क्या और कितना जानते हैं आप Gen X के बारें में? माना जाती है सबसे स्ट्रांग जनरेशन, जानिए खासियत, प्रभाव और Millennials से फर्क

Gen X वह पीढ़ी है जिसने एनालॉग से डिजिटल दुनिया का बदलाव देखा. आज यह कार्यबल, बिजनेस और परिवार तीनों मोर्चों पर सबसे ज्यादा जिम्मेदारियां निभा रही है.

( Image Source:  Create By AI )
Edited By :  रूपाली राय
Updated On : 23 Feb 2026 6:30 AM IST

जनरेशन एक्स जिसे जेन एक्स भी कहते हैं. एक ऐसी जनरेशन है जो ज्यादातर 1965 से 1980 के बीच पैदा हुई है. कुछ जगहों पर तारीखें थोड़ी अलग बताई जाती हैं जैसे- 1965-1979 या थोड़ा आगे-पीछे, लेकिन आम तौर पर यही मानी जाती है. आज (2025-2026 में) इन लोगों की उम्र लगभग 45 से 61 साल के बीच है. ये लोग बेबी बूमर्स (1946-1964) के बाद और मिलेनियल्स (1981-1996) से पहले वाली जनरेशन हैं. ये जनरेशन दुनिया में बड़े बदलावों के बीच बड़ी हुई है.

उन्होंने पर्सनल कंप्यूटर का घर-घर पहुंचना, इंटरनेट की शुरुआत, एमटीवी का जमाना, एड्स महामारी, और कई आर्थिक उतार-चढ़ाव. परिवारों में भी बदलाव आया. मां-बाप दोनों काम पर, तलाक ज्यादा, सिंगल पैरेंट घर इसलिए बहुत से जेन एक्स बच्चे स्कूल से घर लौटते तो घर खाली मिलता था. इन्हें 'लैचकी किड्स' (latchkey kids) कहा जाता था, क्योंकि वे खुद अपना ख्याल रखते थे. 

जेन एक्स की संख्या और प्रभाव कितना बड़ा है?

दुनिया की कुल आबादी में जेन एक्स का हिस्सा लगभग 17-19% है. लेकिन उनका प्रभाव बहुत ज्यादा है. अमेरिका में ये कार्यबल का करीब 31% हैं. ग्लोबल लेवल पर लीडरशिप की भूमिकाओं में जैसे CEO, मैनेजर इनका हिस्सा 50% से ज्यादा करीब 51% रहा है. ये लोग छोटे-मोटे बिजनेस के मालिक भी बहुत हैं अमेरिका में छोटे बिजनेस के लगभग 47% मालिक जेन एक्स वाले हैं. इन्हें कई नामों से जाना जाता है:

  • लैचकी जनरेशन (खुद से काम चलाने वाली)
  • एमटीवी जनरेशन (म्यूजिक वीडियो और पॉप कल्चर की वजह से)
  • स्लैकर (कभी-कभी आलसी कहे जाते थे, लेकिन ये व्यावहारिक थे)
  • बेबी बस्ट (कम बच्चों वाली पीढ़ी, क्योंकि जन्म दर घटी थी)
  • भुलाई हुई पीढ़ी (forgotten generation), क्योंकि मीडिया और चर्चा में बूमर्स या मिलेनियल्स पर ज्यादा फोकस होता है
  • जेन एक्स वाले लोगों की खास बातें क्या हैं?
  • ये लोग बहुत व्यावहारिक, स्वतंत्र, सूझबूझ वाले और अनुकूलनीय होते हैं. बचपन में अकेले रहने से उन्होंने कम उम्र में ही:
  • समस्याएं खुद सॉल्व करना सीखा
  • दिनचर्या खुद मैनेज करना
  • फैसले खुद लेना

क्या कहती है रिसर्च?

रिसर्च बताते हैं कि करीब 40% जेन एक्स वाले बच्चे स्कूल के बाद खाली घर लौटते थे. जिससे वे बहुत सेल्फडिपेंडेड बने. वे वर्कलाइफ बैलेंस को बहुत महत्व देते हैं. माता-पिता को काम में व्यस्त देखकर वे परिवार और पर्सनल लाइफ को प्राथमिकता देते हैं. वे थोड़े निराशावादी और संशयी भी हैं क्योंकि उन्होंने आर्थिक मंदी, कंपनी में छंटनी, संस्थाओं पर भरोसा टूटना देखा. वे दिखावे से ज्यादा गुणवत्ता, विश्वसनीयता और स्थिरता पसंद करते हैं. साइकोलॉजिकल स्टडीज में वे सेल्फ-कंट्रोलिंग में यंग जनरेशन से बेहतर स्कोर करते हैं. बहुत से लोग उद्यमी (एंट्रीप्रेनुरिअल) सोच रखते हैं. अपना बिजनेस चलाना या स्वतंत्र काम पसंद करते हैं. अब ये सैंडविच पीढ़ी (sandwich generation) कहलाते हैं क्योंकि कई लोग अपने बूढ़े माता-पिता की देखभाल करते हैं और साथ ही बच्चों छोटे या बड़े की जिम्मेदारी भी निभाते हैं. शोध से पता चलता है कि 40-59 साल के 54% लोग इस स्थिति में हैं इससे इन पर बहुत तनाव आता है. 

जेन एक्स को कैसे अट्रैक्ट करें?

जेन एक्स वाले लोगों को शामिल करने के लिए उनके अनुभव का सम्मान करें और उन्हें सपोर्ट दें:

  • फ्लेक्सिबिलिटी दें: हाइब्रिड काम, फ्लेक्सिबल टाइमिंग ताकि परिवार और काम दोनों संभल सके
  • मान्यता दें: अच्छे काम की तारीफ करें, प्रमोशन के मौके दें.  गैलप सर्वे से पता चला कि 2020 से उनकी एंगेजमेंट (काम में दिलचस्पी) 35% से घटकर 31% हो गई है, इसलिए उन्हें ज्यादा सराहना चाहिए
  • ट्रेनिंग दें: नई टेक्नोलॉजी और बदलावों में मदद करें, ताकि वे कॉन्फिडेंट रहें 

जेन एक्स और मिलेनियल्स में अंतर क्या हैं?

जेन एक्स एनालॉग (पुराने तरीके) से डिजिटल दुनिया में आए, जबकि मिलेनियल्स डिजिटल में ही पले. 

यहां आसान तुलना:

पहलू

जेन एक्स (Gen X)

मिलेनियल्स (Millennials)

काम करने का तरीका

स्वतंत्रता पसंद, कम निगरानी चाहिए

टीम वर्क, लगातार फीडबैक और सहयोग पसंद

टेक्नोलॉजी

करियर में बाद में सीखी, अनुकूलन किया

जन्म से डिजिटल, आसानी से इस्तेमाल करते हैं

करियर प्राथमिकता

स्थिरता, नौकरी की सिक्योरिटी, विकास का रास्ता

पर्पस, सीखने के मौके

कम्युनिकेशन्स 

फेस-टू-फेस, फोन, ईमेल पसंद

चैट, मैसेज, वीडियो कॉल जैसे तुरंत तरीके

वर्क-लाइफ बैलेंस

काम और घर को अलग-अलग रखना चाहते हैं

शेड्यूल से काम-जीवन मिक्स करना पसंद

खर्च करने की आदत

क्वालिटी पर फोकस, वैल्यू और रिलायबिलिटी 

एक्सपीरियंस, सुविधा, टेक-बेस्ड चीजों पर खर्च

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