भारत-अमेरिका ट्रेड डील पर 8 बैठकें, नतीजा शून्य! क्या मोदी का ट्रंप को फोन न करना है वजह? लटनिक के दावे खारिज

भारतीय विदेश मंत्रालय ने हावर्ड लटनिक के बयान को गलत बताते हुए कहा कि भारत–अमेरिका ट्रेड डील को लेकर 8 दौर की बातचीत हुई थी, लेकिन नतीजा शून्य रहा. बातचीत का दरवाजा अभी भी खुला है. अमेरिकी वाणिज्य सचिव की मानें तो इसके लिए अब भारत को पहल करना होगा. फिलहाल, इस बात को लेकर भारत–अमेरिका रिश्तों और व्यापारिक रणनीति पर बहस चरम पर है.;

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Curated By :  धीरेंद्र कुमार मिश्रा
Updated On : 9 Jan 2026 6:07 PM IST

भारत और अमेरिका के बीच 2025 में प्रस्तावित ट्रेड डील को लेकर आठ बार उच्चस्तरीय बातचीत हुई, लेकिन इसके बावजूद कोई ठोस समझौता नहीं हो सका. इस बीच अमेरिका में यह दावा किया गया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा तत्कालीन अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को फोन न किए जाने से डील अटक गई और भारत को इसका खामियाजा भुगतना पड़ा. भारतीय विदेश मंत्रालय ने लटनिक के इस दावे को सिरे से खारिज कर दिया गया है. अमेरिकी अधिकारियों का कहना है कि ट्रेड डील रुकने के पीछे कूटनीतिक नहीं, बल्कि व्यावसायिक और नीतिगत कारण थे. इस मुद्दे ने एक बार फिर भारत–अमेरिका रिश्तों और व्यापारिक रणनीति पर नई बहस छेड़ दी है.

इस बीच, भारत ने 9 जनवरी 2026 को अमेरिकी वाणिज्य सचिव हॉवर्ड लटनिक के उस दावे को गलत करार दिया, जिसमें उन्होंने कहा था कि भारत-अमेरिका व्यापार समझौता इसलिए नहीं हुआ, क्योंकि पीएम मोदी ने डोनाल्ड ट्रंप से बात नहीं की. लटनिक के इस बयान को भारतीय विदेश मंत्रालय ने खारिज करते हुए कहा कि यह पूरी तरह से गलत है. लटनिक के दावे से यह साफ हो गया कि भारत के प्रति ट्रंप का कड़ा टैरिफ रुख व्यापार संबंधी चिंता कम और निजी नाराजगी से ज्यादा प्रेरित था.

ट्रेड डील पर कब-कब हुई बातचीत

  • भारत और अमेरिका के बीच प्रस्तावित द्विपक्षीय ट्रेड डील (BTA) पर वार्ता मार्च 2025 में शुरू हुई थी.
  • पहला से पाँचवें दौर तक की बातचीत 2025 के बीच विभिन्न तिथियों पर हुई, जिनमें से आखिरी ज्ञात पांचवां दौर 14-18 जुलाई, 2025 को वाशिंगटन में आयोजित हुआ था.
  • 25-29 अगस्त 2025 के लिए शेड्यूल किया गया छठा दौर स्थगित किया गया था.
  • वाणिज्य सचिव के अनुसार 15-17 अक्टूबर, 2025 को एक और दौर हुआ था.
  • 10-12 दिसंबर, 2025 को अमेरिका-भारत के बीच तीन दिवसीय वार्ता आयोजित हुई.
  • 8 बार दिसंबर लास्ट में हुई थी. 

बातचीत से इनकार की कीमत चुकाई

हॉवर्ड लटनिक की मानें तो पीएम मोदी ने भारत-अमेरिका द्विपक्षीय व्यापार समझौते को अंतिम रूप देने या उनकी मांगों को मानने के लिए उनसे व्यक्तिगत तौर पर बात करने से इनकार कर दिया था. यह माना जाता है कि इस कथित अपमान की कीमत नई दिल्ली को चुकानी पड़ी है. उसी का नतीजा है कि ट्रंप ने भारत पर 50% का भारी टैरिफ लगा दिया. लटनिक के मुताबिक अतिरिक्त शुल्क लगने की संभावना अभी भी बनी हुई है.

'लटनिक ने जो कहा वो सही नहीं'

विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने इस मसले पर शुक्रवार को एक मीडिया ब्रीफिंग में कहा, "हमने ये टिप्पणियां देखी हैं. भारत और अमेरिका पिछले साल 13 फरवरी से ही द्विपक्षीय व्यापार समझौते पर बातचीत करने के लिए प्रतिबद्ध थे. तब से, दोनों पक्षों ने एक संतुलित और आपसी फायदे वाले व्यापार समझौते पर पहुंचने के लिए आठ दौर की बातचीत हुई.  कई मौकों पर, हम समझौते के करीब थे. अमेरिकी वाणिज्य सचिव ने जो कहा है, वह सही नहीं है.

इसके उलट, रणधीर जायसवाल ने कहा कि भारत दोनों पूरक अर्थव्यवस्थाओं के बीच आपसी फायदे वाले व्यापार समझौते को आगे बढ़ाने के लिए प्रतिबद्ध हैं. साथ ही बातचीत के नतीजे तक पहुंचाने के लिए प्रयासरत हैं. जायसवाल ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बीच 2025 में आठ बार फोन पर बात हुई. दोनों ने व्यापक साझेदारी के विभिन्न पहलुओं पर चर्चा भी की थी.

व्यापार वार्ता टूटने पर ट्रंप ने लगाई टैरिफ  

भारत की ओर से यह रिएक्शन हॉवर्ड लटनिक का बयान आने के कुछ घंटों बाद आई है. लटनिक ने कहा था कि भारत-अमेरिका द्विपक्षीय व्यापार समझौता (BTA) इसलिए रुका हुआ है क्योंकि पीएम मोदी ने समझौते को अंतिम रूप देने के लिए व्यक्तिगत रूप से ट्रंप को फोन नहीं किया था.

पिछले साल व्यापार वार्ता टूट गई थी, जिसके बाद अगस्त में ट्रंप ने भारतीय आयात पर टैरिफ बढ़ाकर 50% कर दिया था. इन शुल्कों में 25% का लेवी शामिल था, जो भारत द्वारा रूसी तेल की लगातार खरीद के जवाब में 25% पारस्परिक टैरिफ के साथ लगाया गया था.

सब कुछ सेट था, बस फोन करना था

ऑल-इन पॉडकास्ट पर एक इंटरव्यू में लटनिक ने कहा, "सब कुछ सेट था, और आपको मोदी से प्रेसिडेंट को फ़ोन करवाना था. वे ऐसा करने में असहज थे, इसलिए मोदी ने फोन नहीं किया." लटनिक की टिप्पणी तब आई जब इस हफ्ते ट्रंप ने नई दिल्ली पर दबाव बढ़ा दिया और चेतावनी दी कि अगर भारत ने रूस से तेल का आयात कम नहीं किया तो टैरिफ और बढ़ाए जा सकते हैं. इस चेतावनी से रुपया रिकॉर्ड निचले स्तर पर पहुंच गया और लंबे समय से अटकी व्यापार वार्ता में प्रगति की उम्मीद कर रहे निवेशक परेशान हो गए.

लटनिक ने कहा कि भारत अभी भी ऐसी टैरिफ दर चाहता है जो पहले ब्रिटेन और वियतनाम को दी गई दरों के बीच हो, लेकिन उन्होंने कहा कि वह पुराना प्रस्ताव अब खत्म हो गया है. अमेरिकी वाणिज्य सचिव का कहना है कि जिन शर्तों पर दोनों पक्ष एक समझौते के करीब लग रहे थे, वे अब मान्य नहीं हैं. अब हम इसके बारे में नहीं सोच रहे हैं."

दरवाजा खुला है, भारत इसे सुलझा लेगा

लटनिक ने भारत के दृष्टिकोण की तुलना ब्रिटेन से की. साथ ही याद दिलाया कि कैसे प्रधानमंत्री कीर स्टारमर ने समय सीमा से पहले ट्रंप को फोन किया, जिससे एक समझौता फाइनल हो गया और अगले दिन उसकी घोषणा कर दी गई. भारत सी-सॉ के गलत तरफ आ गया, जो निर्णायक साबित हुआ. फिर भी, दरवाजा खुला है. उम्मीद है भारत इसे सुलझा लेगा.

भारत-अमेरिका संबंधों में तनाव क्यों?

पिछले साल की रिपोर्ट में दावा किया गया था कि जुलाई में ट्रंप ने मोदी से कई बार बात करने की कोशिश की थी, जब वाशिंगटन द्वारा भारत के रूसी तेल खरीद पर अतिरिक्त 25% टैरिफ लगाने के बाद तनाव बढ़ गया था, जिससे कुल शुल्क 50% हो गया था. मोदी द्वारा भारत-पाकिस्तान युद्ध विराम में मध्यस्थता करने के ट्रंप के दावों को खारिज करने और उनको नोबेल शांति पुरस्कार की आकांक्षाओं का समर्थन न करने के बाद संबंध और तनावपूर्ण हो गए. सितंबर में बर्थडे कॉल के साथ आखिरकार फिर से संपर्क शुरू हुआ, जिसके बाद दिवाली और दिसंबर में बातचीत हुई, जिससे इस साल डील का भविष्य अनिश्चित हो गया.

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