राज्यसभा चुनाव 2026: पवन खेड़ा से लेकर शरद पवार तक, किस राज्य में किसकी कुर्सी खतरे में? 37 सीटों का पूरा गणित समझें

राज्यसभा की 37 सीटों पर 16 मार्च को चुनाव होने जा रहा है, जिससे ऊपरी सदन का समीकरण बदल सकता है. कई दिग्गज नेताओं की वापसी इस बार आसान नहीं दिख रही.

Curated By :  सागर द्विवेदी
Updated On : 25 Feb 2026 8:33 PM IST

राज्यसभा की 37 सीटों पर होने जा रहे चुनाव ने देश की राजनीति में नई हलचल पैदा कर दी है. 16 मार्च को मतदान और उसी दिन नतीजों की घोषणा के साथ कई बड़े नेताओं की सियासी दिशा तय हो जाएगी. आंकड़ों के लिहाज से देखें तो कुछ दल अपनी स्थिति मजबूत करने की कोशिश में हैं, तो कुछ के लिए यह चुनाव प्रतिष्ठा की लड़ाई बन चुका है. सबसे ज्यादा चर्चा उन चेहरों को लेकर है जिनका राज्यसभा पहुंचना इस बार आसान नहीं दिख रहा.

सियासी समीकरण, विधायकों की संख्या, क्रॉस वोटिंग की आशंका और गठबंधन की अंदरूनी खींचतान-इन सबके बीच कई दिग्गज नेताओं की दावेदारी पर सवाल खड़े हो गए हैं. कहीं संख्या कम पड़ रही है तो कहीं पार्टी के भीतर ही प्रतिस्पर्धा कड़ी है. आइए जानते हैं उन नेताओं के बारे में जिनके लिए इस बार राज्यसभा की राह मुश्किल मानी जा रही है.

राज्यसभा 2026: इन दिग्गजों की वापसी क्यों मानी जा रही है मुश्किल?

  • 2026 के राज्यसभा चुनाव में कई बड़े नेताओं की संसदीय पारी पर सवाल उठ रहे हैं. अलग-अलग राज्यों में बदले विधानसभा समीकरणों का असर सीधे राज्यसभा की सीटों पर पड़ सकता है. आइए राज्यवार समझते हैं किसके सामने क्या चुनौती है:
  • कांग्रेस की ओर से पवन खेड़ा का नाम चर्चा में है, लेकिन तमिलनाडु में डीएमके की प्राथमिकता अपने उम्मीदवारों को जिताने की है. विधानसभा संख्या के आधार पर डीएमके चार सीटें निकाल सकती है और एआईएडीएमके एक सीट सुरक्षित कर सकती है. बची एक सीट पर मुकाबला संभव है, लेकिन उसमें भी कांग्रेस की स्थिति पूरी तरह सुरक्षित नहीं मानी जा रही. गठबंधन राजनीति में अंतिम फैसला डीएमके नेतृत्व पर निर्भर करेगा.
  • जदयू के वरिष्ठ नेता और राज्यसभा के उपसभापति हरिवंश नारायण सिंह का कार्यकाल पूरा हो रहा है. लेकिन पार्टी के भीतर संकेत हैं कि इस बार समीकरण बदल सकते हैं. 2022 के राजनीतिक घटनाक्रम के बाद उनके और नेतृत्व के संबंधों को लेकर चर्चा रही है. जदयू परंपरागत रूप से तीसरी बार मौका देने में सतर्क रही है, ऐसे में उनकी दावेदारी पर अनिश्चितता बनी हुई है.
  • केंद्रीय मंत्री रामनाथ ठाकुर का नाम भी चर्चा में है. वे अति पिछड़ा राजनीति का बड़ा चेहरा माने जाते हैं और कर्पूरी ठाकुर की विरासत से जुड़े हैं. हालांकि पार्टी में तीसरी बार राज्यसभा भेजने की परंपरा कम रही है. राजनीतिक संतुलन साधने के लिए जदयू को नए चेहरों को मौका देने का दबाव भी है, जिससे उनकी राह पूरी तरह निर्विवाद नहीं कही जा सकती.
  • पूर्व आईएएस अधिकारी मनीष वर्मा का नाम जदयू के संभावित उम्मीदवारों में आगे बताया जा रहा है. वे मुख्यमंत्री के करीबी माने जाते हैं और संगठन में सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं. यदि पार्टी नेतृत्व बदलाव का संकेत देता है, तो वरिष्ठ नेताओं की जगह नए चेहरे को प्राथमिकता मिल सकती है. ऐसे में पुराने दावेदारों की मुश्किलें बढ़ना तय है.
  • छत्तीसगढ़ में भी समीकरण दिलचस्प हैं. केटीएस तुलसी और फूलो देवी नेताम का कार्यकाल समाप्ति की ओर है. विधानसभा की संख्या और संभावित क्रॉस वोटिंग को देखते हुए दोनों दलों के बीच मुकाबला संतुलित माना जा रहा है. यदि पार्टी रणनीति में बदलाव हुआ तो दोबारा नामांकन तय नहीं माना जा सकता.
  • महाराष्ट्र में बदले राजनीतिक हालात और एनसीपी के भीतर विभाजन का असर सीटों पर दिख सकता है. विधानसभा में घटे संख्या बल के कारण शरद पवार गुट के लिए राज्यसभा सीट बचाना आसान नहीं माना जा रहा.
  • मध्य प्रदेश में Digvijaya Singh तीसरे कार्यकाल की संभावना कम आंकी जा रही है. मध्य प्रदेश में बीजेपी का मजबूत विधायी आधार कांग्रेस के लिए अतिरिक्त सीट निकालना कठिन बनाता है. पार्टी नेतृत्व भी पीढ़ीगत बदलाव पर विचार कर सकता है.
  • कर्नाटक से H. D. Deve Gowda से जेडीएस की सीमित ताकत और बदले गठबंधन समीकरण उनकी वापसी को कठिन बना सकते हैं. विधानसभा में संख्या संतुलन उनके पक्ष में नहीं दिख रहा.
  • Parimal Nathwani (झारखंड/गुजरात से जुड़ा समीकरण) निर्दलीय या कॉर्पोरेट बैकग्राउंड से आने वाले उम्मीदवारों के लिए सीट बचाना अक्सर सत्ताधारी या प्रमुख क्षेत्रीय दलों के समर्थन पर निर्भर करता है. अगर राजनीतिक प्राथमिकताएं बदलीं तो उनकी राह मुश्किल हो सकती है.
  • बंगाल में टीएमसी का दबदबा है. विपक्षी दलों के लिए राज्यसभा सीट निकालना सीमित विधायकों के कारण चुनौतीपूर्ण है. क्रॉस वोटिंग या रणनीतिक मतदान की संभावना भी समीकरण बिगाड़ सकती है. Vikas Ranjan Bhattacharya का मुश्किल माना जा रहा है.

कितनी राज्यसभा सीटों पर चुनाव का एलान हुआ है?

10 राज्यों की कुल 37 राज्यसभा सीटों पर चुनाव की तारीखों का ऐलान कर दिया गया है.

चुनाव कब होंगे?

इन 37 सीटों के लिए 16 मार्च को मतदान कराया जाएगा.

वोटिंग और काउंटिंग का समय क्या रहेगा?

16 मार्च को सुबह 9 बजे से शाम 4 बजे तक वोटिंग होगी.

उसी दिन शाम 5 बजे से मतगणना शुरू होगी.

खाली हो रही सीटों पर किसका कितना कब्जा है?

जो 37 सीटें खाली हो रही हैं, उनमें से 12 सीटें एनडीए के पास हैं, जबकि 25 सीटों पर विपक्ष का कब्जा है.

किन राज्यों में सबसे ज्यादा सीटों पर चुनाव होगा?

महाराष्ट्र – 7 सीटें

तमिलनाडु – 6 सीटें

पश्चिम बंगाल – 5 सीटें

बिहार – 5 सीटें

किन बड़े नेताओं का कार्यकाल खत्म हो रहा है?

इन सीटों के साथ कई दिग्गज नेताओं का कार्यकाल 2 अप्रैल को समाप्त हो रहा है, जिनमें शामिल हैं:

  • Sharad Pawar
  • Ramdas Athawale
  • Kanimozhi Karunanidhi
  • Tiruchi Siva
  • Harivansh Narayan सिंह

राज्यसभा चुनाव 2026: किस राज्य में किसकी सीट लगभग तय? किसकी चमकेगी किस्मत

  • तेलंगाना: एक सीट पक्की, दूसरी पर सस्पेंस
  • तेलंगाना में कांग्रेस के पास 76 विधायक हैं. एक सीट के लिए कोटा 40 का है, यानी एक सीट लगभग तय मानी जा रही है.
  • Abhishek Manu Singhvi की दोबारा राज्यसभा वापसी लगभग निश्चित मानी जा रही है.
  • दूसरी सीट के लिए पूर्व सुप्रीम कोर्ट जज B. Sudarshan Reddy का नाम चर्चा में है.
  • अल्पसंख्यक चेहरे को मौका देने की अटकलें भी जारी हैं.
  • अगर बदलाव हुआ तो Bhupesh Baghel या T. S. Singh Deo को राज्यसभा भेजा जा सकता है.
  • कांग्रेस के पास 40 विधायक हैं और जीत का आंकड़ा 35 है. यानी सीट सुरक्षित मानी जा रही है.

Anand Sharma का नाम प्रमुखता से चर्चा में है.

  • दूसरी ओर पूर्व प्रदेश अध्यक्ष Pratibha Singh भी दावेदार मानी जा रही हैं.
  • हरियाणा: हुड्डा की पसंद से तय होगा टिकट
  • हरियाणा में कांग्रेस को एक सीट मिलने की संभावना है, लेकिन टिकट किसे मिलेगा यह बड़ा सवाल है.
  • Bhupinder Singh Hooda की पसंद अहम मानी जा रही है.
  • रेस में Raj Babbar, Uday Bhan और Anil Jaihind के नाम चर्चा में हैं.

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