धर्म बदलने से 60 दिन पहले देनी होगी जानकारी, नहीं तो होगी 10 साल तक की जेल; महाराष्ट्र के एंटी-कन्वर्जन बिल में और क्या-क्या है?
महाराष्ट्र सरकार धर्म परिवर्तन को नियंत्रित करने के लिए नया कानून लाने जा रही है. प्रस्तावित बिल के तहत धर्म बदलने से 60 दिन पहले जिला मजिस्ट्रेट को सूचना देना जरूरी होगा. जबरन या लालच देकर धर्म परिवर्तन कराने पर 7 से 10 साल तक की जेल का प्रावधान हैो
महाराष्ट्र सरकार धर्म परिवर्तन को लेकर एक नया कानून लाने की तैयारी में है. राज्य विधानसभा में पेश किए जाने वाले Maharashtra Dharma Swatantra Bill, 2026 के तहत अगर कोई व्यक्ति अपना धर्म बदलना चाहता है तो उसे कम से कम 60 दिन पहले जिला प्रशासन को इसकी जानकारी देनी होगी. प्रस्तावित बिल के अनुसार धर्म परिवर्तन करने से पहले व्यक्ति को लिखित रूप से जिला मजिस्ट्रेट को नोटिस देना होगा. इसमें उसका नाम, उम्र, पेशा, पता, वर्तमान धर्म और जिस धर्म को अपनाना चाहता है, उसकी जानकारी देनी होगी. इसके बाद जिला प्रशासन यह जांच कर सकता है कि धर्म परिवर्तन स्वेच्छा से हो रहा है या किसी दबाव, धोखे या लालच के कारण.
बिल में यह भी कहा गया है कि धर्म परिवर्तन की प्रक्रिया पूरी होने के बाद संबंधित व्यक्ति और वह संस्था या व्यक्ति जिसने धर्म परिवर्तन की रस्म कराई है, दोनों को 60 दिनों के भीतर जिला प्रशासन को घोषणा पत्र देना होगा. प्रशासन इन सभी मामलों का रिकॉर्ड रखेगा. अगर तय समय में यह घोषणा नहीं दी गई तो धर्म परिवर्तन को अमान्य माना जा सकता है.
Maharashtra Dharma Swatantra Bill, 2026 की खास बातें
- बिल लाने का मुख्य उद्देश्य जबरन या धोखे से कराए जाने वाले धर्म परिवर्तन को रोकना है. बिल में कहा गया है कि अगर कोई व्यक्ति बल, दबाव, झूठी जानकारी, लालच या किसी प्रकार के प्रलोभन देकर धर्म परिवर्तन कराता है तो यह गैरकानूनी माना जाएगा.
- 'लालच' की परिभाषा में पैसे, उपहार, नौकरी, धार्मिक संस्थानों में मुफ्त शिक्षा, बेहतर जीवन का वादा या चमत्कारिक इलाज जैसे दावे शामिल किए गए हैं. वहीं 'बल' में धमकी, सामाजिक बहिष्कार, डराना-धमकाना या मानसिक दबाव डालना भी शामिल है.
- बिल में शादी से जुड़े धर्म परिवर्तन पर भी प्रावधान रखा गया है. अगर किसी व्यक्ति को शादी का वादा करके धर्म बदलने के लिए मजबूर किया जाता है या शादी सिर्फ धर्म परिवर्तन के उद्देश्य से की जाती है, तो अदालत उस शादी को अमान्य घोषित कर सकती है.
- इस कानून में महिलाओं, नाबालिगों और अनुसूचित जाति-जनजाति के लोगों को 'संवेदनशील वर्ग' माना गया है. अगर इनके साथ जबरन या धोखे से धर्म परिवर्तन कराया जाता है तो सजा और ज्यादा सख्त होगी.
- प्रस्तावित कानून के अनुसार गैरकानूनी धर्म परिवर्तन कराने पर 7 साल तक की जेल और जुर्माना हो सकता है. अगर वही अपराध दोबारा किया गया तो सजा 10 साल तक की जेल और 7 लाख रुपये तक जुर्माना हो सकती है.
- दो या उससे ज्यादा लोगों का एक साथ धर्म परिवर्तन 'मास कन्वर्जन' माना जाएगा और इसमें भी कड़ी सजा का प्रावधान है. अगर किसी संस्था या संगठन की भूमिका सामने आती है तो सरकार उसका रजिस्ट्रेशन रद्द कर सकती है और मिलने वाली सरकारी मदद भी बंद कर सकती है.
- इस कानून के तहत ऐसे मामलों की जांच पुलिस अधिकारी करेंगे, जिनका पद कम से कम डीएसपी स्तर का होगा. शिकायत धर्म परिवर्तन करने वाले व्यक्ति के अलावा उसके माता-पिता, भाई-बहन या अन्य रिश्तेदार भी दर्ज करा सकते हैं.
- सरकार का कहना है कि संविधान धर्म की स्वतंत्रता देता है, लेकिन यह अधिकार पूर्ण नहीं है और सार्वजनिक व्यवस्था, नैतिकता और स्वास्थ्य के अधीन है. सरकार के मुताबिक कई बार कमजोर वर्गों को लालच या दबाव देकर धर्म परिवर्तन कराने की शिकायतें आती रही हैं, इसलिए इस कानून की जरूरत बताई गई है.
- अगर यह बिल पास हो जाता है तो महाराष्ट्र में धर्म परिवर्तन के लिए पहले से सूचना देना, प्रशासनिक जांच और बाद में घोषणा देना अनिवार्य हो जाएगा.




