शादी से पहले जान लें 3-6-9 फॉर्मूला, वरना बाद में हो सकता है पछतावा
रिलेशनशिप में जल्दबाजी कई बार बाद में बड़ी परेशानी बन जाती है. 3-6-9 नियम बताता है कि रिश्ते को समझने, परखने और भविष्य का फैसला लेने के लिए समय देना क्यों जरूरी है. शादी से पहले अगर इस फॉर्मूले को अपनाया जाए, तो गलत फैसलों और पछतावे से बचा जा सकता है.;
what is 3-6-9 formula
(Image Source: AI SORA )रिलेशनशिप की शुरुआत अक्सर फिल्मों जैसी लगती है, मीठी बातें, लंबी चैट, बिना वजह मुस्कान और हर मुलाकात में एक्साइटमेंट. इसी जोश में कई बार लोग साथ रहने, सगाई का या शादी करने जैसे बड़े फैसले ले लेते हैं. लेकिन कुछ महीनों बाद जब असली नेचर, आदतें और सोच सामने आती हैं, तो वही रिश्ता उलझनों में बदलने लगता है.
यहीं काम आता है एक दिलचस्प फॉर्मूला 3-6-9 नियम. यह कोई एस्ट्रोलॉजिकल कैलकुलेशन नहीं, बल्कि रिश्ते को समझदारी से आगे बढ़ाने का एक ‘पेसिंग गाइड’ है. अगर आपकी शादी होने वाली है, तो आपको यह रूल जानना चाहिए, ताकि फ्यूचर में पछताना न पड़े.
3 महीने हनीमून फेज
अगर आप शादी करने का फैसला ले रहे हैं, तो जान लें कि रिश्ते के पहले तीन महीने आमतौर पर “हनीमून फेज” माने जाते हैं. इस दौरान सब कुछ अच्छा लगता है. पार्टनर की हर बात प्यारी लगती है, खामियां भी क्यूट लगती हैं. लेकिन तीसरे महीने तक आते-आते दिमाग का केमिकल हाई (डोपामिन इफेक्ट) थोड़ा कम होने लगता है. अब आप सामने वाले को असल रूप में देखने लगते हैं, उसकी आदतें, सोच, व्यवहार और छोटे-मोटे दोष भी नजर आने लगते हैं. यही समय है खुद से पूछने का कि क्या मैं इस इंसान को उसके असली रूप में अपना सकता हूं.
6 महीने-असली टेस्ट, असली रिलेशन
छह महीने तक पहुंचते-पहुंचते रिश्ता ‘फन मोड’ से निकलकर ‘रियल मोड’ में आ जाता है. अब तक आप दोनों के बीच छोटे-मोटे झगड़े, मतभेद या टेंशन की कंडीशन आ चुकी होती हैं. यह फेज बताता है कि रिश्ता सिर्फ डेट, मूवी और सेल्फी तक सीमित है या आप दोनों मिलकर मुश्किल हालात भी संभाल सकते हैं. यहां सबसे अहम सवाल होता है कि क्या हम बहस के बाद भी एक-दूसरे को समझ पा रहे हैं, या सिर्फ इग्नोर कर रहे हैं?
9 महीने- बड़ा फैसला लेने का समय
नौ महीने के बाद आप अपने पार्टनर का लगभग हर रूप देख चुके होते हैं-गुस्सा, दुख, खुशी, आदतें, प्राथमिकताएं और लाइफ के गोल्स. अब रिश्ता ‘इमोशनल एक्साइटमेंट’ से निकलकर ‘प्रैक्टिकल समझ’ पर आ जाता है. यहीं तय होता है कि क्या आप दोनों की लाइफ वैल्यूज मिलती हैं? क्या भविष्य की सोच एक जैसी है? क्या यह रिश्ता लंबे समय तक चल सकता है? अगर जवाब हां है, तो रिश्ता अगले लेवल पर ले जाने का समय है. अगर नहीं, तो समय रहते फैसला लेना बेहतर है.
इस नियम का मकसद क्या है?
3-6-9 नियम का मकसद आपको जल्दबाजी से बचाना है. कई लोग कुछ ही हफ्तों में बड़े फैसले ले लेते हैं, साथ रहना, सगाई, या शादी की बात तक. बाद में पता चलता है कि वे एक-दूसरे को ठीक से जानते ही नहीं थे. यह नियम कहता है कि रिश्ता दिल से शुरू करें, लेकिन दिमाग से आगे बढ़ाएं. हर रिश्ता अलग होता है. कुछ लोग जल्दी समझ जाते हैं, कुछ को ज्यादा समय लगता है. 3-6-9 सिर्फ एक गाइड है, जो आपको रिश्ते को समय देने और समझने की सलाह देता है.