चाइनीज रोबो डॉग के बाद अब पेश है गलगोटिया का थर्माकोल ड्रोन! आपका 6 मेरा 9 हो सकता है...बोलने वाली नेहा सिंह कौन?
Galgotias University AI Summit Controversy: गलगोटिया यूनिवर्सिटी ने इंडिया AI समिट में चीनी रोबोट और थर्माकोल वाला ड्रोन को अपनी इनोवेशन बताया, वीडियो वायरल होने के बाद यूनिवर्सिटी एक्सपो से निकाली गई.
India AI Impact Summit में चीइनीज रोबोडॉग को लेकर गलगोटिया यूनिवर्सिटी का बवाल थमने का नाम नहीं ले रहा. दुनिया भर में थू-थू होने के बाद ये यूनिवर्सिटी की तरफ से तमाम ऐसे बयान आ रहे हैं जिन्हें सुनकर एक बार तो अपना ही सिर पीट लेने का मन करे. जी हां, सोशल मीडिया से लेकर हर जगह बवाल मचने के बाद मरता क्या न करता वाली कहावत को सही साबित करते हुए यूनिवर्सिटी की तरफ से लगातार बयान आ रहे हैं.
चीनी रोबोट और थर्माकोल ड्रोन को अपने प्रोजेक्ट बताने वाली गलगोटिया यूनिवर्सिटी को इंडिया AI इम्पैक्ट समिट के एक्सपो से बाहर कर दिया गया. आयोजकों ने पहले यूनिवर्सिटी के पवेलियन की बिजली काटी, फिर ताला लगाकर सुरक्षा बैरिकेडिंग की. यह कार्रवाई उस वायरल वीडियो के बाद हुई, जिसमें यूनिवर्सिटी ने एक चाइनीज रोबोटिक डॉग और कोरियाई ड्रोन को अपनी इनोवेशन के रूप में पेश किया था.
यूनिवर्सिटी ने जल्दबाजी में बयान जारी किया कि उन्होंने कभी दावा नहीं किया कि रोबोट उनका खुद का निर्माण है. बावजूद इसके, यह घटना सरकारी और राजनीतिक आलोचना का विषय बन गई, जिसमें विपक्ष ने सवाल उठाया कि आखिर राष्ट्रीय AI समिट में चीनी उत्पाद को कैसे भारतीय इनोवेशन के रूप में प्रदर्शित किया गया.
नेहा सिंह का रिएक्शन क्या?
यूनिवर्सिटी के स्कूल ऑफ बिजनेस में कम्युनिकेशन विभाग की हेड ऑफ डिपार्टमेंट प्रोफेसर नेहा सिंह ने इस तमाम विवाद पर जो सफाई दी है वो गले नहीं उतरती. उनका कहना है कि 'मैं शायद इसे सही तरीके से बता नहीं पाई. रोबोट डॉग के बारे में यह स्पष्ट होना चाहिए कि इसे हमने नहीं बनया. उन्होंने मीडिया से बात करते हुए कहा कि ''कहां थोड़ी सी चूकी हुई है क्योंकि आपका 6 मेरा 9 हो सकता है. समय के अभाव के कारण शायद में सही से नहीं बता पाई और आप लोगों ने भी पूरा धैर्य नहीं दिया.''
तो मैडम, एक बात बताइए, जिस काम की जिम्मेदारी आपको दी गई थी, जब वही आपने ठीक से नहीं किया तो मीडिया को दोष कैसे दे सकती हैं. क्या आपने भी बस चैट जीपीटी से स्क्रिप्ट लिखवाकर पढ़ दी थी?
विवाद का सिलसिला कैसे शुरू हुआ?
क्या गलगोटिया यूनिवर्सिटी ने सच में रोबोट को अपने इनोवेशन के रूप में पेश किया? समिट में रोबोटिक डॉग को 'Orion' के नाम से पेश किया गया. वायरल वीडियो में नेहा सिंह कहती हैं कि यह यूनिवर्सिटी के ₹350 करोड़ AI प्रोजेक्ट के तहत विकसित किया गया है और यह स्वायत्त रूप से परिसर में निगरानी कर सकता है. लेकिन, तकनीकी जांच में यह सामने आया कि यह रोबोट Unitree Go2 है, जो चीन में निर्मित और आसानी से $2,800 (लगभग ₹2.3 लाख) में खरीदा जा सकता है.
गलगोटिया यूनिवर्सिटी ने अपनी स्थिति कैसे स्पष्ट की?
यूनिवर्सिटी ने बयान जारी किया कि गलगोटिया ने इस रोबोट को नहीं बनाया है, न ही हमने कभी ऐसा दावा किया है. हमारे छात्र इसका प्रयोग कर रहे हैं, इसकी सीमाओं को परख रहे हैं और इसी प्रक्रिया में अपनी जानकारी बढ़ा रहे हैं." लेकिन X (पूर्व ट्विटर) पर एक कम्युनिटी नोट ने दावा किया कि समिट में रोबोट को स्पष्ट रूप से यूनिवर्सिटी द्वारा विकसित बताया गया. इस पर एक चीनी लिंक्ड X अकाउंट ने भी पोस्ट किया कि 'एक भारतीय विश्वविद्यालय ने दिल्ली में आयोजित AI समिट में चीनी रोबोट Unitree Go2 को अपनी खुद की इनोवेशन के रूप में पेश किया.
यूनिवर्सिटी का मुख्य मकसद क्या था?
नेहा सिंह ने साफ किया कि रोबोट को छात्रों को प्रेरित करने और उन्हें वैश्विक AI टूल्स से परिचित कराने के लिए पेश किया गया. यूनिवर्सिटी का फोकस छात्रों को व्यावहारिक कौशल देना और AI में प्रयोग करने के अवसर प्रदान करना है.
कौन है नेहा सिंह, जिन्होंने खड़ा किया ये बखेड़ा?
नेहा सिंह गलगोटिया यूनिवर्सिटी के स्कूल ऑफ़ बिज़नेस में कम्युनिकेशन्स विभाग की हेड हैं. विवाद के बाद उन्होंने साफ किया कि वह तकनीकी फैकल्टी का हिस्सा नहीं हैं और रोबोट के विकास की तकनीकी जानकारी उनके पास नहीं थी. पीटीआई से बातचीत में उन्होंने कहा कि 'मैं रोबोट डॉग के निर्माण का दावा करने का कोई इरादा नहीं था. मेरा उद्देश्य केवल छात्रों को प्रेरित करना और उन्हें आधुनिक AI तकनीकों से परिचित कराना था.' उन्होंने यह भी माना कि समिट में उनके उत्साहित अंदाज़ और तेज़ गति में दिया गया परिचय गलतफहमी का कारण बन सकता है.
बात करें नेहा की तो नवंबर 2023 में गलगोटिया यूनिवर्सिटी में शामिल हुईं. इससे पहले शारदा यूनिवर्सिटी, ग्रेटर नोएडा में असिस्टेंट प्रोफ़ेसर और करियर लॉन्चर में वर्बल एबिलिटी मेंटर रही हैं. MBA: देवी अहिल्या विश्वविद्यालय, 2006. B.Com: इलाहाबाद विश्वविद्यालय.
विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने कहा कि भारत के टैलेंट और डेटा का सही इस्तेमाल नहीं हो रहा; यह AI समिट अब एक पीआर तमाशा बन गया है, जहां चीन के उत्पादों का दिखावा किया जा रहा है और भारत का डेटा बिकने के लिए रखा गया है.
गलगोटिया यूनिवर्सिटी ने विवाद से बाद मांगा माफी
चीनी निर्मित रोबोडॉग को लेकर हुए विवाद के बाद गलगोटिया यूनिवर्सिटी ने आधिकारिक प्रेस बयान जारी कर सफाई दी है. यूनिवर्सिटी ने अपने बयान में समिट के दौरान हुई “गलतफहमी” के लिए खेद जताया और इसे एक प्रतिनिधि की जानकारी की कमी से जुड़ा मामला बताया. बयान में कहा गया कि 'हम, गलगोटिया यूनिवर्सिटी में, हाल ही में आयोजित AI समिट में उत्पन्न हुई भ्रम की स्थिति के लिए गहरा खेद प्रकट करते हैं. हमारे एक प्रतिनिधि, जो पवेलियन की जिम्मेदारी संभाल रही थीं, को उत्पाद की तकनीकी उत्पत्ति की जानकारी नहीं थी. कैमरे पर आने के उत्साह में उन्होंने तथ्यात्मक रूप से गलत जानकारी दे दी, जबकि उन्हें प्रेस से बात करने के लिए अधिकृत भी नहीं किया गया था... आयोजकों की भावनाओं को समझते हुए हमने परिसर खाली कर दिया है." यूनिवर्सिटी ने यह भी संकेत दिया कि आयोजकों की भावना का सम्मान करते हुए उसने एक्सपो स्थल खाली कर दिया. इस बयान के बाद भी यह विवाद सोशल मीडिया और राजनीतिक हलकों में चर्चा का विषय बना हुआ है.





