उधार लेकर शुरू किया था धंधा, अब हजारों करोड़ का साम्राज्य, कौन हैं गलगोटिया यूनिवर्सिटी के मालिक सुनील गलगोटिया?

गलगोटिया यूनिवर्सिटी की एआई समिट में काफी फज़ीहत हुई. इस यूनिवर्सिटी के मालिक का नाम सुनील गलगोटिया है, जिन्होंने कभी उधार लेकर अपने बिज़नेस की शुरुआत की थी और आज वह करोड़ों के मालिक हैं.;

( Image Source:  X- @AparichitBabu )
Edited By :  समी सिद्दीकी
Updated On : 19 Feb 2026 12:50 PM IST

Who is Suneel Galgotia: ग्रेटर नोएडा स्थित Galgotias University इन दिनों एक विवाद को लेकर चर्चा में है. आरोप है कि दिल्ली में आयोजित AI एक्सपो में विश्वविद्यालय ने चीन में बनी Unitree कंपनी के रोबोटिक डॉग को अपनी इनोवेशन के तौर पर दिखाया. इस दावे के सामने आने के बाद सोशल मीडिया और दूसरे मंचों पर इसकी आलोचना शुरू हो गई.

रिपोर्ट्स के मुताबिक, विवाद बढ़ने पर अधिकारियों ने विश्वविद्यालय से अपना स्टॉल खाली करने के लिए कहा. बाद में स्टाफ और छात्रों को पवेलियन हटाते हुए देखा गया. यह भी बताया गया कि स्टॉल की बिजली काट की गई थी. इसके बाद यूनिवर्सिटी ने अपना स्टॉल वहां से हटा लिया. जिस वक्त गलगोटिया यूनिवर्सिटी को ट्रोल किया जा रहा है, उसी वक्त सुनील गलगोटिया का नाम भी सामने आ रहा है. आइये जानते हैं सुनील गलगोटिया?

कौन हैं सुनील गलगोटिया?

सुनील गलगोटिया ट्रोल हो रही यूनिवर्सिटी के मालिक हैं. उन्होंने अपनी पढ़ाई Shri Ram College of Commerce से पूरी की है. सुनील ने अपने करियर की शुरुआत 1980 के दशक में एक पब्लिशिंग बिजनेस से की थी. मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, अपनी पहली किताब प्रकाशित करने के लिए उन्होंने करीब 9,000 रुपये उधार लिए थे. लेकिन उनका ये काम ज्यादा वक्त तक नहीं चला. आज सुनील गलगोटिया का कारोबार 3 हजार करोड़ पहुंच गया है.

सुनील ने साल 2000 में मात्र 40 छात्रों के साथ Galgotias Institute of Management and Technology (GIMT) की स्थापना की थी. धीरे-धीरे इस संस्थान को पहचान मिली और छात्रों की संख्या बढ़ती गई. साल 2011 में उत्तर प्रदेश सरकार ने इसे यूनिवर्सिटी का दर्जा दिया, जिसके बाद Galgotias University की स्थापना हुई. इस यूनिवर्सिटी के चांसलर सुनील गलगोटिया हैं वहीं इसके CEO डॉ ध्रुव गलगोटिया हैं.

ट्रोल होने पर यूनिवर्सिटी ने क्या कहा?

यूनिवर्सिटी के स्कूल ऑफ बिजनेस की कम्युनिकेशन विभागाध्यक्ष प्रोफेसर नेहा सिंह ने पूरे विवाद पर सफाई देते हुए कहा कि बात को सही तरह से पेश नहीं किया जा सक. उनका कहना था कि रोबोटिक डॉग को लेकर गलतफहमी पैदा हुई और यह स्पष्ट कर देना चाहिए कि इसे यूनिवर्सिटी ने तैयार नहीं किया है.

मीडिया से बातचीत में उन्होंने कहा कि शायद पेशकश के दौरान बात साफ नहीं हो पाई. उन्होंने कहा,"हो सकता है मेरी बात ठीक से समझी नहीं गई. कभी-कभी एक ही चीज़ अलग नजरिए से अलग दिखाई देती है. समय कम था, इसलिए मैं पूरी तरह विस्तार से समझा नहीं पाई, और शायद आप लोगों ने भी पूरा धैर्य नहीं रखा."

कैसे शुरू हुआ था विवाद?

AI समिट के दौरान जिस रोबोटिक डॉग को ‘Orion’ नाम से पेश किया गया, उसे लेकर सवाल यहीं से उठने लगे. एक वायरल वीडियो में स्कूल ऑफ बिजनेस की कम्युनिकेशन विभागाध्यक्ष नेहा सिंह इसे यूनिवर्सिटी के ₹350 करोड़ के एआई प्रोजेक्ट का हिस्सा बताती नजर आती हैं. वीडियो में वह कहती हैं कि यह रोबोट कैंपस में निगरानी कर सकता है.

हालांकि बाद में हुई तकनीकी जांच में सामने आया कि दिखाया गया रोबोट दरअसल 'Unitree Go2' मॉडल है. यह चीन में निर्मित एक कमर्शियल रोबोटिक डॉग है, जिसे अंतरराष्ट्रीय बाजार में लगभग 2,800 डॉलर (करीब ₹2.3 लाख) में खरीदा जा सकता है. यहीं से यह बहस तेज हो गई कि क्या प्रस्तुति के दौरान रोबोट की असल पहचान स्पष्ट की गई थी.

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