कौन है अनूप मांझी उर्फ ​​'लाला'? पश्चिम बंगाल में ED की छापेमारी से कनेक्शन समझिए, किसी फिल्म से कम नहीं कहानी

प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने अवैध कोयला खनन और कोयला चोरी से जुड़े एक बड़े नेटवर्क का पर्दाफाश करते हुए मनी लॉन्ड्रिंग रोकथाम कानून (PMLA) 2002 के तहत जांच तेज कर दी है. यह कार्रवाई साल 2020 में दर्ज एक FIR के आधार पर शुरू की गई, जिसमें ईस्टर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड (ECL) के लीज क्षेत्रों से बड़े पैमाने पर कोयले की गैरकानूनी खुदाई और तस्करी का खुलासा हुआ.;

( Image Source:  X/ @AninBanerjee @Nher_who )
Edited By :  विशाल पुंडीर
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प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने और कोयला चोरी से जुड़े एक बड़े नेटवर्क का पर्दाफाश करते हुए मनी लॉन्ड्रिंग रोकथाम कानून (PMLA) 2002 के तहत जांच तेज कर दी है. यह कार्रवाई साल 2020 में दर्ज एक FIR के आधार पर शुरू की गई, जिसमें ईस्टर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड (ECL) के लीज क्षेत्रों से बड़े पैमाने पर कोयले की गैरकानूनी खुदाई और तस्करी का खुलासा हुआ.

ED की जांच में सामने आया है कि यह पूरा खेल सिर्फ स्थानीय अपराधियों तक सीमित नहीं था, बल्कि इसमें ECL, CISF, भारतीय रेलवे और अन्य संबंधित विभागों के कुछ अधिकारियों की कथित मिलीभगत भी शामिल थी. इस पूरे नेटवर्क में एक नाम बार-बार उभरकर आया अनूप मांझी, जिसे इलाके में ‘लाला’ के नाम से भी जाना जाता है.

अवैध कोयला खनन सिंडिकेट का मास्टरमाइंड

जांच एजेंसी के अनुसार, अनूप मांझी इस अवैध कोयला खनन सिंडिकेट का मास्टरमाइंड था. वह ECL के लीज क्षेत्रों से चोरी किए गए कोयले की खुदाई और उसके परिवहन की पूरी व्यवस्था संभाल रहा था. सरकारी कर्मचारियों की मदद से कोयले की हेराफेरी की जाती थी और इसे अलग-अलग माध्यमों से बाजार तक पहुंचाया जाता था.

ED की फाइलों में यह भी दर्ज है कि अनूप मांझी के खिलाफ साल 2000 से 2015 के बीच अवैध कोयला खनन और चोरी से जुड़े 16 मामले दर्ज हुए थे. इनमें से कई मामलों में चार्जशीट भी दाखिल की जा चुकी है, फिर भी उसका नेटवर्क लगातार फैलता गया.

कौन है अनूप मांझी उर्फ ‘लाला’?

अनूप मांझी का जन्म पश्चिम बंगाल के पिछड़े जिलों में शामिल पुरुलिया के भमूरिया गांव में हुआ था. उसके पिता कोयला खदान में मजदूरी करते थे. गरीबी में पले-बढ़े अनूप ने बचपन में मछली बेची और छोटे-मोटे काम किए. बाद में कुछ रिश्तेदारों और परिचितों के जरिए वह कोयले के कारोबार में दाखिल हुआ. समय के साथ अनूप ने रघुनाथपुर के जंगलों में कास्ट माइन का गैरकानूनी धंधा शुरू किया. धीरे-धीरे वह ऐसा माफिया बन गया, जो पैसे और बाहुबल दोनों मुहैया कराता था और यही वजह रही कि राजनीति में उसकी मांग बढ़ती चली गई.

धार्मिक छवि और अंडरग्राउंड की कहानी

‘लाला’ के नाम से मशहूर अनूप मांझी ने दुर्गा पूजा जैसे भव्य आयोजनों के जरिए खुद को धार्मिक और सामाजिक व्यक्ति के रूप में पेश करने की कोशिश की. लेकिन यही गतिविधियां जांच एजेंसियों की नजर में आने लगीं. जून 2011 में दिनदहाड़े पूर्व स्मगलर रामलखन यादव की हत्या के बाद हालात बदल गए. इसके बाद सिर्फ पश्चिम बंगाल ही नहीं, बल्कि झारखंड और अन्य राज्यों की पुलिस भी कोयला माफिया के पीछे लग गई. इसी दबाव में अनूप को अंडरग्राउंड होना पड़ा.

‘सूटकेस कंपनियों’ के जरिए मनी लॉन्ड्रिंग का आरोप

जांच एजेंसियों का दावा है कि कोलकाता के चौरंगी इलाके में अनूप मांझी की हजारों सूटकेस कंपनियां चल हो रही थीं. इन्हीं कंपनियों के जरिए अवैध पैसे का लेनदेन किया जाता था और सत्ता के गलियारों तक कथित रूप से रिश्वत पहुंचाई जाती थी, ताकि माफिया राज पर आंच न आए. ED की जांच में यह भी सामने आया है कि अनूप मांझी की कुल संपत्ति का अनुमान करीब 20,000 करोड़ रुपये तक लगाया जा रहा है.

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