों के साथ बर्फ के छोटे-छोटे गोल टुकड़े भी गिरने लगते हैं, जिन्हें हम ओले कहते हैं. अक्सर लोगों के मन में सवाल उठता है कि बारिश के दौरान बर्फ की जगह ओले क्यों गिरते हैं? और जब ओले गिरते हैं, तो उनका आकार लगभग गोल ही क्यों होता है?
दरअसल, ओले गिरना सामान्य बारिश से बिल्कुल अलग मौसमीय प्रक्रिया का नतीजा है, जो तेज़ गरज वाले बादलों, ऊंचाई पर बेहद कम तापमान और बादल के अंदर ऊपर-नीचे होती तेज़ हवाओं से जुड़ी होती है.
कैसे बनते हैं ओले?
ओले सिर्फ साधारण बादलों में नहीं बनते, बल्कि बड़े और ऊंचे गरज वाले बादलों में बनते हैं, जिन्हें क्यूम्यूलोनिंबस बादल कहते हैं. ये बादल अक्सर तूफ़ान, बिजली और तेज बारिश लाते हैं. जब गर्म हवा जल्दी ऊपर उठती है, तो वह अपने साथ हवा में मौजूद पानी की बूंदें भी ऊपर ले जाती है. ऊपर की ओर तापमान बहुत ठंडा होता है, इसलिए ये बूँदें जमकर छोटे-छोटे बर्फ़ के टुकड़ों में बदल जाती हैं, जिसे ओले कहा जाता है.
बर्फ की परतें कैसे बनती हैं?
बादल के ऊपर के ठंडे हिस्से में जमी हुई बूंदें बहुत छोटे बर्फ़ के टुकड़े बनाती हैं. तेज़ हवा जो ऊपर की ओर उठती है, ये टुकड़े बादल के अंदर ऊपर-नीचे हिलाती रहती है. हर बार जब ये टुकड़े बादल के पानी वाले हिस्से से गुजरते हैं, तो उन पर नया पानी जम जाता है. फिर ये ऊपर जाते हैं, जहां यह पानी भी बर्फ़ में बदल जाता है. इस तरह कई परतों में बर्फ जमा होती है और धीरे-धीरे छोटे टुकड़े बड़े गोल ओले में बदल जाते हैं.
ओले का आकार गोल क्यों होता है?
आपने भी ध्यान दिया होगा कि ओले का आकार गोल ही होता है. दरअसल, जब बर्फ़ का टुकड़ा बादल के अंदर ऊपर-नीचे घूमता रहता है, तो उस पर हर तरफ से पानी जमता है. इससे वह धीरे-धीरे बराबर आकार में गोल बन जाता है. ठीक वैसे ही जैसे आप हाथ में बर्फ़ पकड़कर दबाएं, तो वह गोल हो जाती है.
ओले जमीन पर कब और क्यों गिरते हैं?
ओले जमीन पर तब गिरते हैं, जब यह बहुत भारी हो जाते हैं और तेज़ हवा उन्हें ऊपर नहीं रख पाती, तो वे जमीन की तरफ गिरने लगते हैं. नीचे आते समय अगर हवा गर्म हो, तो छोटे ओले पिघलकर पानी की बूंद बन जाते हैं. लेकिन बड़े और ठोस ओले पूरी तरह नहीं पिघलते और बर्फ़ के गोल टुकड़ों की तरह जमीन पर गिरते हैं.
ओले गिरते समय गरज और बिजली क्यों होती है?
ओले बनाने वाले बादल में एक हिस्सा बहुत ठंडा होता है और एक हिस्सा थोड़ा गर्म रहता है. इस ठंडा-गरम अंतर और तेज़ हवा की गति से बादल में बिजली जमा हो जाती है. यही वजह है कि बिजली चमकती है और गरज की आवाज़ आती है. इसलिए ओले अक्सर बिजली और गरज के साथ गिरते हैं.