भोजपुरी से देशभर तक: ‘रिंकिया के पापा’ की सफलता की असली कहानी, जिस गाने का केजरीवाल ने उड़ाया था 'मजाक'

मनोज तिवारी ने खुलासा किया कि ‘रिंकिया के पापा’ सिर्फ मजाकिया गीत नहीं बल्कि सामाजिक संदेश से भरा गाना है. इसी गाने ने उन्हें भोजपुरी से बाहर पूरे देश में पहचान दिलाई, जिसका चुनाव प्रचार के दौरान अरविंद केजरीवाल ने मजाक उड़ाया था.;

भोजपुरी म्यूजिक को अगर किसी एक गाने ने भाषा और इलाके की दीवार तोड़कर देशभर में पहचान दिलाई, तो वह है ‘रिंकिया के पापा.' कभी इसे हल्के-फुल्के मजाक के तौर पर देखा गया, तो कभी इस पर सियासी तंज भी कसे गए. दो साल पहले दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल द्वारा इस गाने का मजाक उड़ाया जाना भी खूब चर्चा में रहा- लेकिन वक्त ने साबित कर दिया कि यह गीत सिर्फ मनोरंजन नहीं, बल्कि भावना, हास्य और सामाजिक संदेश का अनोखा मेल है.

मनोज तिवारी की आवाज़ में गाया गया ‘रिंकिया के पापा’ आज भोजपुरी से निकलकर देशभर में पहचाना जाने वाला गाना बन चुका है. इसकी लोकप्रियता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि नॉन-भोजपुरी दर्शक भी इसके बोल गुनगुनाते हैं. दिलचस्प बात यह है कि जिस गाने को कभी फूहड़ कहकर खारिज किया गया, वही आज रील्स, मंचों और राजनीतिक बहसों तक में जिंदा है.

देवी गीतों से शुरू हुआ सफर

संगीत से कैसे जुड़े के सवाल पर स्टेट मिरर को मनोज तिवारी ने बातचीत में बताया कि उन्होंने करियर की शुरुआत मां भगवती और देवी गीतों से की थी. उस दौर में उनकी लोकप्रियता एक खास वर्ग तक सीमित थी, लेकिन वही उनकी मजबूत नींव बनी.

दिलाई देशव्यापी पहचान

मनोज तिवारी के मुताबिक, ‘रिंकिया के पापा’ उनके करियर का टर्निंग पॉइंट रहा. यह गाना भोजपुरी के दायरे से निकलकर नॉन-भोजपुरी दर्शकों तक भी पहुंचा और घर-घर में गूंजने लगा.

यूनिक साउंड और बोलों ने बनाया गाने को खास

मनोज तिवारी ने कहा कि इस गाने में उन्होंने एक नया और यूनिक साउंड तैयार किया. “चट देनी मार देनी, खींच के तमाचा” जैसे बोल सुनने में भले शरारती लगें, लेकिन संगीत की कोई तय भाषा नहीं होती. अगर वह अच्छा हो तो हर घर में सुना जाता है.

हास्य-व्यंग्य में छुपा गहरा सामाजिक संदेश

मनोज तिवारी ने साफ किया कि ‘रिंकिया के पापा’ कोई फूहड़ गीत नहीं, बल्कि पति-पत्नी के झगड़ों को हंसकर हल करने का संदेश देता है. गाने में बेटी और पिता के रिश्ते की भावनात्मक झलक भी दिखाई देती है.

‘रिंकिया के पापा’ यानी बिटिया का पिता

उन्होंने कहा कि बहुत से लोग यह नहीं समझ पाए कि ‘रिंकिया के पापा’ का मतलब बेटी के पिता से है. यह गाना पिता-बेटी के रिश्ते को हल्के-फुल्के अंदाज में सामने लाता है.

ट्रोलिंग और अरविंद केजरीवाल विवाद

मनोज तिवारी ने बताया कि इस गाने को लेकर उन्हें ट्रोल भी किया गया. उन्होंने इशारों-इशारों में कहा कि जब कोई दूसरी संस्कृति और भाषा को समझे बिना मजाक उड़ाता है, तो वही उसका नुकसान हो जाता है.

भाषा नहीं, भावना पकड़ने की जरूरत

मनोज तिवारी का मानना है कि अगर कोई गीत दिल से निकला हो, तो भाषा की दीवार टूट जाती है. यही वजह है कि ‘रिंकिया के पापा’ आज भी उतना ही लोकप्रिय है.

आज भी रील्स और मंचों पर जिंदा है गाना

आज के रील और सोशल मीडिया दौर में भी ‘रिंकिया के पापा’ जैसे गाने लोगों को हंसाते हैं और जोड़ते हैं. यही इसकी सबसे बड़ी सफलता है.

केजरीवाल से क्यों हुआ तकरार?

दिल्ली में चुनाव प्रचार के दौरान अरविंद केजरीवाल ने 'रिंकिया के पापा' का मजाक उड़ा था. ट्रोल भी बहुत कराया था. इसमें उन्हीं का लॉस हुआ. वो इस गाने को समझ नहीं पाए. देखो, जब आप किसी दूसरी संस्कृति के भाव को भाषा को नहीं समझते और छेड़खानी करोगे तो अरविंद केजरीवाल टाइप का गिर जाओगे. अरविंद की वो जो इस गाने का मजाक उड़ाया. उन्होंने उनको पता ही नहीं था कि आप बेटी के पिता का मजाक उड़ा रहे हो. रिंकिया के पापा मतलब बिटिया का पिता. मैं कहता भी था कई बार आप लोगों से बातचीत होती थी. मगर क्या है न, "जब नाश मनुज पर छाता है पहले विवेक मर जाता है." वही, उनके साथ भी हुआ.

रिंकिया के पापा का मतलब

बीजेपी सांसद मनोज तिवारी ने फरवरी 2024 में दिल्ली चुनाव के दौरान पूर्व सीएम अरविंद केजरीवाल को 'रिंकिया के पापा' का मतलब समझाते हुए कहा, " इसका मतलब होता है बेटियों के पिता. वे बेटियों के पिता को हराने में क्यों लगे हैं? कन्हैया कुमार के साथ जाकर अरविंद केजरीवाल के ऊपर जो भारत तोड़ने की साजिश रचने का खुमार चढ़ा, उसके आगे वे दिवालिया हो गए हैं."

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