अब इंडियन एयर स्पेस में दुश्मन ड्रोन की एंट्री बैन! भारत का एंटी-ड्रोन शील्ड पल में कर देगा Game Over
भारत अपनी हवाई सुरक्षा को मजबूत बनाने के लिए Joint Counter Unmanned Aerial Systems (CUAS) ग्रिड विकसित कर रहा है. यह नेटवर्क तीनों सेनाओं - आर्मी, नेवी और एयरफोर्स के एंटी‑ड्रोन सिस्टम को जोड़कर रीयल‑टाइम मॉनिटरिंग और तेज प्रतिक्रिया सुनिश्चित करेगा. CUAS ग्रिड, मिशन सुदर्शन चक्र के तहत, नागरिक और सैन्य केंद्रों को ड्रोन और लो-ऑल्टिट्यूड हवाई हमलों से सुरक्षित रखने के लिए बनाया गया है. इसका डिजाइन ऑपरेशन जैसे अनुभवों से सीख लेकर तैयार किया गया है.;
चीन और पाकिस्तान अगर अब भी यह सोच रहे हैं कि ड्रोन के ज़रिए भारत की सीमाओं, सैन्य ठिकानों या शहरों को डराया जा सकता है, तो यह उनकी सबसे बड़ी भूल साबित होने वाली है. तुर्की और चीन में बने ड्रोन से भारत को घेरने की पाकिस्तानी रणनीति हो या एलएसी के आसपास चीनी ड्रोन मूवमेंट- नई दिल्ली ने साफ संदेश दे दिया है कि अब हर ड्रोन भारत की हवा में आते ही नेस्तनाबूद होगा.
भारत अपनी हवाई सुरक्षा क्षमता को निर्णायक स्तर पर ले जा रहा है. भारतीय सशस्त्र बल अब एक Joint Counter Unmanned Aerial Systems (CUAS) ग्रिड विकसित कर रहे हैं, जो दुश्मन के अनमैन्ड ड्रोन को रीयल-टाइम में पहचानकर पल भर में खत्म करने में सक्षम होगा. यह पहल मिशन सुदर्शन चक्र के तहत की जा रही है और इसका मकसद है - दुश्मन की ड्रोन वॉरफेयर रणनीति को जड़ से खत्म करना और भारत को अभेद्य हवाई कवच देना.
CUAS ग्रिड: क्या है और क्यों जरूरी?
CUAS ग्रिड एक संपूर्ण काउंटर‑ड्रोन नेटवर्क है जो तीनों सेवाओं - आर्मी, नेवी और एयरफोर्स के एंटी‑ड्रोन सिस्टम को जोड़ता है. यह मौजूदा एयर डिफेंस नेटवर्क जैसे IACCS से अलग काम करेगा. छोटे ड्रोन को ट्रैक करने की जिम्मेदारी IACCS पर डालने से सिस्टम पर दबाव बढ़ जाता, इसलिए CUAS ग्रिड को पूरी तरह समर्पित बनाया गया है. नया नेटवर्क ज्वॉइंट एयर डिफेंस सेंटर (JADC) से जुड़ा होगा और हमेशा तैयार रहने वाला रहेगा.
सिस्टम की प्रमुख खूबियां
- रीयल‑टाइम निगरानी: तीनों सेवाओं के सिस्टम को जोड़कर हर लो-ऑल्टिट्यूड और अनमैन्ड हवाई खतरे की तुरंत पहचान.
- तेज़ और सटीक प्रतिक्रिया: जैसे ही कोई ड्रोन प्रवेश करता है, इंटीग्रेटेड सेंसर और गन्स तुरंत उसे नष्ट करने में सक्षम.
- सिविल और मिलिट्री सुरक्षा: बड़े शहरों और नागरिक केंद्रों में एयर डिफेंस गन तैनात की जा रही हैं, ताकि ड्रोन हमले से सामान्य नागरिक सुरक्षित रहें.
- मॉड्यूलर और स्केलेबल: भविष्य में नई टेक्नोलॉजी और उपकरण आसानी से जोड़े जा सकते हैं.
- ऑपरेशन‑लर्निंग इंटीग्रेशन: ऑपरेशन सिंदूर में पाकिस्तानी ड्रोन हमलों से मिली सीख का फायदा.
ऑपरेशन सिंदूर से मिली सीख
पाकिस्तानी सेना ने ऑपरेशन सिंदूर के दौरान तुर्की और चीन निर्मित ड्रोन का इस्तेमाल करके भारत की सैन्य और नागरिक स्थलों को निशाना बनाया. भारतीय सेना ने L-70 और ZU-23 एयर डिफेंस गन्स के जरिए इन ड्रोन हमलों को प्रभावी ढंग से नाकाम किया. CUAS ग्रिड इसी तरह के भविष्य के ड्रोन हमलों से निपटने के लिए तैयार किया गया है.
मिशन सुदर्शन चक्र : देश का कवच
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 15 अगस्त 2025 को लाल किले से राष्ट्र को संबोधित करते हुए इस मिशन की घोषणा की थी. मिशन का लक्ष्य राष्ट्रीय स्तर पर एक स्थायी और समर्पित हवाई सुरक्षा कवच तैयार करना है. रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने DRDO को निर्देशित किया कि अगले दशक में सभी महत्वपूर्ण प्रतिष्ठानों को एयर डिफेंस सिस्टम से लैस किया जाए, ताकि देश के हर कोने की सुरक्षा सुनिश्चित हो.
सिस्टम का तकनीकी फोकस
CUAS ग्रिड सेंसर फ्यूज़न, रडार ट्रैकिंग और ऑटोमेटिक गन सिस्टम का इस्तेमाल करेगा. यह नेटवर्क कई काउंटर‑ड्रोन सिस्टम्स को जोड़कर एक सेंट्रल कमांड एंड कंट्रोल नेटवर्क बनाएगा. खतरे का पता लगने पर सिस्टम स्वचालित रूप से खतरे वाले ड्रोन को निशाना बनाएगा, जिससे रेस्पॉन्स टाइम कम और प्रभाव अधिक होगा.
भविष्य की रणनीति
भारतीय सेना अब जूनोटेड नागरिक और मिलिट्री क्षेत्रों में एयर डिफेंस गन तैनात कर रही है. CUAS ग्रिड तीनों सेनाओं के बीच इंटीग्रेशन, रीयल‑टाइम रिस्पॉन्स और मॉड्यूलर टेक्नोलॉजी के जरिए देश को ड्रोन हमलों से न केवल बचाएगा बल्कि उनका जवाब पल में देगा.
भारत का नया Counter Drone Grid और Mission Sudarshan Chakra सिर्फ एक सैन्य पहल नहीं है. यह देश की हवाई सुरक्षा, तकनीकी क्षमताओं और नागरिक सुरक्षा की एक मजबूत मिसाल है. इससे यह स्पष्ट होता है कि भारत अब हर प्रकार के आधुनिक हवाई खतरे के लिए तैयार और सतर्क है.