1 लाख करोड़ का फंड... फिर अचानक क्यों लग गया ब्रेक? 300+ कंपनियां इंतजार में, जानें सरकार की योजना पर क्या उठ रहे सवाल
₹1 लाख करोड़ के RDI Fund की फंडिंग प्रक्रिया पर फिलहाल ब्रेक लग गया है. 300 से ज्यादा कंपनियों ने आवेदन किया, लेकिन अब तक सिर्फ 35 कंपनियों का चयन हुआ है. जानिए फंडिंग क्यों अटकी, और क्या है पूरा मामला.
सरकार की ओर से देश की उभरती प्राइवेट कंपनियों को डीप-टेक रिसर्च और नई तकनीक डेवलप करने के लिए आर्थिक मदद देने की महत्वाकांक्षी योजना फिलहाल रुक गई है. ₹1 लाख करोड़ के रिसर्च, डेवलपमेंट एंड इनोवेशन (RDI) फंड के तहत कंपनियों को फंड देने वाली प्रक्रिया को फिलहाल रोक दिया गया है.
The Indian Express की रिपोर्ट के मुताबिक, इस योजना के तहत लाभार्थियों का चयन करने वाली एकमात्र एजेंसी टेक्नोलॉजी डेवलपमेंट बोर्ड (TDB) ने नए आवेदन आमंत्रित करना बंद करने का फैसला किया है. वजह यह बताई गई है कि एक राउंड की फंडिंग के बाद आगे की प्रक्रिया के लिए बोर्ड को जरूरी रकम नहीं मिली है.
टीडीपी ने नोटिस में क्या कहा?
मंगलवार को टेक्नोलॉजी डेवलपमेंट बोर्ड (TDB) ने अपनी आधिकारिक वेबसाइट पर एक नोटिस जारी किया. इसमें कहा गया कि प्रशासनिक कारणों से इस महीने के बाद फंडिंग के लिए नए आवेदन आमंत्रित नहीं किए जाएंगे. TDB विज्ञान और टेकनॉलोजी विभाग (DST) के तहत काम करने वाला एक लीगल बॉडी है.
The Indian Express ने अपनी रिपोर्ट में सूत्रों के हवाले से बतायाकि TDB, जो फिलहाल RDI Fund के लाभार्थियों का चयन करने वाली एकमात्र एजेंसी है, को नई कंपनियों को फंड देने के लिए जरूरी रकम अभी तक नहीं मिली है. नियमों के मुताबिक, यह रकम DST की ओर से आवंटित की जानी है. DST ही RDI Fund का प्रशासनिक संरक्षक है.
सरकार का 1 लाख करोड़ का वादा?
सरकार ने इस योजना के लिए कुल ₹1 लाख करोड़ के RDI Fund का प्रावधान किया है. इस कार्यक्रम के लिए DST को अब तक ₹23,000 करोड़ का बजट आवंटित किया जा चुका है. इसमें पिछले साल के बजट में ₹3,000 करोड़ और इस साल के बजट में ₹20,000 करोड़ शामिल हैं.
इस साल की शुरुआत में TDB को RDI Fund के तहत ₹2,000 करोड़ मिले थे. अप्रैल में पहले राउंड में 22 कंपनियों को सॉफ्ट लोन देने की मंजूरी के दौरान यह रकम खत्म हो गई. इन 22 कंपनियों को कुल ₹2,192 करोड़ के सॉफ्ट लोन की पेशकश की गई थी.
हालांकि, 10 अगस्त को The Indian Express ने एक रिपोर्ट में बताया था कि इन 22 लाभार्थी कंपनियों में से 15 के निवेश संबंध सात चयन समिति के सदस्यों से जुड़े हुए थे. इस वजह से हितों के टकराव और प्रक्रिया की पारदर्शिता को लेकर सवाल उठे थे. इन समिति सदस्यों ने कहा था कि जिन कंपनियों से उनके संबंध थे, उनके मूल्यांकन की प्रक्रिया से उन्होंने खुद को अलग कर लिया था.
सूत्रों के मुताबिक, TDB ने अगस्त में RDI Fund के दूसरे राउंड के लिए चयन प्रक्रिया पूरी कर ली थी. इसके बाद बोर्ड ने कुछ और आवेदकों को शॉर्टलिस्ट करने की प्रक्रिया भी शुरू की थी. लेकिन फंड की कमी के कारण यह प्रक्रिया रोक दी गई.
सूत्रों का कहना है कि दूसरे राउंड में चुनी गई 13 कंपनियों को अभी तक लेटर ऑफ इंटेंट (LOI) तक जारी नहीं किया जा सका है. यानी अब तक दो राउंड में कुल 35 कंपनियों का चयन किया जा चुका है, लेकिन आगे की फंडिंग प्रक्रिया पैसे की उपलब्धता पर अटक गई है.
अब तक 300 से ज्यादा कंपनियां RDI Fund के तहत आर्थिक मदद हासिल करने के लिए आवेदन कर चुकी हैं. इनमें से करीब 100 कंपनियों का मूल्यांकन यानी अप्रेजल किया जा चुका है. इनमें से 35 कंपनियों का चयन हुआ है. पहले राउंड में 22 कंपनियां चुनी गईं, जबकि दूसरे राउंड में 13 कंपनियां चुनी गईं. पहले राउंड में चुनी गई कंपनियों में कई महत्वपूर्ण डीप-टेक और उभरती तकनीक से जुड़ी कंपनियां शामिल थीं.
सरकार ने क की थी फंड की शुरुआत?
इनमें स्पेस सेक्टर की कंपनियां Agnikul Cosmos और GalaxEye, क्वांटम टेक्नोलॉजी से जुड़ी QuNu Labs और रोबोटिक्स क्षेत्र की ideaForge और EndureAir जैसी कंपनियां शामिल हैं. सरकार ने नवंबर 2025 में Research, Development and Innovation यानी RDI Fund की शुरुआत की थी.
इसका मकसद ऐसी प्राइवेट कंपनियों को आर्थिक मदद देना है जो क्वांटम टेक्नोलॉजी, स्पेस, रोबोटिक्स और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस जैसे महत्वपूर्ण और उभरते क्षेत्रों में रिसर्च और नई तकनीक विकसित कर रही हैं. इसमें ऐसी स्टार्टअप कंपनियां भी शामिल हैं जो अपने पहले प्रोडक्ट को विकसित करने की कोशिश कर रही हैं. सरकार का उद्देश्य ऐसी तकनीकों को आर्थिक मदद देना है जिन्हें देश की आर्थिक वृद्धि और रणनीतिक आत्मनिर्भरता के लिए महत्वपूर्ण माना गया है.
क्या है सरकार का वादा?
इस फंड के तहत छह साल की अवधि में कुल ₹1 लाख करोड़ उपलब्ध कराने का वादा किया गया है. इसका बड़ा हिस्सा कम लागत वाले लंबे समय के लोन यानी सॉफ्ट लोन के रूप में दिया जाना है. यह फंड Anusandhan National Research Foundation (ANRF) के तहत रखा गया है. ANRF एक स्वतंत्र वैधानिक निकाय है, जो प्रशासनिक रूप से DST के अधीन है.
RDI Fund के तहत निजी क्षेत्र की रिसर्च परियोजनाओं को लंबे समय के सॉफ्ट लोन के रूप में मदद देने का प्रावधान है. चुनी गई कंपनी को परियोजना की कुल लागत का अधिकतम 50 फीसदी तक फंड मिल सकता है. बाकी 50 फीसदी रकम कंपनी को गैर-सरकारी स्रोतों से जुटानी होगी. इसका मतलब है कि सरकार पूरी परियोजना की लागत नहीं उठाएगी. कंपनी को भी परियोजना में अपना हिस्सा लगाना होगा.
कैसे होगा योग्य कंपनियों का चयन?
RDI Fund के नियमों के मुताबिक, योग्य कंपनियों का चयन थर्ड पार्टी एजेंसियों के जरिए किया जाना है. इन्हें Second Level Fund Managers यानी SLFMs कहा जाता है. शुरुआत में निजी कंपनियों को फंडिंग का अनुभव रखने वाली दो सरकारी संस्थाओं को SLFM के रूप में नामित किया गया था. इनमें Technology Development Board (TDB) और Biotechnology Industry Research Assistance Council (BIRAC) शामिल हैं.
इसके अलावा करीब 30 से 40 अन्य निजी क्षेत्र की संस्थाओं को भी SLFM के तौर पर नियुक्त किए जाने की उम्मीद थी. ऐसा इसलिए किया जाना था ताकि इतने बड़े फंड को अधिक तेजी से कंपनियों तक पहुंचाया जा सके. RDI Fund लॉन्च होने के करीब एक साल बाद भी TDB की ओर से पहले राउंड में चुनी गई कंपनियों के लिए फिक्स किए गए ₹2,192 करोड़ के अलावा कोई अन्य रकम उपलब्ध नहीं कराई गई है.
क्या मिल पाई कंपनियों को भरपूर राशि?
यानी ₹1 लाख करोड़ के बड़े फंड की तुलना में अब तक कंपनियों के लिए उपलब्ध कराई गई रकम काफी सीमित रही है. इस धीमी प्रगति की एक बड़ी वजह नए SLFMs की नियुक्ति में देरी बताई जा रही है. SLFM के तौर पर नियुक्त होने के लिए आवेदन जनवरी में बंद हो गए थे. इसके बाद एक समिति ने मई में अपनी सिफारिशें भी अंतिम रूप दे दी थीं. हालांकि, नए SLFMs की नियुक्ति की प्रक्रिया में अभी तक देरी बनी हुई है. RDI Fund के तहत नामित दूसरी SLFM एजेंसी BIRAC भी अभी कंपनियों के चयन की प्रक्रिया शुरू नहीं कर पाई है. इसकी वजह टैक्स से जुड़े कुछ प्रक्रियात्मक सवाल बताए जा रहे हैं.
TDB एक वैधानिक निकाय है, जबकि BIRAC कंपनी अधिनियम की धारा 9 के तहत बनी एक गैर-लाभकारी कंपनी है. RDI Fund के नियमों में SLFMs को यह अधिकार दिया गया है कि वे किसी चयनित कंपनी को दिए गए लोन को इक्विटी में बदल सकते हैं. इससे उन्हें डिविडेंड मिल सकता है और ऐसी इक्विटी से टैक्स संबंधी देनदारियां भी पैदा हो सकती हैं.
क्या सरकार 6 साल में दे पाएगी इतना पैसा?
इसी वजह से BIRAC ने इन महत्वपूर्ण टैक्स मामलों पर वित्त मंत्रालय से स्पष्टता मांगी है. जब तक इन मुद्दों पर स्थिति स्पष्ट नहीं होती, BIRAC RDI Fund के तहत कंपनियों को पैसा देने की प्रक्रिया शुरू नहीं कर पाया है. रिपोर्ट के मुताबिक, मौजूदा गति को देखते हुए छह साल में ₹1 लाख करोड़ के लक्ष्य को हासिल करना मुश्किल हो सकता है.
सूत्र ने कहा कि RDI Fund सरकार की ओर से उठाया गया एक महत्वपूर्ण कदम है. यह पैसा भारत के टेक्नोलॉजी इकोसिस्टम के विकास के लिए बेहद जरूरी है. उनके मुताबिक, कई ऐसी कंपनियां हैं जिन्हें अपनी तकनीक को आगे बढ़ाने के लिए इस फंड की जरूरत है.
फिलहाल, नए SLFMs की नियुक्ति में देरी, BIRAC से जुड़े टैक्स संबंधी सवाल और TDB को आगे की फंडिंग के लिए रकम नहीं मिलने की वजह से RDI Fund की रफ्तार धीमी पड़ गई है. ऐसे में 300 से ज्यादा आवेदन करने वाली कंपनियों में से बाकी आवेदकों को फंड कब मिलेगा, यह आगे मिलने वाली सरकारी फंडिंग और SLFMs की नियुक्ति की प्रक्रिया पर निर्भर करेगा.