NCERT की किताब में ऐसा क्‍या था जिसे हटाने पर होना पड़ा मजबूर? सुप्रीम कोर्ट ने लगाई थी फटकार

NCERT की नई कक्षा 8 की किताब में ‘न्यायपालिका में भ्रष्टाचार’ और लंबित मामलों का उल्लेख विवाद का कारण बन गया. सुप्रीम कोर्ट की सख्त टिप्पणी के बाद किताब बिक्री से हटा ली गई है और संशोधन की तैयारी जारी है.

( Image Source:  Sora_ AI )
Edited By :  सागर द्विवेदी
Updated On : 25 Feb 2026 4:19 PM IST

कक्षा 8 की सामाजिक विज्ञान की नई किताब में न्यायपालिका से जुड़े एक अध्याय ने बड़ा विवाद खड़ा कर दिया है. किताब में न्यायपालिका में भ्रष्टाचार और लंबित मामलों को चुनौतियों के रूप में पेश किया गया था, जिस पर गंभीर आपत्ति जताई गई. मामला सामने आने के बाद शिक्षा मंत्रालय के सूत्रों ने पुष्टि की कि यह किताब बिक्री से हटा ली गई है. सुप्रीम कोर्ट ने भी इस पर सख्त रुख अपनाया है और कहा है कि किसी को भी संस्था की छवि धूमिल करने की इजाजत नहीं दी जाएगी. अब एनसीईआरटी किताब में संशोधन की तैयारी कर रहा है.

  • NCERT की कक्षा 8 की नई सामाजिक विज्ञान की किताब को शिक्षा मंत्रालय के निर्देशों के बाद बिक्री से हटा लिया गया है, क्योंकि उसमें न्यायपालिका में भ्रष्टाचार और लंबित मामलों से जुड़ा एक विवादित हिस्सा शामिल था.
  • यह किताब सोमवार को जारी की गई थी और दिल्ली स्थित NCERT परिसर के बिक्री काउंटर पर उपलब्ध थी, लेकिन अगले ही दिन इसे वहां से हटा लिया गया, जिससे यह स्पष्ट हुआ कि सरकार और न्यायपालिका ने इस विषय को गंभीरता से लिया.
  • किताब के अध्याय ‘The Role of the Judiciary in Our Society’ में न्यायिक व्यवस्था की चुनौतियों का जिक्र किया गया था, जिसमें भ्रष्टाचार, न्यायाधीशों की कमी, जटिल कानूनी प्रक्रिया और खराब बुनियादी ढांचे को मुख्य कारण बताया गया था.
  • इस विवाद पर सूर्यकांत ने तीखी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि वह न्यायपालिका को बदनाम करने की किसी भी कोशिश को बर्दाश्त नहीं करेंगे और उन्होंने इसे संस्थागत छवि को नुकसान पहुंचाने वाला कदम बताया.
  • सुनवाई के दौरान वरिष्ठ वकील कपिल सिब्‍बल और अभिषेक मनु सिंघवी ने कहा कि कक्षा 8 के छात्रों को यह पढ़ाना कि न्यायपालिका भ्रष्ट है, समाज में गलत संदेश फैला सकता है और यह चयनात्मक चित्रण का मामला है.
  • किताब में यह भी लिखा गया था कि न्यायाधीश एक आचार संहिता से बंधे होते हैं और उनके खिलाफ शिकायतों के लिए एक आंतरिक तंत्र मौजूद है, जिसमें 2017 से 2021 के बीच 1600 से अधिक शिकायतें दर्ज की गई थीं.
  • पाठ्यपुस्तक में संसद द्वारा महाभियोग की प्रक्रिया का भी उल्लेख था और बताया गया था कि गंभीर आरोपों की स्थिति में उचित जांच के बाद न्यायाधीश को हटाया जा सकता है, जिससे जवाबदेही की व्यवस्था को समझाया गया था.
  • विवाद इसलिए और गहरा हो गया क्योंकि पुरानी कक्षा 8 की राजनीतिक विज्ञान की किताब में न्यायपालिका की संरचना, स्वतंत्रता और भूमिका का वर्णन था, लेकिन भ्रष्टाचार का कोई उल्लेख नहीं किया गया था, जिससे नए पाठ्यक्रम पर सवाल उठे.
  • शिक्षा मंत्रालय के सूत्रों के अनुसार, इस किताब को हटाने का फैसला इसलिए लिया गया ताकि छात्रों के मन में न्याय व्यवस्था को लेकर नकारात्मक धारणा न बने और संस्थानों में विश्वास कमजोर न हो.

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