दुनिया की सबसे महंगी Lipstick और 5000 साल का इतिहास, कामसूत्र से फिल्मों तक; कैसे पार्लियामेंट का बनी हिस्सा
लिपस्टिक का इतिहास 5000 साल पुराना है, जहां प्राचीन सभ्यताओं से लेकर रानियों और हॉलीवुड सितारों तक इसका खास महत्व रहा. आज यह सिर्फ मेकअप नहीं, बल्कि आत्मविश्वास और पहचान का प्रतीक बन चुकी है.;
दोस्तों, क्या आपने कभी सोचा है कि लिपस्टिक (Lipstick), जो आज महिलाओं की जिंदगी का इतना अहम हिस्सा बन चुकी है, उसकी शुरुआत कहां से हुई? लिपस्टिक सुनने में तो बहुत मॉडर्न लगती है, लेकिन इसका इतिहास हजारों साल पुराना है. यह सिर्फ होंठों को रंगने का साधन नहीं, बल्कि महिलाओं की खूबसूरती, कॉन्फिडेंस और पर्सनालिटी को निखारने का एक मैजिकल कॉस्मेटिक है. आज बाजार में हजारों ब्रांड्स हैं, जो रंग-बिरंगी लिपस्टिक बेचते हैं खासकर रेड लिपस्टिक, जो महिलाओं की सबसे पसंदीदा होती है.
लेकिन क्या आप जानते हैं कि दुनिया की सबसे महंगी लिपस्टिक कौन सी है? वो है 'कॉउचर ब्यूटी डायमंड लिपस्टिक', जिसकी कीमत 14 मिलियन डॉलर यानी करोड़ों रुपये है! जी हां, यह लिपस्टिक हीरे जड़ी हुई होती है और सिर्फ अमीरों के लिए बनी है. लेकिन आइए, हम इसकी शुरुआत से लेकर आज तक की पूरी कहानी को एक रोमांचक सफर की तरह जानते हैं.यह इतिहास इतना दिलचस्प है कि आपको लगेगा जैसे आप समय की मशीन में बैठकर पीछे जा रहे हैं.
जापान से लेकर मेसोपोटामिया तक, क्या कहता है इतिहास?
- लिपस्टिक का इतिहास करीब 5000 साल पुराना है, जब इंसान ने पहली बार अपने होंठों को रंगने का तरीका खोजा. उस जमाने में मेकअप सिर्फ महिलाओं तक सीमित नहीं था. पुरुष भी इसे इस्तेमाल करते थे, कभी दवा के रूप में, तो कभी स्टेटस दिखाने के लिए. प्राचीन सुमेरियन सभ्यता में, जो आज के इराक के आसपास थी, लोग कीमती पत्थरों को पीसकर पाउडर बनाते थे और उसे होंठों पर लगाते थे. यह उनके लिए एक तरह की लग्जरी थी. वहीं, फलों, पत्तियों और जड़ी-बूटियों को पीसकर भी नेचुरल कलर बनाए जाते थे, जो होंठों को नेचुरल ग्लो देते थे.
- भारत की सिंधु-सरस्वती सभ्यता में, जो 5000 साल से ज्यादा पुरानी है, महिलाएं गेरू (एक तरह की लाल मिट्टी) के छोटे-छोटे टुकड़ों को लिपस्टिक की तरह इस्तेमाल करती थीं. खुदाई में मिले अवशेष बताते हैं कि ये महिलाएं अपनी खूबसूरती पर कितना ध्यान देती थीं. ऑस्ट्रेलिया की आदिवासी महिलाएं भी गेरू से अपने मुंह को लाल रंग देती थीं, जो उनके संस्कृति का हिस्सा था. लेकिन सबसे हैरान करने वाली बात मिस्र की रानी क्लियोपेट्रा से जुड़ी है. क्लियोपेट्रा कीड़ों को मारकर उनके रस से होंठ लाल करती थी. जी हां, वो कोचिनील नाम के कीड़ों का इस्तेमाल करती थीं, जो गहरा लाल रंग देते थे. मिस्र में लिपस्टिक सिर्फ अमीर और शक्तिशाली महिलाओं के लिए थी यह उनकी रॉयल्टी का प्रतीक था.
- मेसोपोटामिया की महिलाएं तो और भी आगे थी. वे जमीन से निकले कीमती गहनों को पीसकर होंठों पर चमक लाती थी. एक रोचक कहानी है रानी शुब-अद की. जब उनकी कब्र खोदी गई, तो वहां मटके मिले, जिनमें लाल पत्थर और लेड का मिश्रण था. यह दुनिया का सबसे पुराना लिपस्टिक फॉर्मूला माना जाता है, जो ईसा से ढाई हजार साल पहले का है! मिस्रवासी लिपस्टिक बनाने में लेड, ब्रोमीन और आयोडीन जैसे खतरनाक पदार्थों का इस्तेमाल करते थे, लेकिन उन्होंने बैंगनी, सुनहरा और काला जैसे अनोखे शेड्स ईजाद किए. वे भेड़ के पसीने, मगरमच्छ के मल और कीड़ों से रंग निकालते थे सोचिए, कितना अनोखा और थोड़ा डरावना भी.
- जापान में भी महिलाएं पीछे नहीं थीं. वे स्टेटस बनाए रखने के लिए गहरे रंग की लिपस्टिक लगाती थीं, जो तार और बीवैक्स (मधुमक्खी का मोम) से बनती थी. यह उनके चेहरे को एक खास चमक देती थी. लेकिन ग्रीस में कहानी उल्टी थी. वहां लिपस्टिक को बुरा माना जाता था और इसे वेश्यावृत्ति से जोड़ा जाता था. कानून के मुताबिक, वेश्याओं को मर्दों को लुभाने के लिए गहरी लिपस्टिक लगानी पड़ती थी अगर नहीं लगातीं, तो सजा मिलती!.
- चीन में मोम वाली लिपस्टिक की शुरुआत हुई, जो 1000 साल पुरानी है. वे होंठों की नरम त्वचा को बचाने के लिए मोम का इस्तेमाल करते थे, ताकि रंग टिके और होंठ सूखें नहीं. भारत में प्राचीन काल में पान के पत्ते चबाकर होंठ लाल किए जाते थे या फिर घी में रतनजोत की सूखी पत्तियां मिलाकर मरहम बनाया जाता था, जो फटे होंठों को ठीक भी करता था. ये तरीके नेचुरल और घरेलू थे, जो आज भी कुछ जगहों पर इस्तेमाल होते हैं.
किसने किया बुलेट लिपस्टिक का अविष्कार?
अब आते हैं 8वीं-9वीं शताब्दी के मशहूर हकीम अबुल कासिम अल जहरावी पर. इन्हें 'फादर ऑफ मॉडर्न सर्जरी' कहा जाता है, क्योंकि उन्होंने सर्जरी के कई तरीके ईजाद किए. लेकिन क्या आप जानते हैं कि उन्होंने ठोस लिपस्टिक का आविष्कार भी किया? जी हां, उन्होंने लिपस्टिक को स्टिक के रूप में बनाया, जो आसानी से लगाई जा सके. यह एक क्रांतिकारी खोज थी, जो आज की लिपस्टिक की नींव बनी.
जब ब्रिटिश पार्लियामेंट पहुंची लिपस्टिक
लिपस्टिक की जिंदगी में हमेशा गुलाबी रंग नहीं रहा. कई जगहों पर इसे बैन किया गया. जैसे ग्रीस में क्योंकि इसे पहले प्रॉस्टिट्यूशन का हिस्सा माना जाता था. यूरोप में मध्य युग में लिपस्टिक लगाने वाली महिलाओं को डायन समझा जाता था. लोग कहते थे कि ऐसी औरतें खून पीती हैं! इसलिए वहां बैन था. ब्रिटिश पार्लियामेंट में तो एक बिल तक पेश हुआ, जिसमें कहा गया कि अगर कोई महिला शादी से पहले लिपस्टिक लगाती है, तो शादी अमान्य हो जाएगी. शुक्र है, इसे बाद में खारिज कर दिया गया और आज भी एक देश है जहां रेड लिपस्टिक पर बैन है उत्तर कोरिया! वहां लाल रंग को पूंजीवाद और व्यक्तिवाद से जोड़ा जाता है, यानी 'मैं सबसे बड़ा हूं' वाली सोच महिलाएं कोई भी रंग लगा सकती हैं, लेकिन लाल नहीं.
कैसे हॉलीवुड में आई मॉडर्न लिपस्टिक?
16वीं शताब्दी में इंग्लैंड की रानी एलिजाबेथ फर्स्ट ने लिपस्टिक को फैशन बनाया. उन्होंने मोम और फूलों के रंगों से बनी लिपस्टिक लगानी शुरू की. लेकिन तब भी यह सिर्फ रॉयल महिलाओं और एक्ट्रेसेज के लिए थी. 19वीं शताब्दी में फ्रांस की कंपनी 'गेर्ले' ने पहली बार बड़े पैमाने पर लिपस्टिक बनाई. पहले वे परफ्यूम बनाते थे, लेकिन हिरण की चर्बी, मधुमक्खी का मोम और कैस्टर ऑइल से लिपस्टिक बनाकर क्रांति ला दी. 1920 में मॉडर्न लिपस्टिक आई, और 1923 में जेम्स ब्रूस मेसन जूनियर ने 'स्विवेल अप ट्यूब' बनाई यानी आज की तरह घुमाकर निकलने वाली लिपस्टिक. सेकंड वर्ल्ड वॉर में महिलाओं का मनोबल बढ़ाने के लिए रेड लिपस्टिक को प्रमोट किया गया. हॉलीवुड एक्ट्रेसेज ने इसे ग्लोबल बनाया ग्रेस केली, मर्लिन मुनरो, ऑड्रे हेपबर्न और एलिजाबेथ टेलर. मर्लिन और एलिजाबेथ ने बोल्ड रेड लिप्स को ट्रेंड बनाया. 1950 के सर्वे में पता चला कि 60% लड़कियां लिपस्टिक इस्तेमाल करती हैं. 1952 में क्वीन एलिजाबेथ द्वितीय ने अपना कस्टम शेड 'द बालमोरल' बनवाया.
कामसूत्र में है लिपस्टिक जिक्र
कामसूत्र, जो भारत की प्राचीन किताब है, में भी लिपस्टिक का जिक्र है. वहां बताया गया है कि लाल लाख, मोम और फलों के रस से होंठ रंगने का तरीका. यह दिखाता है कि प्राचीन भारत में खूबसूरती कितनी जरुरी थी. दोस्तों, लिपस्टिक की यह कहानी सिर्फ रंगों की नहीं, बल्कि संस्कृतियों, क्रांतियों और महिलाओं की ताकत की है. आज लिपस्टिक हर महिला की पहुंच में है, जो उसे कॉन्फिडेंट बनाती है. क्या आपने कभी सोचा था कि एक छोटी सी स्टिक में इतना बड़ा इतिहास छिपा है? अगली बार लिपस्टिक लगाते हुए इसकी कहानी याद कीजिएगा – यह आपको और भी खूबसूरत लगेगी