International Women's Day: कभी-खुशी, कभी गम! एक औरत होना आखिर कैसा होता है?

एक औरत होना सिर्फ खुशियों की कहानी नहीं है और न ही सिर्फ संघर्षों की. इसमें कभी लाड़-प्यार मिलता है तो कभी छोटी-छोटी बातों पर यह याद दिला दिया जाता है कि आप “लड़की” हैं.

( Image Source:  AI SORA )
Edited By :  हेमा पंत
Updated On : 8 March 2026 6:30 AM IST

एक औरत होना कैसा होता है? अगर मुझसे कोई पूछे तो शायद मैं एक ही जवाब नहीं दे पाऊंगी. क्योंकि एक औरत होना सिर्फ खुशी नहीं है और सिर्फ दुख भी नहीं है. यह दोनों का मिला-जुला एहसास है- कभी-खुशी, कभी गम. मैं खुद एक लड़की हूं. दो भाइयों के बाद घर में इकलौती बेटी. बचपन से मुझे बहुत प्यार मिला, बहुत लाड़ मिला.

कई बार ऐसा लगा कि घर में सबसे ज्यादा खास मैं ही हूं. लेकिन इसी प्यार के बीच कई बार ऐसे पल भी आए जब मुझे यह एहसास दिलाया गया कि मैं “लड़की” हूं और बस यही शब्द कई बार बहुत कुछ बदल देता है.

जब लड़की होना खुशी देता है

सच कहूं तो लड़की होने के अपने बहुत खूबसूरत पहलू भी हैं. घर में इकलौती बेटी होने का मतलब है सबकी प्यारी होना. मां-पापा का खास ध्यान, भाइयों की सुरक्षा और परिवार का प्यार. मुझे याद है बचपन में अगर मैं जरा सा भी उदास हो जाती थी तो घर में हर कोई पूछने लगता था कि क्या हुआ? क्यों उदास हो? शायद यही वजह है कि मुझे हमेशा लगा कि लड़की होना भी एक खास जगह होना है.

कई बार मुझे कुछ कामों से भी बचा लिया जाता था. कहा जाता था “अरे रहने दो, ये मत करो.” उस समय लगता था कि कितना अच्छा है कि सब इतना ख्याल रखते हैं. लेकिन धीरे-धीरे समझ आने लगा कि यह कहानी का सिर्फ एक हिस्सा है.

‘तुम लड़की हो’

जिंदगी के कई छोटे-छोटे पल ऐसे होते हैं जब बिना वजह आपको याद दिला दिया जाता है कि आप लड़की हैं. जैसे कोई कह दे “तुम ही करोगी ये काम.” या “भाई को खाना तक नहीं दे सकती?” उस वक्त मेरे मन में एक ही सवाल आता है. क्या कभी भाई ने मुझे खाना दिया है? मुझे काम करने से कभी समस्या नहीं रही. घर का काम करना गलत भी नहीं है. लेकिन समस्या उस सोच से है, जहां काम को जिम्मेदारी नहीं बल्कि लड़की होने का कर्तव्य बना दिया जाता है. कई बार लगता है कि अगर वही काम कोई लड़का करे तो उसे “मदद” कहा जाता है, और अगर लड़की करे तो वह “फर्ज” बन जाता है.

सही होते हुए भी चुप रह जाना

औरत होने का एक और सच है. कई बार सही होने के बाद भी चुप रह जाना. कई बार ऐसा होता है कि आप जानते हैं कि आप सही हैं, लेकिन माहौल ऐसा बना दिया जाता है कि आप बोल नहीं पाते. या फिर बोलने पर आपको ही गलत ठहरा दिया जाता है. धीरे-धीरे हम सीख जाते हैं कि कुछ बातों पर चुप रह जाना ही बेहतर है. लेकिन सच यह भी है कि हर लड़की के अंदर कहीं न कहीं यह सवाल हमेशा रहता है क्यों?

आखिर एक औरत होना क्या है?

अगर आज मुझसे पूछा जाए कि एक औरत होना क्या है, तो मैं कहूंगी-  यह कभी-खुशी है, जब कोई आपकी बात समझ ले. यह कभी-गम है, जब आपको बिना वजह चुप करा दिया जाए. यह प्यार भी है, जिम्मेदारी भी है. यह ताकत भी है और संवेदनशीलता भी. लेकिन सबसे बड़ी बात  एक औरत होना किसी सीमा में बंधना नहीं, बल्कि अपनी पहचान बनाना है. और शायद यही वह बात है जिसे हर लड़की, हर औरत अपने तरीके से जीती है- हर दिन, हर पल.

Similar News