Sonam Wangchuk पर क्या थे आरोप, सरकार ने अब क्यों वापस लिया NSA? इतने महीने जेल में गुजारे

केंद्र सरकार ने जलवायु कार्यकर्ता सोनम वांगचुक की हिरासत खत्म करने का फैसला लिया है. उन्हें पिछले साल लेह में हुई हिंसा के बाद राष्ट्रीय सुरक्षा कानून के तहत गिरफ्तार कर जोधपुर जेल भेजा गया था.

( Image Source:  X- @Wangchuk66 )
Edited By :  समी सिद्दीकी
Updated On : 14 March 2026 12:56 PM IST

Sonam Wangchuk Released: केंद्र सरकार ने जलवायु कार्यकर्ता Sonam Wangchuk की हिरासत खत्म करने का फैसला लिया है. गृह मंत्रालय ने शनिवार को कहा कि पिछले साल सितंबर में Leh में हुई हिंसा के मामले में उन्हें हिरासत में लिया गया था. अब सरकार ने NSA के तहत उनकी हिरासत को तुरंत प्रभाव से रद्द करने का फैसला लिया है.

Sonam Wangchuk को कुछ महीने पहले ही लद्दाख में प्रोटेस्ट के दौरान हिरासत में लिया गया था. उनकी डिटेन होने के बाद काफी विरोध हो रहा था. लोग कह रहे थे कि रेप के आरोपी राम रहीम को बेल मिल जा रही है, लेकिन सोनम वांगचुक को अपने हक के लिए आवाज़ उठा रहे थे उन्हें जेल से रिहा नहीं किया जा रहा है.

Sonam Wangchuk पर कौनसा एक्ट लगा था?

कुछ महीने पहले सोनम वांगचुक को हिरासत में लेकर Jodhpur की जेल भेजा गया था. उन्हें National Security Act के तहत रखा गया था. सरकार का कहना था कि उन्हें सार्वजनिक व्यवस्था बनाए रखने के लिए हिरासत में लिया गया था, क्योंकि उस समय हिंसक विरोध प्रदर्शन हुए थे.

सरकार ने क्यों खत्म की सोनम वांगचुक की हिरासत?

सरकार ने अपने बयान में कहा कि लद्दाख में शांति, स्थिरता और आपसी भरोसे का माहौल बनाए रखना उसकी प्राथमिकता है, ताकि सभी पक्षों के साथ रचनात्मक और सार्थक बातचीत हो सके. इसी उद्देश्य को ध्यान में रखते हुए और सभी पहलुओं पर विचार करने के बाद सरकार ने नेशनल सिक्योरिटी एक्ट के तहत मिले अधिकारों का इस्तेमाल करते हुए सोनम वांगचुक की हिरासत खत्म करने का फैसला लिया है.

कितने दिन बाद रिहा होंगे सोनम?

सरकार ने यह भी कहा कि वह लद्दाख में विभिन्न पक्षों और समुदाय के नेताओं के साथ लगातार बातचीत कर रही है, ताकि क्षेत्र के लोगों की आकांक्षाओं और चिंताओं का समाधान किया जा सके.

सरकार ने वांगचुक पर क्या लगाए थे आरोप?

इससे पहले केंद्र सरकार ने आरोप लगाया था कि सोनम वांगचुक ने युवाओं, खासकर जेनरेशन-ज़ेड को नेपाल और बांग्लादेश जैसे देशों की तरह विरोध प्रदर्शन के लिए उकसाने की कोशिश की थी. उन्हें 26 सितंबर 2025 को हिरासत में लिया गया था और अब वह 175 दिनों बाद रिहा होंगे.

पत्नी ने पिटीशन में क्या कहा था?

वहीं उनकी पत्नी Gitanjali J Angmo ने Supreme Court of India में याचिका दायर कर उनकी हिरासत को चुनौती दी थी. उन्होंने कहा था कि राष्ट्रीय सुरक्षा कानून के तहत की गई यह कार्रवाई गैरकानूनी और मनमानी है, जो उनके मौलिक अधिकारों का उल्लंघन करती है. उन्होंने यह भी कहा कि सोनम वांगचुक ने अपने सोशल मीडिया पर हिंसा की निंदा की थी और कहा था कि हिंसा से लद्दाख की पांच साल की शांतिपूर्ण तपस्या और संघर्ष कमजोर पड़ जाएगा.

क्या मांग कर रहे थे सोनम वांगचुक?

सोनम वांगचुक की हिरासत उस समय हुई थी जब लद्दाख को राज्य का दर्जा और छठी अनुसूची का दर्जा देने की मांग को लेकर हिंसक प्रदर्शन हुए थे. इन प्रदर्शनों में चार लोगों की मौत हो गई थी और करीब 90 लोग घायल हुए थे. सरकार ने उस समय आरोप लगाया था कि इन हिंसक घटनाओं को भड़काने में उनकी भूमिका थी.

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