'UGC' जैसे काले कानून शिक्षित भारतीय युवा को तबाह करेंगे, लाखों काबिल सुंदर पिचाई भारत से बाहर चले जाएंगे?

यूजीसी के नए कानून को लेकर देश में आरक्षण और जाति राजनीति पर नई बहस छिड़ गई है. कनाडा में भारतीय मूल के वकील और दिल्‍ली पुलिस में कभी अपनी सेवाएं दे चुके मनीष देव मेहता का मानना है कि इससे भारत में ब्रेन ड्रेन और तेज हो सकता है.;

By :  संजीव चौहान
Updated On : 29 Jan 2026 3:29 PM IST

केंद्र में मौजूदा भारतीय जनता पार्टी की प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली हुकूमत द्वारा 13 जनवरी 2026 को लाया गया 'यूजीसी काला कानून' सिर्फ किसी एक का भविष्य चौपट नहीं करेगा. जिस तरीके से ‘सामान्य-वर्ग’ द्वारा इसके विरोध में बिगुल बजाया जाना शुरू हुआ है, उससे दिखाई देने लगा है कि इसके दूरगामी परिणाम बेहद घातक होंगे.

यह काला-कानून न केवल देश में पहले से ही जातियों को लेकर मचे बावेला को बढ़ाएगा. अपितु इस बार जो बदलाव किए गए हैं उनसे साफ है कि देश की हुकूमत ही चाहती है कि भारत के लोग वोट की राजनीति के लिए जातियों के फेर में फंसकर आपस में लड़ते-भिड़ते रहें. क्योंकि जब देश का नागरिक अपनी समस्याओं में उलझा रहेगा, तभी तो आमजन की उलझनों का नाजायज लाभ उठाकर देश को चौपट करने का मौका मतलबपरस्त नेताओं-सफेदपोशों को मिलेगा. इस नए बवाली कानून की अभी देश में कोई जरूरत ही नहीं थी. नेता तो अपने राजनीतिक स्वार्थ की रोटियां “सामान्य-आरक्षित” श्रेणियों को बांटकर आपस में भिड़ाकर पहले भी सेंक ही रहे थे.

कौन हैं एनआरआई मनीष देव मेहता

यह तमाम बेबाक बातें बेखौफ होकर बयान की हैं मनीष देव मेहता ने. मनीष भारत के ही मूल निवासी हैं और कई साल दिल्ली पुलिस में अधिकारी रह चुके हैं. करीब 15-20 साल पहले मनीष मेहता भारत की बेजा नीतियों से आजिज आकर दिल्ली पुलिस से इस्तीफा देकर कनाडा में जाकर बस गए. अब उन्हें व उनके परिवार को (पत्नी और दोनों बेटियों को) कनाडा की नागरिकता भी मिल चुकी है. अब कनाडा के मशहूर वकीलों में शुमार मनीष देव मेहता 28-29 जनवरी 2026 (भारतीय समय के अनुसार) देर रात नई दिल्ली में मौजूद स्टेट मिरर हिंदी के एडिटर क्राइम इनवेस्टीगेशन संजीव चौहान से एक्सक्लूसिव बात कर रहे थे.

एक सवाल के जवाब में भारती-कनाडाई (एनआरआई) नागरिक मनीष देव मेहता ने कहा, “भारत के युवा और भारत के भविष्य को बर्बाद करने के लिए किसी दूसरे देश या बाहरी दुश्मनों की जरूरत नहीं है. वहां (भारत) की ओछी राजनीति और स्वार्थ सिद्धि वाली घटिया नेतागिरी ही देश के भविष्य को तबाह करने के लिए काफी है. जहां तक मुझे ध्यान आ रहा है कि और इस बात को कई मर्तबा भारत की संसद में भी ऑन-रिकॉर्ड दर्ज किया जा चुका है कि हर साल भारत से लाखों लोग पलायन कर रहे हैं. अगर सच यह है और भारतीय हुकूमत इस सच को खुद ही स्वीकारती है तो फिर सवाल यह पैदा होता है कि भारत के लोग भारत में न रहकर वहां से पलायन क्यों कर रहे हैं? इस सवाल का जवाब तो हिंदुस्तानी हुकूमत को सोचकर अविलंब इस बिकट समस्या का समाधान खोजना चाहिए न.”

युवाओं पर घटिया राजनीति हावी

स्टेट मिरर हिंदी के सवालों के जवाब देते हुए भारत-कनाडाई मूल के नागरिक और कनाडा के मशहूर वकीलों में शुमार दिल्ली पुलिस के पूर्व अधिकारी मनीष देव मेहता बोले, “मुझे लगता है कि भारत की सरकार में बैठे लोग अपने स्वार्थ के लिए भारत और भारत के शिक्षित युवा के भविष्य को तबाह करने में कतई नहीं शरमा रहे हैं. आज भी अंतरराष्ट्रीय नजरिए से देखूं तो विदेशों में जिन भारतीय युवाओं को हाथों-हाथ ले लिया जाता है. उन्हीं की काबिलियत भारतीय हुक्मरानों को नजर नहीं आती आखिर क्यों? इससे नुकसान किसका है? देश का ही तो नुकसान है न. नेताओं की मतलबपरस्ती की घटिया राजनीति में देश और देश का युवा-भविष्य ही तो तबाह हो रहा है.” 13 जनवरी 2026 से पहले तक भारत में सब-कुछ शांति से ढर्रे पर चल रहा था. वहां की सरकार को शांति पसंद नहीं आती है. तो उसने अब एक नया शिगूफा जनमानस में यूजीसी के जरिए उछलवा दिया. जिसे भारत में सामान्य वर्ग के लोग “ब्लैक-कानून” बता रहे हैं. इसको लेकर सुना है सामान्य श्रेणी और आरक्षित श्रेणी का युवा फिर सड़कों पर उतरकर धरना-प्रदर्शन में व्यस्त हो गया है.

इसमें कनाडा, रूस चीन क्या करेंगे

सोचिए जिस देश की सरकार और वहां का नेता ही जब पढ़े लिखे बेरोजगार युवाओं को “कौम-जाति-पांति” की ओछी राजनीति की आग में झोंकने पर उतारू हो तो उस देश का भविष्य भला अमेरिका, रूस, चीन, कनाडा या ऑस्ट्रेलिया जैसे विकसित देश भी कैसे संवार या बचा सकते हैं? जो हाल इन दिनों भारत में शिक्षित युवाओं का किया जा रहा है या हो रहा है, उससे वह दिन दूर नहीं लगता मुझे जब भारत का काबिल-होनहार युवा बड़े स्तर पर अचानक ही बड़ी तादाद में देश से पलायन शुरू कर दे. जैसे कि सुंदरराजन पिचाई जिन्हें दुनिया आज सुंदर पिचाई के नाम से जानती-पहचानती है.

हमारी प्रतिभाओं से विदेशियों को लाभ

आज जहां भारत में मौजूद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की केंद्र में मौजूद भारतीय जनता पार्टी की सरकार यूजीसी के कंधे पर बंदूक रखकर सामान्य वर्ग और आरक्षित वर्ग के बीच भारत में अघोषित आपसी लड़ाई करवाने में मशरूफ है. तो ऐसे में मैं यहां इस घटिया ओछी भारतीय राजनीति के बीच सुंदर पिचाई जैसे नामचीन भारतीय युवा का जिक्र सिर उठाकर करना चाहता हूं. जिन्होंने एक उच्च शिक्षित होने के बाद भी अपने ही देश भारत में अपने लिए शायद किसी मजबूत भविष्य पाने की उम्मीद खो दी होगी. तभी उन्होंने भारत जैसे अपने विशाल लोकतांत्रिक देश से पलायन करके विदेश का रुख किया. इसमें सुंदर पिचाई जैसी भारत की अद्दभूत युवा प्रतिभा या कहिए ऐसी काबिलियत का भारत में ओछी राजनीति की बैसाखियों पर घिसटने वाले नेताओं ने क्या बिगाड़ लिया? भारत में जिन सुंदर पिचाई को अपनी काबिलियत की नजर से अपना भविष्य नजर नहीं आया आज उन्हीं बिरले सुंदर पिचाई की काबिलियत का इस्तेमाल अमेरिका कर रहा है न.

भारतीय नेता अपने गाल-तालियां बजा रहे

भारत के मतलबपरस्त नेता-मंत्री भले ही “स्वत: शांति सुखाय” के लिए आज अपनी अपनी राजनीतिक कुर्सियों पर बैठकर खुद ही अपने गाल या अपनी तालियां बजा रहे हों यह कहकर कि, “देखो भारत के सुंदर पिचाई ने देश का नाम विदेश में रोशन कर दिया है. गूगल और उसकी पैरेंट कंपनी अल्फाबेट इंक का चीफ एग्जीक्यूटिव अफसर यानी सीईओ बनकर. मगर हमारे नेता-मंत्री और सरकारों को इस बात पर शर्म क्यों नहीं आती है कि भारत के मदुरै तमिलनाडु में जन्मे आईआईटी खड़गपुर के बीटेक पासआउट और फिर स्टैनफोर्ड विवि (एमएस) व पेंसिल्वेनिया विवि से एमबीए करने वाले सुंदर पिचाई भारत छोड़कर विदेश चले गए. और विदेश उनकी काबिलियत का लोहा मानकर अपने देश को निरंतर तीव्र गति से आगे बढ़ाने में सुंदर पिचाई का बेहतर उपयोग कर रहे हैं. यह काम सुंदर पिचाई को भारत में भारतीय हुकूमतों ने मौका देकर क्यों नहीं कर लिया जो अमेरिका या अमेरिकन कंपनी गूगल ने सुंदर पिचाई को अपने साथ जोड़कर किया.”

भारतीयों को विदेश में इज्जत

कनाडा में मौजूद वहां के नामी वकील और दिल्ली पुलिस के पूर्व अधिकारी मनीष देव मेहता एक सुंदर पिचाई का ही नहीं और भी तमाम ऐसे भारतीयों के नाम गिनाते हैं जिनकी भारत में वहां की सरकारों नेता-मंत्रियों ने कोई इज्जत नहीं की. जब ऐसे काबिल (सुंदर पिचाई जैसे) युवा अपने देश (भारत) में युवाओं के डूबते या तबाह होते भविष्य को देखकर भारत से पलायन करके विदेश में आकर नाम रोशन करते हैं. तब भारत के वाहियात नेता-मंत्री जिन्हें सिर्फ अपनी राजनीति और कुर्सी के सिवाए कुछ और नजर ही नहीं आता है, वे भारत की संसद-राज्यसभा और सरकारी दफ्तरों में सुंदर पिचाई जैसे पलायन कर चुके भारत के युवाओं का, भारत में बाकी बचे होनहार युवाओं को उदाहरण देते नहीं थकते हैं कि देखो सुंदर पिचाई ने विदेश में जाकर भारत का नाम कैसे रोशन किया है? यह सोचने और कहने-राग अलापने वाले भारत के नेताओं को शर्म इस बात पर आनी चाहिए कि सुंदर पिचाई आखिर अपना देश छोड़कर विदेश क्यों चले गए?

भारत के नेता-मंत्री घाघ हैं

यह सवाल भारत के नेता मंत्री इसलिए जान-बूझकर नहीं उठाते हैं कि क्योंकि इससे तो वे यानी भारत के नेता-मंत्री और वहां की घटिया राजनीति ही नंगी हो जाएगी न. क्योंकि सुंदर पिचाई जैसे होनहार भारतीय देश से पलायन से भारत की घटिया नीतियों के चलते ही करते हैं न. अभी हाल ही में ले लीजिए शर्मनाक नमूने के बतौर जिसमें भारत सरकार ने यूजीसी कानून की आड़ लेकर 13 जनवरी 2026 को बे-वजह जो बदलाव करवा कर फिर से देश के युवा के बीच जाति-कौम सामान्य-आरक्षित श्रेणी की लड़ाई छिड़वाकर “धरना प्रदर्शन” में युवा को झोंक दिया. सुंदर पिचाई या उनके जैसे और भी वे सैकड़ों-हजारों युवा भारत में होते जो कालांतर में भारत से पलायन करके आज विदेशों में नाम-दाम कमा रहे हैं, तो आज वह भी सरकार द्वारा आए-दिन छेड़ी जाने वाली जाति-पांति आरक्षण की सड़क-छाप ह़क की लड़ाई में अपनी-अपनी जीत के लिए धरना-प्रदर्शन करके खुद के भविष्य को तबाह कर रहे होते.

भारत के भविष्य को तबाह करती ‘राजनीति’

जहां तक सवाल 13 जनवरी 2026 को भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा यूजीसी की आड़ लेकर लाए गए नए काले-कानून की बात है, तो यह सिर्फ और सिर्फ वोट की घटिया राजनीति है. जिसमें आमजन खासकर भारत का युवा शिक्षित-बेरोजगार भविष्य ही पिसकर अंधकार के गर्त में ढकेला जा रहा है. सरकार ने तो यूजीसी से कानून बनवा डाला. इसका सीधा विपरीत असर किसके ऊपर जा रहा है. उन्हीं के ऊपर न जो इस कानून के विरोध और पक्ष में सड़कों पर उतर आए हैं. क्या हासिल होगा इस तरह के धरना प्रदर्शनों से भारत के युवाओं को सिवाए अपना भविष्य खराब करने के. दुनिया के तमाम विकसित देशों की हुकूमत और हुक्मरान इस बात के उदाहरणों से भरे पड़े हैं कि उनके देश के युवा का भविष्य उज्जवल हो.

अमेरिका, रूस, चीन से सीखे भारत

अमेरिका, रूस, चीन, कनाडा, जापान, जर्मनी जैसे देश आज भी अपने युवा को मजबूत करने की नीतियां बनाने पर ही दिन रात जूझते रहते हैं. एक भारत है कि जहां नेता अपनी अपनी सत्ता और कुर्सी बचाए रखने की घटिया सोच की आग में भारत के भविष्य यानी शिक्षित युवा को ‘रिजर्वेशन’ की आग में झोंकने पर आमादा बैठा है. भारत के युवा और भारत का भविष्य ‘रिजर्वेशन’ से नहीं ‘मैरिट’ के आधार पर आगे बढ़ने-बढ़ाने से मजबूत और उज्जवल होगा. जाति-पांति, ऊंच-नीच, आरक्षित-अनारक्षित की ओछी राजनीति से सिर्फ और सिर्फ भारत के मतलबपरस्त नेता-मंत्री-हुक्मरानों और ब्यूरोक्रसी का ही भविष्य उज्जवल हो सकता है.

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