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रामपुर में पंचायत का पंचनामा: पति का शेड्यूल तय - 3 दिन पहली, 3 दिन दूसरी पत्नी के साथ, रविवार आराम का दिन

यूपी के रामपुर जिले के आकिल गांव में पंचायत ने पति-पत्नी के रिश्तों का अनोखा फैसला सुनाया. मुस्लिम युवक दोनों पत्नियों को 3-3 दिन समय देगा. रविवार को छुट्टी रखेगा. पंचायत का यह फैसला अब चर्चा का विषय बन गया है.

रामपुर में पंचायत का पंचनामा: पति का शेड्यूल तय - 3 दिन पहली, 3 दिन दूसरी पत्नी के साथ, रविवार आराम का दिन
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( Image Source:  Sora AI )

उत्तर प्रदेश के रामपुर जिले के आकिल गांव पंचायत ऐसा फैसला सुनाया जिसे सुन सभी चौंक गए. अब इस फैसलेस ने गांव की चौपाल से लेकर सोशल मीडिया तक बहस छेड़ दी है. आकिल गांव में घरेलू विवाद सुलझाने के नाम पर पंचायत ने मुस्लिम युवक की निजी जिंदगी का बाकायदा साप्ताहिक टाइम-टेबल तय कर दिया. फैसले के मुताबिक युवक अपनी पहली पत्नी को 3 दिन, दूसरी पत्नी को 3 दिन देगा. जबकि रविवार को उसे ‘आराम का दिन’ मिलेगा. पंचायत का यह पंचनामा अब परंपरा, कानून और निजी आजादी, तीनों पर सवाल खड़े कर रहा है.

गजब है मामला

रामपुर जिले के आकिल गांव में एक मुस्लिम युवक की दो पत्नियों को लेकर लंबे समय से विवाद चल रहा था. दोनों पत्नियों के बीच झगड़े और शिकायतें पंचायत तक पहुंचीं. मामला बढ़ता देख गांव की पंचायत बैठी और आपसी समझौते के नाम पर पति के साथ रहने का दिन-वार बंटवारा तय कर दिया.

पंचायत के इस फैसले से 'एक म्यान में दो तलवारें’ न रहने वाली बात सच साबित हुई है. शायद यही वजह है कि पंचायत ने बीच का रास्ता निकालते हुए युवक के लिए सात दिनों का एक टाइम-टेबल बना दिया. अब वह तीन-तीन दिन अपनी दोनों पत्नियों के साथ समय बिताएगा. इसके साथ ही उसे रविवार को छुट्टी भी दी गई है.

ये है पंचायत से तय शेड्यूल

आकिल गांव पंचायत के फैसले के मुताबिक शुरुआती 3 दिन यानी सोमवार, मंगलवार और बुधवार को युवक पति पहली पत्नी के साथ रहेगा. जबकि अगले 3 दिन — गुरुवार, शुक्रवार और शनिवार को वह समय दूसरी पत्नी के लिए सुरक्षित रखेगा. रविवार को युवक के लिए छुट्टी का दिन रखा गया है.

विवाद को रोकने के लिए लिखित में समझौता

इस मामले में सबसे दिलचस्प हिस्सा यह रहा कि रविवार के दिन पति को ‘छुट्टी’ दी गई है. इस दिन वह दोनों पत्नियों से दूर एकांत में रहेगा या अपनी मर्जी से समय बिताएगा. हालांकि, विशेष परिस्थितियों के लिए पंचायत ने एक दिन आगे-पीछे करने की छूट भी दी है. भविष्य में विवाद न हो, इसके लिए इस समझौते को लिखित रूप में दर्ज कर तीनों के हस्ताक्षर कराए गए हैं.

पहले भी हो चुका है ऐसा ‘इंसाफ’

देश में पति के बंटवारे का यह कोई पहला मामला नहीं है. इससे पहले बिहार के पूर्णिया जिले में भी एक ऐसा ही मामला सुर्खियों में रहा था. वहां भी एक युवक ने पहली पत्नी को बिना तलाक दिए दूसरी शादी कर ली थी. यह मामला जब जिला परिवार परामर्श केंद्र पहुंचा, तो वहां भी हफ्ते के सात दिनों को दोनों पत्नियों के बीच बांटकर विवाद का निपटारा किया गया था.

गांव में क्या है माहौल?

गांव के लोग इस फैसले को लेकर दो गुट में बंट गए हैं. कुछ लोग इसे 'समझदारी भरा समाधान' बता रहे हैं, तो कुछ का कहना है कि पंचायत ने इंसाफ के नाम पर मजाक बना दिया.

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