चुनाव से ठीक पहले मुफ्त योजनाएं क्यों, ये कैसी संस्कृति है? ‘फ्रीबीज’ पर सुप्रीम कोर्ट की सख्ती- 10 बड़ी बातें

चुनाव से पहले घोषित मुफ्त योजनाओं पर सुप्रीम कोर्ट की सख्ती. शीर्ष अदालत ने राज्यों से पूछा - वित्तीय तैयारी कहां है? जानिए सुनवाई की 10 बड़ी बातें.;

( Image Source:  Sora AI )
Edited By :  धीरेंद्र कुमार मिश्रा
Updated On : 19 Feb 2026 3:39 PM IST

चुनाव से ठीक पहले राज्यों द्वारा घोषित की जा रही मुफ्त योजनाओं पर अब न्यायपालिका ने सख्त रुख अपनाया है. सुप्रीम कोर्ट ने ‘इर्रेस्पॉन्सिबल फ्रीबीज’ को लेकर राज्यों को चेताया कि बिना वित्तीय तैयारी के की गई घोषणाएं देश की अर्थव्यवस्था और सार्वजनिक संस्थानों पर भारी पड़ सकती हैं. अदालत ने तमिलनाडु सरकार से सवाल किया कि मुफ्त बिजली योजना आखिरी समय में क्यों घोषित की गई, जिससे बिजली वितरण कंपनियों को टैरिफ और बजट में भारी उलटफेर करना पड़ा.

पीठ ने कहा कि कई राज्य पहले से राजस्व घाटे में हैं, ऐसे में बड़ी सब्सिडी योजनाएं कैसे चलाई जाएंगी, यह स्पष्ट होना चाहिए. अदालत ने यह भी पूछा कि अगर सीधे नकद सहायता दी जाएगी, तो क्या लोग काम करने की प्रेरणा खो देंगे. मुख्य न्यायाधीश सूर्य कांत ने कहा कि जरूरतमंदों की मदद जरूरी है, लेकिन अमीर और गरीब में फर्क किए बिना लाभ देना नीति नहीं, तुष्टीकरण बन सकता है.

सुनवाई की 10 बड़ी बातें क्या?

1. कोर्ट ने कहा कि बिना वित्तीय योजना के घोषित की गई मुफ्त योजनाएं सार्वजनिक खजाने पर बोझ डालती हैं और दीर्घकालिक आर्थिक विकास को नुकसान पहुंचा सकती हैं.

2. अदालत ने पूछा कि मुफ्त बिजली योजना चुनाव से ठीक पहले क्यों लाई गई, जिससे DISCOMs को अचानक टैरिफ और बजट बदलने पड़े.

3. पीठ ने कहा कि कई राज्य पहले से घाटे में हैं, ऐसे में भारी सब्सिडी योजनाएं चलाना वित्तीय अनुशासन के खिलाफ है.

4. कोर्ट ने नोट किया कि कई राज्यों में हालिया चुनावों से ठीक पहले नई कल्याण योजनाएं घोषित की गईं, जो नीति से ज्यादा राजनीति लगती हैं.

5. अदालत ने पूछा कि अगर सीधे नकद ट्रांसफर योजनाएं बढ़ेंगी, तो क्या लोगों की काम करने की इच्छा कमजोर नहीं पड़ेगी.

6. अचानक सब्सिडी से बिजली वितरण कंपनियां सही टैरिफ तय नहीं कर पातीं, जिससे उनकी वित्तीय स्थिरता खतरे में पड़ती है.

7. कोर्ट ने कहा कि टैरिफ तय करने का काम ट्रिब्यूनल और वितरण कंपनियों का है, सरकार के आखिरी समय के फैसले प्रक्रिया बिगाड़ते हैं.

8. मुख्य न्यायाधीश ने कहा कि यह समस्या सिर्फ एक राज्य की नहीं, बल्कि पूरे देश में ‘फ्रीबीज राजनीति’ का ट्रेंड बन चुका है.

9. कोर्ट ने स्पष्ट किया कि कल्याण योजनाओं में पात्रता तय होनी चाहिए, वरना सक्षम लोगों को भी मुफ्त देना नीति नहीं कहा जा सकता.

10. अदालत ने चेताया कि जरूरतमंदों की मदद अलग बात है, लेकिन बिना भेदभाव के लाभ देना तुष्टीकरण की नीति जैसा हो सकता है.

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