अपने पार्टनर से गंदी बातें करना सही या नहीं? जानें सीमा आनंद ने क्या कहा
सेक्स एजुकेटर और रिलेशनशिप एक्सपर्ट सीमा आनंद के एक बयान ने हाल ही में सोशल मीडिया पर नई बहस छेड़ दी है. उनसे सवाल किया गया कि क्या अपने पार्टनर से “गंदी बातें” करना सही माना जाता है? इस पर सीमा आनंद ने बेझिझक जवाब देते हुए कहा कि लोग जिन बातों को गंदा कहते हैं, वे असल में प्लेज़र और आपसी कनेक्शन से जुड़ी होती हैं.;
is it okay to talk dirty with your partner
(Image Source: AI SORA )अक्सर लोगों के मन में सवाल आता है कि क्या हमें अपने पार्टनर से प्लेज़र की बातें करनी चाहिए. कुछ इसे सही मानते हैं, तो कई का कहना है कि ये मोरल वैल्यूज के खिलाफ है, लेकिन इस पर हाल ही में सेक्स एजुकेटर और रिलेशनशिप एक्सपर्ट सीमा आनंद ने अपनी राय रखी है.
उनसे सवाल किया गया कि क्या अपने पार्टनर से “गंदी बातें” करना सही है? इस पर उन्होंने साफ कहा कि पार्टनर के साथ ऐसी बातें करनी चाहिए. सीमा आनंद के मुताबिक, लोग इन्हें गंदी बातें इसलिए कहते हैं क्योंकि समाज ने प्लेज़र से जुड़ी बातों को गलत नजर से देखना सिखा दिया है, जबकि असल में ये आनंद और आपसी जुड़ाव की बातें होती हैं.
‘गंदी बातें’ या प्लेज़र की भाषा?
सीमा आनंद का कहना है कि न जाने लोग इसे गंदी बातें क्यों कहते हैं. इस शब्द की बजाय प्लेज़र की बातें कहना चाहिए. दो अडल्ट पार्टनर अगर आपसी मंजूरी से अपने मन की इच्छाएं, पसंद-नापसंद और फीलिंग्स साझा करते हैं, तो इसमें कुछ भी गलत नहीं है. समस्या तब होती है जब समाज इन विषयों को टैबू बना देता है और खुलकर बातचीत को गलत ठहरा देता है.
पार्टनर से नहीं करेंगे तो किससे करेंगे?
सीमा आनंद ने यह भी कहा कि अगर आप अपने पार्टनर से प्लेज़र की बातें नहीं करेंगे, तो फिर किससे करेंगे? एक हेल्दी रिलेशनशिप में इमोशनल के साथ-साथ शारीरिक और मानसिक कनेक्शन भी जरूरी होता है. ऐसे में खुलकर बात करना रिश्ते को और मजबूत बना सकता है, बशर्ते दोनों की सहमति और कंफर्टेबल हो.
कब करनी चाहिए प्लेज़र की बातें?
हालांकि सीमा आनंद ने यह भी साफ किया कि प्लेज़र की बातें करना सही है, लेकिन हर बात का एक समय और जगह होती है. उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि अगर कोई खाना खाते हुए ऐसी बातें कर तो भला कौन सुनेगा?
प्लेजर की बातों में क्या है जरूरी?
पार्टनर से प्लेज़र की बातें तभी सही हैं, जब दोनों इसमें कंफर्टेबल हों. बिना सहमति की गई कोई भी बातचीत असहजता और दूरी पैदा कर सकती है. इसलिए जरूरी है कि एक-दूसरे की बाउंड्रिज को समझा जाए और किसी पर भी कुछ थोपने की कोशिश न की जाए. पार्टनर से प्लेज़र की बातें करना न तो गलत है और न ही शर्म की बात, अगर यह आपसी सहमति, सही समय और सही माहौल में हो. सीमा आनंद के बयान ने एक बार फिर यह सोचने पर मजबूर कर दिया है कि क्या हमें अब भी प्लेज़र से जुड़ी बातों को ‘गंदा’ कहकर नजरअंदाज करना चाहिए, या फिर इन्हें एक हेल्दी रिश्ते का हिस्सा मानना चाहिए.